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तिर्वा में गहरा तालाब पाटने का होगा कड़ा विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Fri, 19 Dec 2014 12:18 AM IST
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कस्बे के गहरा तालाब को पाटकर उसे व्यवसायिक रुप देने
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के खिलाफ कस्बे के सैकड़ों नागरिकों के साथ मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित
डा.संदीप पांडेय ने धरना दिया।
करीब चार घंटे तक चले धरने के दौरान उन्होंने नागरिकों के अस्तित्व की लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प लिया। बाद में समस्या को लेकर नागरिकों के साथ उन्होने एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा।
कस्बे के मध्य में आजाद नगर मोहल्ले में करीब चालीस बीघा की आराजी में गहरा तालाब है। इस तालाब का स्वामित्व कन्नौज के तीन व्यवसायियों के पास है।
पिछले कुछ दि से तालाब को पाटने का काम चल रहा था। इसके विरोध में गांधियन कम्युनिटी एक्शन के प्रांतीय अध्यक्ष शाहिद अंसारी प्रयास कर रहे थे। गुरुवार सुबह ग्यारह बजे से तालाब के सामने दो सैकड़ा से अधिक लोग धरने पर बैठ गए।
दोपहर बारह बजे के करीब डा.संदीप पांडेय धरना स्थल पर पहुंचे। यहां मौजूद नागरिकों ने उनका माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। बाद में धरना सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जल दोहन की समस्या से पूरा विश्व सामना कर रहा है।
तिर्वा के गहरा तालाब में ही पूरे कस्बे का पानी आता है। इस तालाब को पाटने से जल निकासी की समस्या उत्पन्न होगी। साथ ही तिर्वा में वाटर लेवल का स्तर भी नीचे चला जाएगा। भविष्य में यह समस्या तिर्वा के पचास हजार आबादी के लिए संकट का कारण होगी।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का भी आदेश है कि देश के किसी भी तालाब की प्रकृति परिवर्तित नहीं की जाएगी। इसके बावजूद तालाब के मालिक इसे व्यवसायिक रुप देने के प्रयास में है।
धरना सभा को शाहिद अंसारी, भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमकार राजपूत, लखनऊ से आए पत्रकार हफीज किदवई ने भी संबोधित किया। बाद में उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तालाब की प्रकृति परिवर्तित न किए जाने का अनुरोध किया।
करीब चार घंटे तक चले धरने के दौरान उन्होंने नागरिकों के अस्तित्व की लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प लिया। बाद में समस्या को लेकर नागरिकों के साथ उन्होने एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा।
कस्बे के मध्य में आजाद नगर मोहल्ले में करीब चालीस बीघा की आराजी में गहरा तालाब है। इस तालाब का स्वामित्व कन्नौज के तीन व्यवसायियों के पास है।
पिछले कुछ दि से तालाब को पाटने का काम चल रहा था। इसके विरोध में गांधियन कम्युनिटी एक्शन के प्रांतीय अध्यक्ष शाहिद अंसारी प्रयास कर रहे थे। गुरुवार सुबह ग्यारह बजे से तालाब के सामने दो सैकड़ा से अधिक लोग धरने पर बैठ गए।
दोपहर बारह बजे के करीब डा.संदीप पांडेय धरना स्थल पर पहुंचे। यहां मौजूद नागरिकों ने उनका माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। बाद में धरना सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जल दोहन की समस्या से पूरा विश्व सामना कर रहा है।
तिर्वा के गहरा तालाब में ही पूरे कस्बे का पानी आता है। इस तालाब को पाटने से जल निकासी की समस्या उत्पन्न होगी। साथ ही तिर्वा में वाटर लेवल का स्तर भी नीचे चला जाएगा। भविष्य में यह समस्या तिर्वा के पचास हजार आबादी के लिए संकट का कारण होगी।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का भी आदेश है कि देश के किसी भी तालाब की प्रकृति परिवर्तित नहीं की जाएगी। इसके बावजूद तालाब के मालिक इसे व्यवसायिक रुप देने के प्रयास में है।
धरना सभा को शाहिद अंसारी, भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमकार राजपूत, लखनऊ से आए पत्रकार हफीज किदवई ने भी संबोधित किया। बाद में उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तालाब की प्रकृति परिवर्तित न किए जाने का अनुरोध किया।