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जिले में सड़कों का जाल गांव में गलियां बदहाल
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
Updated Wed, 14 Jan 2015 12:15 AM IST
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प्रदेश सरकार की मेहरबानी से जिले में सड़कों का जाल तूफानी रफ्तार से फैलाया जा रहा है। बीते तीन सालों में 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि सड़क निर्माण के लिए जिले में आ चुकी है। शहरी इलाकों में गलियों को भी सीसी रोड में तब्दील किया जा रहा है। अगर कहीं कंजूसी बरती जा रही है तो वह हैं गांव की गलियां।
अधिकांश गांवों में गड्ढायुक्त सड़कें अभी तक ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। वहीं दूसरी ओर सड़कों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ठेकेदार ज्यादा कमाई के लालच में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं। इसके चलते जगह-जगह सड़कें उखड़ने व गड्ढे गहरे होने का सिलसिला भी तेजी पकड़ चुका है।
जिले में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत 200 से ज्यादा सड़कें बनाने के लिए धनराशि मिल चुकी है। 50 से ज्यादा सड़कों का चौड़ीकरण कार्य कराया गया है। इनमें से ज्यादातर सड़कें चौड़ी हो गई हैं, जबकि तमाम पर काम चल रहा है।
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क्षेत्रीय विधायकों के साथ ही अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर भी सड़कों के निर्माण का कार्य चल रहा है। समधन, कन्नौज शहर के अंदर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च करके सड़कों को चमाचम किया गया है।
तहसील व जिला मुख्यालयों को कसबों, बड़ी ग्राम सभाओं से जोड़ने वाली सड़कों को चौड़ीकरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ी हैं।
जिले को पहला फोरलेन देने का काम भी हो रहा है। लोहिया चौराहा तिर्वा क्रासिंग से तिर्वा कसबे तक 15 किमी रोड की चौड़ाई बढ़ाकर फोरलेन की जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर भी 56 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च हो रही है। शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने वाले खस्ताहाल बाईपास की मरम्मत भी 10 करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये खर्च करके कराई जा चुकी है।
वर्ष 2014-15 के तहत भी एक सैकड़ा से ज्यादा सड़कें त्वरित आर्थिक विकास योजना से बनाने के लिए स्टीमेट बनाकर लोकनिर्माण विभाग के अधिकारी भेज चुके हैं। सड़क निर्माण के क्षेत्र में काम अधिक होने के कारण ही लोकनिर्माण विभाग को एक अतिरिक्त खंड खोलना पड़ा।
दो खंडों का काम एक एक्सईएन के पास
लोकनिर्माण विभाग में प्रांतीय खंड और निर्माण खंड एक के अधिशासी अभियंता का कार्यभार एक ही इंजीनियर को देखना पड़ रहा है। प्रांतीय खंड के एक्सईएन का तबादला होने के बाद किसी की तैनाती नहीं हो सकी है।
काम के बंटवारे को लेकर मची खींचतान
पीडब्ल्यूडी में अधिक से अधिक काम लेने के लिए अभियंताओं के बीच खींचतान मची है। इंजीनियर यूनियन के एक पदाधिकारी और एक जेई के बीच बीते दिनों जमकर विवाद हुआ था। मामला अभद्रता से लेकर धमकाने तक पहुंचा तो जेई ने ऊपर तक शिकायत पहुंचाई। बाद में संगठन के पदाधिकारियों ने बीच में पड़कर मामला रफा-दफा कराया।
कारों से चलने लगे बाइक सवार इंजीनियर
कन्नौज में सड़कें बनाने के लिए ताबड़तोड़ बजट आने के कारण कल तक बाइकों से साइटों पर पहुंचने वाले ज्यादातर जेई से लेकर पीडब्ल्यूडी कर्मचारी तक आजकल लग्जरी कारों से पहुंच रहे हैं। कमाई के ढेरों अवसर होने के कारण यहां तैनाती के लिए प्रदेश भर के इंजीनियरों में होड़ मची है। जेई यहां आने के लिए जोड़तोड़ भिड़ा रहे हैं। वहीं ठेकेदार भी चांदी काट रहे हैं। ठेकेदारों की लग्जरी कारों का काफिला पीडब्ल्यूडी कार्यालय व निर्माणाधीन सड़कों पर कभी भी देखा जा सकता है।
गुणवत्ता पर सवाल, कार्रवाई कुछ भी नहीं
जिले में बन चुकीं और निर्माणाधीन सड़कों की गुणवत्ता पर शासन से आए नोडल अफसर पीडब्ल्यूडी के ही सचिव डा. हरिओम, तत्कालीन टीम डा. रूपेश कुमार, तत्कालीन डीएम राजेश कुमार से लेकर कई अन्य अफसरों ने चेकिंग की तो खामियां मिलीं।
कहीं गिट्टी कम निकली तो कहीं इंटरलाकिंग ईंटें घटिया लगाई गईं। बैठकों में भी गुणवत्ता को लेकर प्रश्नचिह्न लगे तो इंजीनियरों को फटकार लगी। कार्रवाई के आदेश कई बार हुए पर घूम-फिरकर मामला ठंडे बस्ते में ही पहुंच गया। जांच दर जांचें चलती हैं पर इंजीनियरों व ठेकेदारों पर एक्शन सिर्फ कोरम पूरा करने तक सिमटकर रह जाता है।
तालग्राम की तीन सड़कें अधूरी
तालग्राम से छिबरामऊ, रामाश्रम और मलिकपुर जाने वाली तीनों रोडों को बनाने में लोकनिर्माण विभाग ने देरी करने की इंतहां कर दी है। छिबरामऊ में तो लोग कई दिनों तक अनशन भी कर चुके हैं। एक साल से तीनों ही सड़कों पर बिखरी पड़ी गिट्टी और दिग्गज जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवालों को पैदा कर रही है।
पीडब्ल्यूडी के सूत्रों की मानें तो तीनों ही सड़कों का ठेका सफेदपोश नेताओं के पास है। पहले एक सड़क को चौड़ी करने के लिए एक जनप्रनिधि के करीबी ठेकेदार ने प्रस्ताव रिवाइज कराया तो देखादेखी दो अन्य सड़कों के असरदार ठेकेदारों ने भी अपने स्टीमेट संशोधित कराकर बढ़वा दिए।
तीनों ही सड़कों का रिवाइज स्टीमेट पास कराने के लिए नेताओं ने अपनी प्रतिष्ठा जोड़ ली है। इसीलिए एक साल से जनता गिट्टी की मार झेलने को मजबूर है। अनशनकारियों को जनवरी अंत तक सड़क निर्माण शुरु होने का आश्वासन मिला है पर क्या ऐसा हो पाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिले में सड़कें युद्धस्तर से बनाई जा रही हैं। इनमें गुणवत्तायुक्त सामग्री डाली जाती है। एई, जेई के अलावा वह खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करते हैं। कुछ जगह कमियां निकलती हैं तो उन्हें प्राथमिकता से ठीक कराया जाता है। शासन-प्रशासन के अधिकारी और जिले के जनप्रतिनिधि सड़कों के निर्माण की गति व क्वालिटी से संतुष्ट हैं।
- संजय श्रीवास्तव, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।
पीडब्ल्यूडी द्वारा घटिया सड़कें बनाने की शिकायतें मिल रही हैं। अब क्वालिटी सुधारने के लिए सख्ती होगी। जो ठेकेदार व इंजीनियर गड़बड़ी करेंगे उन्हें दंडित कराया जाएगा। कमीशनखोरी के चक्कर में घटिया काम को ओके बताने वाले इंजीनियरों को चिह्नित कर कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर लिखापढ़ी कराई जाएगी।
रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी
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अधिकांश गांवों में गड्ढायुक्त सड़कें अभी तक ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। वहीं दूसरी ओर सड़कों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ठेकेदार ज्यादा कमाई के लालच में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं। इसके चलते जगह-जगह सड़कें उखड़ने व गड्ढे गहरे होने का सिलसिला भी तेजी पकड़ चुका है।
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जिले में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत 200 से ज्यादा सड़कें बनाने के लिए धनराशि मिल चुकी है। 50 से ज्यादा सड़कों का चौड़ीकरण कार्य कराया गया है। इनमें से ज्यादातर सड़कें चौड़ी हो गई हैं, जबकि तमाम पर काम चल रहा है।
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क्षेत्रीय विधायकों के साथ ही अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर भी सड़कों के निर्माण का कार्य चल रहा है। समधन, कन्नौज शहर के अंदर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च करके सड़कों को चमाचम किया गया है।
तहसील व जिला मुख्यालयों को कसबों, बड़ी ग्राम सभाओं से जोड़ने वाली सड़कों को चौड़ीकरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ी हैं।
जिले को पहला फोरलेन देने का काम भी हो रहा है। लोहिया चौराहा तिर्वा क्रासिंग से तिर्वा कसबे तक 15 किमी रोड की चौड़ाई बढ़ाकर फोरलेन की जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर भी 56 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च हो रही है। शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने वाले खस्ताहाल बाईपास की मरम्मत भी 10 करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये खर्च करके कराई जा चुकी है।
वर्ष 2014-15 के तहत भी एक सैकड़ा से ज्यादा सड़कें त्वरित आर्थिक विकास योजना से बनाने के लिए स्टीमेट बनाकर लोकनिर्माण विभाग के अधिकारी भेज चुके हैं। सड़क निर्माण के क्षेत्र में काम अधिक होने के कारण ही लोकनिर्माण विभाग को एक अतिरिक्त खंड खोलना पड़ा।
दो खंडों का काम एक एक्सईएन के पास
लोकनिर्माण विभाग में प्रांतीय खंड और निर्माण खंड एक के अधिशासी अभियंता का कार्यभार एक ही इंजीनियर को देखना पड़ रहा है। प्रांतीय खंड के एक्सईएन का तबादला होने के बाद किसी की तैनाती नहीं हो सकी है।
काम के बंटवारे को लेकर मची खींचतान
पीडब्ल्यूडी में अधिक से अधिक काम लेने के लिए अभियंताओं के बीच खींचतान मची है। इंजीनियर यूनियन के एक पदाधिकारी और एक जेई के बीच बीते दिनों जमकर विवाद हुआ था। मामला अभद्रता से लेकर धमकाने तक पहुंचा तो जेई ने ऊपर तक शिकायत पहुंचाई। बाद में संगठन के पदाधिकारियों ने बीच में पड़कर मामला रफा-दफा कराया।
कारों से चलने लगे बाइक सवार इंजीनियर
कन्नौज में सड़कें बनाने के लिए ताबड़तोड़ बजट आने के कारण कल तक बाइकों से साइटों पर पहुंचने वाले ज्यादातर जेई से लेकर पीडब्ल्यूडी कर्मचारी तक आजकल लग्जरी कारों से पहुंच रहे हैं। कमाई के ढेरों अवसर होने के कारण यहां तैनाती के लिए प्रदेश भर के इंजीनियरों में होड़ मची है। जेई यहां आने के लिए जोड़तोड़ भिड़ा रहे हैं। वहीं ठेकेदार भी चांदी काट रहे हैं। ठेकेदारों की लग्जरी कारों का काफिला पीडब्ल्यूडी कार्यालय व निर्माणाधीन सड़कों पर कभी भी देखा जा सकता है।
गुणवत्ता पर सवाल, कार्रवाई कुछ भी नहीं
जिले में बन चुकीं और निर्माणाधीन सड़कों की गुणवत्ता पर शासन से आए नोडल अफसर पीडब्ल्यूडी के ही सचिव डा. हरिओम, तत्कालीन टीम डा. रूपेश कुमार, तत्कालीन डीएम राजेश कुमार से लेकर कई अन्य अफसरों ने चेकिंग की तो खामियां मिलीं।
कहीं गिट्टी कम निकली तो कहीं इंटरलाकिंग ईंटें घटिया लगाई गईं। बैठकों में भी गुणवत्ता को लेकर प्रश्नचिह्न लगे तो इंजीनियरों को फटकार लगी। कार्रवाई के आदेश कई बार हुए पर घूम-फिरकर मामला ठंडे बस्ते में ही पहुंच गया। जांच दर जांचें चलती हैं पर इंजीनियरों व ठेकेदारों पर एक्शन सिर्फ कोरम पूरा करने तक सिमटकर रह जाता है।
तालग्राम की तीन सड़कें अधूरी
तालग्राम से छिबरामऊ, रामाश्रम और मलिकपुर जाने वाली तीनों रोडों को बनाने में लोकनिर्माण विभाग ने देरी करने की इंतहां कर दी है। छिबरामऊ में तो लोग कई दिनों तक अनशन भी कर चुके हैं। एक साल से तीनों ही सड़कों पर बिखरी पड़ी गिट्टी और दिग्गज जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवालों को पैदा कर रही है।
पीडब्ल्यूडी के सूत्रों की मानें तो तीनों ही सड़कों का ठेका सफेदपोश नेताओं के पास है। पहले एक सड़क को चौड़ी करने के लिए एक जनप्रनिधि के करीबी ठेकेदार ने प्रस्ताव रिवाइज कराया तो देखादेखी दो अन्य सड़कों के असरदार ठेकेदारों ने भी अपने स्टीमेट संशोधित कराकर बढ़वा दिए।
तीनों ही सड़कों का रिवाइज स्टीमेट पास कराने के लिए नेताओं ने अपनी प्रतिष्ठा जोड़ ली है। इसीलिए एक साल से जनता गिट्टी की मार झेलने को मजबूर है। अनशनकारियों को जनवरी अंत तक सड़क निर्माण शुरु होने का आश्वासन मिला है पर क्या ऐसा हो पाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिले में सड़कें युद्धस्तर से बनाई जा रही हैं। इनमें गुणवत्तायुक्त सामग्री डाली जाती है। एई, जेई के अलावा वह खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करते हैं। कुछ जगह कमियां निकलती हैं तो उन्हें प्राथमिकता से ठीक कराया जाता है। शासन-प्रशासन के अधिकारी और जिले के जनप्रतिनिधि सड़कों के निर्माण की गति व क्वालिटी से संतुष्ट हैं।
- संजय श्रीवास्तव, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।
पीडब्ल्यूडी द्वारा घटिया सड़कें बनाने की शिकायतें मिल रही हैं। अब क्वालिटी सुधारने के लिए सख्ती होगी। जो ठेकेदार व इंजीनियर गड़बड़ी करेंगे उन्हें दंडित कराया जाएगा। कमीशनखोरी के चक्कर में घटिया काम को ओके बताने वाले इंजीनियरों को चिह्नित कर कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर लिखापढ़ी कराई जाएगी।
रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी