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लंबी उम्र को बहनों ने किया तिलक
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Fri, 13 Nov 2015 11:42 PM IST
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भइया दूज का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। बहनों
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ने भाईयों के तिलक कर उनकी लंबी उम्र की ईश्वर से कामना की। भाईयों ने भी
अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेकर उन्हें उपहार भेंट किए। उधर, दीपावली
के बाद भइया दूज के दिन भी मिठाई खरीदने को लेकर मिठाई की दुकानों पर जमकर
खरीदारी हुई। पूरे दिन दुकानों पर भीड़ बनी रही।
दीपावली के बाद तीसरे दिन भइया दूज के त्योहार को मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है। इस दिन बहनें सुबह से ही व्रत रखकर भाईयों के माथे पर रोली और चावल का टीका कर मुंह मीठा करा दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करते हैं।
बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भइया दूज को सुबह से व्रत रखकर तब तक कुछ भी नहीं खाती जब तक भाई को टीका कर दूज नहीं खिला देती। कुछ बहनें जो किन्हीं कारणों से भाईयों के पास नहीं पहुंच पाती, वह गरी का गोला खरीद कर उसमें टीका कर भइया दूज की परंपरा का निर्वाह कर देती हैं।
ज्ञात हो कि नवरात्र, विजयदशमी फिर करवाचौथ और दीवाली का धूमधड़ाका और फिर इसके बाद बीच में एक दिन परवा और फिर अगले दिन भाई-बहन के अटूट रिश्तों को सहेजे भइया दूज का त्योहार यह परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी बदस्तूर कायम है।
उधर, सुबह से ही मिठाई खरीदने को लेकर होड़ मची रही। नगर में मिष्ठान विक्रेताओं ने अपनी दुकानों को बहुत बेहतर ढंग से सजा रखा था। आकर्षक ढंग से सजी रंग बिरंगी मिठाइयों को खरीदने के लिए सुबह से ही भीड़ का तांता लग गया। उधर, भइया दूज पर बहने अपने भाई को तिलक कर मिठाई के साथ गरी का गोला भी भेंट करती हैं।
ऐसे में बाजारों में गरी के गोलों की मांग बढ़ जाती है। दुकानदारों ने मौके का फायदा उठाया और गरी के गोले का भाव बढ़ा दिया। हालत यह थी कि 100 रुपये किलो में बिकने वाले गरी के गोले का भाव भइया दूज पर 200 रुपये किलो तक धड़ल्ले से बिका। उधर, भइया दूज पर तगड़ी भीड़ उमड़ी। बहनें जान हथेली पर रखकर मायके पहुंची।
डग्गामार वाहनों की चांदी रही। भीड़ वाले स्थानों पर जेबकतरे भी सक्रिय रहे। शुक्रवार को बहनों में अपने मायके जल्दी पहुंचने की ललक देखने को मिली। फर्रुखाबाद, सौरिख, तालग्राम जाने वाली बसें फुल रहीं। छत पर भी सवारियां बैठ कर गई। विशुनगढ़ रोड व सौरिख रोड पर डग्गामार वाहनों ने ठूंस ठूंस कर सवारियां बैठाई।
इससे यात्रा करने वालों की जान पर बनी रही। गुरसहायगंज, बेवर जाने वाली सवारियों के साथ भी ऐसा ही रहा। बहनों ने ट्रक से भी यात्रा की। बसों में जगह न मिलने से उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा। ट्रक वालों ने मोटी कमाई की। टेंपो, मैजिक वालों ने भी मौके का फायदा उठाते हुए अधिक किराया वसूला।
दीपावली के बाद तीसरे दिन भइया दूज के त्योहार को मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है। इस दिन बहनें सुबह से ही व्रत रखकर भाईयों के माथे पर रोली और चावल का टीका कर मुंह मीठा करा दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करते हैं।
बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भइया दूज को सुबह से व्रत रखकर तब तक कुछ भी नहीं खाती जब तक भाई को टीका कर दूज नहीं खिला देती। कुछ बहनें जो किन्हीं कारणों से भाईयों के पास नहीं पहुंच पाती, वह गरी का गोला खरीद कर उसमें टीका कर भइया दूज की परंपरा का निर्वाह कर देती हैं।
ज्ञात हो कि नवरात्र, विजयदशमी फिर करवाचौथ और दीवाली का धूमधड़ाका और फिर इसके बाद बीच में एक दिन परवा और फिर अगले दिन भाई-बहन के अटूट रिश्तों को सहेजे भइया दूज का त्योहार यह परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी बदस्तूर कायम है।
उधर, सुबह से ही मिठाई खरीदने को लेकर होड़ मची रही। नगर में मिष्ठान विक्रेताओं ने अपनी दुकानों को बहुत बेहतर ढंग से सजा रखा था। आकर्षक ढंग से सजी रंग बिरंगी मिठाइयों को खरीदने के लिए सुबह से ही भीड़ का तांता लग गया। उधर, भइया दूज पर बहने अपने भाई को तिलक कर मिठाई के साथ गरी का गोला भी भेंट करती हैं।
ऐसे में बाजारों में गरी के गोलों की मांग बढ़ जाती है। दुकानदारों ने मौके का फायदा उठाया और गरी के गोले का भाव बढ़ा दिया। हालत यह थी कि 100 रुपये किलो में बिकने वाले गरी के गोले का भाव भइया दूज पर 200 रुपये किलो तक धड़ल्ले से बिका। उधर, भइया दूज पर तगड़ी भीड़ उमड़ी। बहनें जान हथेली पर रखकर मायके पहुंची।
डग्गामार वाहनों की चांदी रही। भीड़ वाले स्थानों पर जेबकतरे भी सक्रिय रहे। शुक्रवार को बहनों में अपने मायके जल्दी पहुंचने की ललक देखने को मिली। फर्रुखाबाद, सौरिख, तालग्राम जाने वाली बसें फुल रहीं। छत पर भी सवारियां बैठ कर गई। विशुनगढ़ रोड व सौरिख रोड पर डग्गामार वाहनों ने ठूंस ठूंस कर सवारियां बैठाई।
इससे यात्रा करने वालों की जान पर बनी रही। गुरसहायगंज, बेवर जाने वाली सवारियों के साथ भी ऐसा ही रहा। बहनों ने ट्रक से भी यात्रा की। बसों में जगह न मिलने से उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा। ट्रक वालों ने मोटी कमाई की। टेंपो, मैजिक वालों ने भी मौके का फायदा उठाते हुए अधिक किराया वसूला।