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Kannauj News: डार्क जोन ब्लाॅक के गांवों की नौ करोड़ से बदलेगी सूरत
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कन्नौज। बारिश से पहले जल संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इस कार्य पर 902 लाख रुपये से खर्च किए जाएंगे। इससे 56 गांवों को लाभ मिलेगा। जलागम विकास घटक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत डार्क जोन जलालाबाद और तालग्राम के गांवों की सूरत बदलेगी। साथ ही जल स्तर की स्थिति भी सुधरेगी।
जलालाबाद और तालग्राम ब्लाॅक डार्क जोन में है। दोनों ब्लाॅक में करीब 56 गांव आते हैं। वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप ए के देशराज सिंह ने बताया कि डार्क जोन ब्लाॅक में 13 माइक्रो वाटरशेड का चयन किया गया। प्रत्येक माइक्रो वाटरशेड की कमेटी बनाई गई है। कमेटी में प्रधान को अध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही भूमि संरक्षण विभाग के प्राविधिक सहायक ग्रुप सी के कर्मचारी को सचिव बनाया गया है। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने कार्यों की स्वीकृति दे दी है। डार्कजोन गांवों में 4100 हेक्टेयर में कुल 902 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। भूमि संरक्षण अधिकारी आरके वर्मा ने बताया कि कई गांवों में कार्य किए गए हैं।
इनसेट
यह माइक्रोवार वाटरशेड कमेटी के गांव
जेवां, तिलपई डिगसरा, वसीरापुर भाट, नदसिया, अनौगी, सियरमऊ, फतेहपुर जसोदा, वैसावारी, नरमऊ, गुगरापुर बांगर, सकरहनी, अमोलर और बरगांव हैं।
इनसेट
प्रारंभिक क्रिया-कलाप के यह होंगे कार्य
तालाबा, जीर्णोद्वार, कुआं मरम्मत एवं जीर्णोद्वार, हैंडपंप सार्वजनिक स्थान पर सोक पिट, रिचार्ज पिट का निर्माण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, तालाबों पर रपटा व घाट का निर्माण, पूर्व से विद्यमान जल स्रोतों का जीर्णोद्धार, पशुओं जहां पानी पीने आते हैं घाट का निर्माण, आस्थामूलक कार्य-मंदिर, अन्य स्थान पर चबूतरा का निर्माण होगा।
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इनसेट
यह है उत्पादन प्रणाली
- फसल विविधता को बढ़ावा देना।
- जैविक-प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन देना।
- कृषि वानिकी सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देना।
- मत्स्य पालन।
इनसेट
आजीविका संवर्द्धन के लिए किए जाने वाले कार्य
मुर्गी, बकरी, भेड़, गाय, सूअर, मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती, नीम से कीटनाशक बनाना, मोमबत्ती, अगरबत्ती बनाना, दोना पत्तल बनाना, गत्ते के डिब्बे बनाना, टोकरी बनाना, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई कार्य, मिट्टी के बर्तन, गमले, टाइल्स बनाना, जेम, जैली, चटनी, अचार, पापड़, आलू चिप्स पापड़ बनाना, बढ़ई गिरी, चर्मशिल्प, लोहारगिरी, कल्चर टोेकरी, रस्सी बनाना, बाइक, स्कूटी और टीवी के रिपेयरिंग करना, आटा, दाल, चावल, पिसाई, कुटाई और तेल धानी होगा।
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जलालाबाद और तालग्राम ब्लाॅक डार्क जोन में है। दोनों ब्लाॅक में करीब 56 गांव आते हैं। वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप ए के देशराज सिंह ने बताया कि डार्क जोन ब्लाॅक में 13 माइक्रो वाटरशेड का चयन किया गया। प्रत्येक माइक्रो वाटरशेड की कमेटी बनाई गई है। कमेटी में प्रधान को अध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही भूमि संरक्षण विभाग के प्राविधिक सहायक ग्रुप सी के कर्मचारी को सचिव बनाया गया है। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने कार्यों की स्वीकृति दे दी है। डार्कजोन गांवों में 4100 हेक्टेयर में कुल 902 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। भूमि संरक्षण अधिकारी आरके वर्मा ने बताया कि कई गांवों में कार्य किए गए हैं।
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यह माइक्रोवार वाटरशेड कमेटी के गांव
जेवां, तिलपई डिगसरा, वसीरापुर भाट, नदसिया, अनौगी, सियरमऊ, फतेहपुर जसोदा, वैसावारी, नरमऊ, गुगरापुर बांगर, सकरहनी, अमोलर और बरगांव हैं।
इनसेट
प्रारंभिक क्रिया-कलाप के यह होंगे कार्य
तालाबा, जीर्णोद्वार, कुआं मरम्मत एवं जीर्णोद्वार, हैंडपंप सार्वजनिक स्थान पर सोक पिट, रिचार्ज पिट का निर्माण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, तालाबों पर रपटा व घाट का निर्माण, पूर्व से विद्यमान जल स्रोतों का जीर्णोद्धार, पशुओं जहां पानी पीने आते हैं घाट का निर्माण, आस्थामूलक कार्य-मंदिर, अन्य स्थान पर चबूतरा का निर्माण होगा।
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यह है उत्पादन प्रणाली
- फसल विविधता को बढ़ावा देना।
- जैविक-प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन देना।
- कृषि वानिकी सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देना।
- मत्स्य पालन।
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आजीविका संवर्द्धन के लिए किए जाने वाले कार्य
मुर्गी, बकरी, भेड़, गाय, सूअर, मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती, नीम से कीटनाशक बनाना, मोमबत्ती, अगरबत्ती बनाना, दोना पत्तल बनाना, गत्ते के डिब्बे बनाना, टोकरी बनाना, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई कार्य, मिट्टी के बर्तन, गमले, टाइल्स बनाना, जेम, जैली, चटनी, अचार, पापड़, आलू चिप्स पापड़ बनाना, बढ़ई गिरी, चर्मशिल्प, लोहारगिरी, कल्चर टोेकरी, रस्सी बनाना, बाइक, स्कूटी और टीवी के रिपेयरिंग करना, आटा, दाल, चावल, पिसाई, कुटाई और तेल धानी होगा।