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गेहूं खरीद: 30 दिनों से बोहनी को तरस रहे 10 केंद्र
Tue, 02 May 2023 01:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 02 May 2023 01:22 AM IST
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कन्नौज। कागजों में पहली अप्रैल से गेहूं खरीद का समय शुरू हो गया था। पूरा एक महीना गुजर चुका है। अब भी खरीद प्रक्रिया ने रफ्तार नहीं पकड़ी है। जनपद के सरकारी केंद्रों पर अब तक 750 क्विंटल ही गेहूं खरीदा जा सका है। 10 केंद्र ऐसे भी हैं, जहां एक दाना तक नहीं पहुंचा है। प्रभारी सन्नाटे में बैठे हैं।
जनपद में 2125 रुपये प्रति क्विंटल में गेहूं खरीदने के लिए अलग-अलग कंपनियों के सरकारी 34 केंद्र खोले गए हैं। आढ़तों पर करीब 2200 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। किसानों को बाजार में भाव अधिक मिल रहा है, जिसकी वजह से वे गेहूं सरकारी केंद्रों पर बिक्री करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। इस कारण ज्यादातर केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।
दूसरा कारण यह भी कि बाजार या आढ़तों पर गेहूं बिक्री करने पर नकद भुगतान हो जाता है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर पीएफएमएस से रुपया बैंक खातों में भेजा जाता है। कभी-कभी इसमें काफी दिन भी लग जाते हैं। जिस वजह से बाजार में गेहूं बिक्री करने के लिए किसान अधिक पहुंच रहे हैं।
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गेहूं खरीदने के लिए शासन ने सरकारी गेहूं खरीद केंद्र खोले हैं। केंद्र पर एक माह में दो किसानों के मात्र 90 कुंतल गेहूं की खरीद हुई है। आढ़तों पर समर्थन मूल्य से अधिक भाव होने पर लक्ष्य पूरा करना सरकार के लिए चुनौती बन रहा है।
शासन के निर्देश पर किसानों के गेहूं की खरीद करने के लिए तहसील क्षेत्र में करीब 10 सरकारी गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2125 रुपये प्रति कुंतल रखा गया है। बीते वर्ष की अपेक्षा 110 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
आढ़तों में चल रहे 2200 से 2300 रुपये प्रति कुंतल के भाव से सरकारी समर्थन मूल्य कम है। केंद्र प्रभारी राज कुमार ने बताया कि बरसात होने के कारण गेहूं की कटाई देरी से हो रही है। जिस कारण एक माह में 90 कुंतल गेहूं की खरीद की जा सकती है। शासन का लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
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जनपद में 2125 रुपये प्रति क्विंटल में गेहूं खरीदने के लिए अलग-अलग कंपनियों के सरकारी 34 केंद्र खोले गए हैं। आढ़तों पर करीब 2200 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। किसानों को बाजार में भाव अधिक मिल रहा है, जिसकी वजह से वे गेहूं सरकारी केंद्रों पर बिक्री करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। इस कारण ज्यादातर केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है।
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दूसरा कारण यह भी कि बाजार या आढ़तों पर गेहूं बिक्री करने पर नकद भुगतान हो जाता है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर पीएफएमएस से रुपया बैंक खातों में भेजा जाता है। कभी-कभी इसमें काफी दिन भी लग जाते हैं। जिस वजह से बाजार में गेहूं बिक्री करने के लिए किसान अधिक पहुंच रहे हैं।
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गेहूं खरीदने के लिए शासन ने सरकारी गेहूं खरीद केंद्र खोले हैं। केंद्र पर एक माह में दो किसानों के मात्र 90 कुंतल गेहूं की खरीद हुई है। आढ़तों पर समर्थन मूल्य से अधिक भाव होने पर लक्ष्य पूरा करना सरकार के लिए चुनौती बन रहा है।
शासन के निर्देश पर किसानों के गेहूं की खरीद करने के लिए तहसील क्षेत्र में करीब 10 सरकारी गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2125 रुपये प्रति कुंतल रखा गया है। बीते वर्ष की अपेक्षा 110 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
आढ़तों में चल रहे 2200 से 2300 रुपये प्रति कुंतल के भाव से सरकारी समर्थन मूल्य कम है। केंद्र प्रभारी राज कुमार ने बताया कि बरसात होने के कारण गेहूं की कटाई देरी से हो रही है। जिस कारण एक माह में 90 कुंतल गेहूं की खरीद की जा सकती है। शासन का लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।