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Kannauj News: बेटे ने सुनी आवाज... तो मां के छलके आंसू
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कन्नौज। जन्म के छह माह बाद बेटा बड़ा हो गया। मां ने आवाज दी पर बेटे ने कोई हरकत नहीं की। धीरे-धीरे तीन साल का हो गया। बेटे ने आवाज सुनकर न तो काेई हरकत की और न ही मुंह से कुछ बोला।
परिजन डॉक्टरों के पास लेकर पहुंचे तो पता चला कि बेटा मूकबधिर है। ऐसा सुनते ही माता-पिता सन्न रह गए। अब आरबीएसके की मदद से कॉक्लियर इम्प्लांट का सफल ऑपरेशन हुआ और बेटे ने मां की आवाज सुनी...तो मां के आंसू छलक पड़े।
ग्राम जयसिंहपुर निवासी अजीत कुमार का तीन साल का बेटा प्रलव कुमार न तो सुन पाता था और न ही बोल पाता था। परिजनों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन (आरबीएसके) टीम से मिले। टीम ने प्रलव की जांच की और उसे कानपुर भेज दिया, जहां पर जांच के बाद डॉक्टर ने कॉक्लियर इम्प्लांट लगाने की बात कही। आरबीएसके की ओर से प्रलव की फाइल बनाई गई और बजट के लिए भेजी गई। 10 अक्तूबर को कानपुर निजी अस्पताल में प्रलव का सफल ऑपरेशन हो गया।
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दूसरा मामला शहर के मकरंदनगर के मोहल्ला रितुकला निवासी दीपू के तीन साल के बेटे मोहन का है। वह भी तीन साल तक मां की आवाज सुनकर कोई हरकत नहीं करता था और न ही बोल पाता था। आरबीएसके टीम के प्रयास से सात अक्तूबर को मोहन की भी सफल सर्जरी हो गई। प्रोग्राम मैनेजर वीरेश कुमार ने बताया कि दो बच्चों का कॉक्लियर इम्लांट कराया गया है। एक और बच्चे का इसी माह ऑपरेशन हो जाएगा।
इनसेट
अब होगी स्पीच थेरेपी
अब बच्चों की स्पीच थेरेपी कराई जाएगी, जिसमें उनको अलग-अलग आवाजों को सुनना, पहचानना और उनमें अंतर करना सिखाया जाता है। साथ ही, शब्दों का सही उच्चारण और बातचीत करने की क्षमता विकसित की जाती है।
वर्जन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 साल तक के बच्चों में जन्मजात विकारों से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाता है। दो मूकबधिर बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया है।-- डॉ. विकास चंद्रा, सीएमओ
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परिजन डॉक्टरों के पास लेकर पहुंचे तो पता चला कि बेटा मूकबधिर है। ऐसा सुनते ही माता-पिता सन्न रह गए। अब आरबीएसके की मदद से कॉक्लियर इम्प्लांट का सफल ऑपरेशन हुआ और बेटे ने मां की आवाज सुनी...तो मां के आंसू छलक पड़े।
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ग्राम जयसिंहपुर निवासी अजीत कुमार का तीन साल का बेटा प्रलव कुमार न तो सुन पाता था और न ही बोल पाता था। परिजनों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन (आरबीएसके) टीम से मिले। टीम ने प्रलव की जांच की और उसे कानपुर भेज दिया, जहां पर जांच के बाद डॉक्टर ने कॉक्लियर इम्प्लांट लगाने की बात कही। आरबीएसके की ओर से प्रलव की फाइल बनाई गई और बजट के लिए भेजी गई। 10 अक्तूबर को कानपुर निजी अस्पताल में प्रलव का सफल ऑपरेशन हो गया।
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दूसरा मामला शहर के मकरंदनगर के मोहल्ला रितुकला निवासी दीपू के तीन साल के बेटे मोहन का है। वह भी तीन साल तक मां की आवाज सुनकर कोई हरकत नहीं करता था और न ही बोल पाता था। आरबीएसके टीम के प्रयास से सात अक्तूबर को मोहन की भी सफल सर्जरी हो गई। प्रोग्राम मैनेजर वीरेश कुमार ने बताया कि दो बच्चों का कॉक्लियर इम्लांट कराया गया है। एक और बच्चे का इसी माह ऑपरेशन हो जाएगा।
इनसेट
अब होगी स्पीच थेरेपी
अब बच्चों की स्पीच थेरेपी कराई जाएगी, जिसमें उनको अलग-अलग आवाजों को सुनना, पहचानना और उनमें अंतर करना सिखाया जाता है। साथ ही, शब्दों का सही उच्चारण और बातचीत करने की क्षमता विकसित की जाती है।
वर्जन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 साल तक के बच्चों में जन्मजात विकारों से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाता है। दो मूकबधिर बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया है।