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दहशतगर्दी के खिलाफ उलमा
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Wed, 17 May 2017 12:21 AM IST
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रसूले आजम कांफ्रेंस में तकरीर करते मुफ्ती उस्मान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के मदरसा दारुल उलूम गौसिया के 18वें रसूले आजम इंटरनेशनल कांफ्रेंस में आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा। देश-विदेश से आए उलमा ने दहशतगर्दी की खिलाफत करते हुए सूफीवाद और आतंकवाद को एक-दूसरे के विपरीत बताया। कांफ्रेंस के दौरान दस्तारबंदी की गई।
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इस्तांबुल टर्की से कांफ्रेंस में शिरकत करने आए शेख नासी तोरबा ने कहा कि आईएसआईएस, तालिबान, अलकायदा आदि आतंकी संगठनों में से कोई भी सूफी विचारधारा को नहीं मानता। बल्कि वह सूफियों के विरुद्ध हैं और पूरी दुनिया में जहां भी सक्रिय हैं सूफियों को मौत के घाट उतारकर मजारों को तोड़ रहे हैं।
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आला हजरत ने फतवा हसामुल हरमैन लिखकर 1902 में ही पूरी दुनिया को आतंक के प्रति आगाह कर दिया था। मुफ्ती शमसुद्दीन साहब बहराइची ने मुसलमानों से नबी के बताए रास्ते पर चलने की हिदायत की। गोंडा से आए मुफ्ती मसीहुद्दीन ने कहा कि इस्लाम अमन-चैन का मजहब है। कुछ लोग जो कट्टरपंथी हैं, सूफीवाद को खत्म करके लोगों में कट्टरता फैलाना चाहते हैं। नेपाल के जनकपुर धाम से आए मुफ्ती उस्मान ने कहा कि आएदिन सुन्नी मस्जिदों व दरगाहों पर हमले हो रहे हैं। हमला करने वाले उसी विचारधारा के लोग हैं जिन्होंने 1925 में पैगंबर के पवित्र परिजनों एवं सहाबा की मजारों पर बुल्डोजर चलाया था। उन्होंने मुसलमानों से इल्म हासिल करने की अपील करते हुए कहा कि वह लोग कट्टरता में अंधे होकर फिर खुद को मुसलमान समझते हैं और दूसरों को हेयदृष्टि से देखते हैं। कांफ्रेंस के आयोजक हजरत मौलाना मुस्तकीम अहमद कादरी ने शेखनासी तोरबा का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें कन्नौज का मशहूर इत्र भेंट किया।
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प्रधानाचार्य कारी शमसुलकमर ने कहा कि इस्लाम में इल्म की बड़ी अहमियत है। इस दौरान मौलाना शाहिद रजा, मौलाना अजमल, मौलाना राशिद, सै.अनस मियां वास्ती, हाफिज अहसन, हाफिज मुजीब, कमरुल जमा खां, सै.मो.कामरान, जीशान, मो.जैनुल खां, मुजफ्फर, महफूज, जाहिद चिश्ती, पूर्व सभासद नबीउल्ला खां आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।