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दस करोड़ की बची जमापूंजी में नौ करोड़ का लोन

Sun, 17 May 2020 12:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2020 12:54 AM IST
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10 crore poonji, 9 crore distribute loan
आर्य नगर स्थित पीपुल्स कोआपरेटिव बैंक मे अपने पैसे निकालने के लिए फॉर्म भरते सरदार हरभजन सिंह.... ?
आर्य नगर स्थित पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक की प्रबंध समिति के कारनामे भी चौकाने वाले निकले। खाताधारकों की जमापूंजी का करीब 60 फीसदी हिस्सा लोगों को ऋण के तौर पर बांट दिया। स्थिति ये हुई कि लोन खातों से समय पर वसूूली नहीं हुई। इससे नकदी का प्रवाह ठहर गया। जमापूंजी घटकर दस करोड़ रुपये पर पहुंचने और उसमें से नौ करोड़ रुपये लोन बांटने के कारण बैंक आर्थिक संकट में फंस गया। यह स्थिति कोई एक दो महीने में नहीं आई। बल्कि बीते दो, तीन वर्ष से चली आ रही है। बावजूद इसके बैंक ने इसे दूर करने का प्रयास नहीं किया।
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पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक की कहानी आंकड़ों की भाषा में समझिए। बैंक में कुल चार हजार खाताधारकों का दो वर्ष पूर्व तक करीब 16 करोड़ रुपये जमा था। इस पूंजी में से बैंक ने करीब 1600 लोगों को लोन बांट दिया। इनमें से तमाम लोन खाते पहले से चलते आ रहे हैं। इधर सहकारी बैंकों से भरोसा उठने के चलते लोगों ने इस बैंक में अपने खातों में रुपये जमा करना कम कर दिया। बीते एक वर्ष में बैंक की इस इकलौती शाखा से करीब छह करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि लोन खाताधारकों से उनके ब्याज और मूलधन की किस्तें समय से नहीं मिलीं।
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नतीजा ये हुआ कि बैंक की जमा पूंजी 16 करोड़ रुपये से घटकर 10 करोड़ रुपये ही रह गई। इस 10 करोड़ रुपये में नौ करोड़ रुपये बैंक लोन के तौर पर बांट चुका था। यानी इस दस करोड़ रुपये से निकासी का सिलसिला शुरू हुआ तो बैंक के पास देने के लिए कुछ नहीं बचा। आखिरकार प्रबंध तंत्र और कर्मचारियों को अप्रैल 2020 का वेतन देने देने के बाद बैंक ने 12 मई को जमाकर्ताओं का भुगतान न कर पाने में असमर्थता जता दी। सामान्य भाषा में इसका अर्थ ये हुआ कि खाताधारकों की जमापूंजी बैंक ने लोन देकर डुबा दी। अब लोन के बकायेदारों से वसूली में वर्षों लगेंगे। तब तक के लिए खाताधारक अपनी जमापूंजी से हाथ धो बैठे।
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बैंक में नकदी का संकट आ गया है। आमतौर पर सभी बैंक जमा पूंजी का 60 फीसदी हिस्सा लोन के तौर बांट देते हैं। यही बैंक का व्यवसाय होता है। यह संयोग की बात है कि जमाकर्ताओं ने धीरे-धीरे कर अधिकतम पैसा निकाल लिया। जबकि ऋण खातों से उस अनुपात में वसूली नहीं हुई। रिजर्व बैंक के समक्ष पूरी बात रख दी है। उनके निर्देशों का इंतजार है। अब हम अपनी तरफ से कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। - राजीव अवस्थी, सचिव, पीपुल्स कोआपरेटिव बैंक
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