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भाजपा ने उतारे दिग्गज
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Sun, 22 Jan 2017 11:00 PM IST
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इत्र नगरी कन्नौज में भाजपा ने नामाकंन से एक दिन पहले अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है। जिसमें कन्नौज सदर से भाजपा ने अपने तीन बार जीत दर्ज करा चुके बनवारी लाल दोहरे को टिकट दिया है। तो वहीं तिर्वा विधानसभा से अपने रूठे प्रत्याशी कैलाश सिंह राजपूत की घर वापसी करा उन्हे उम्मीदवार बनाया है। छिबरामऊ सीट से सहकारिता मंत्री रहे रामप्रकाश त्रिपाठी की पुत्री अर्चना पांडेय को टिकट दिया है। भाजपा की टिकट फाइनल होने से उठ रही अटकलों पर विराम लग गया है।
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कन्नौज में समाजवादी पार्टी, बसपा ने अपने प्रत्याशी लगभग एक पखवारे पूर्व सूची जारी कर घोषित कर दिए थे। कांग्रेस और भाजपा की टिकट फाइनल न होने से पार्टी कार्यकर्ता व दावेदार भी परेशान थे। लेकिन दूसरी सूची में भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें सदर सीट के प्रत्याशी बनवारी लाल दोहरे, तिर्वा सीट से कैलाश राजपूत व छिबरामऊ से अर्चना पांडेय घोषित किए गए। टिकट घोषणा से कार्यकर्ताओं में खुशी है।
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राजनीति के धुरंधर है बनवारी लाल
कन्नौज। विधानसभा चुनाव की राजनीति में बनवारी लाल का कोई सानी नहीं है। उन्होंने अपने राजनैतिक कैरियर में 1991 में भाजपा की सीट से जीत दर्ज कराई थी। इस दौरान उन्हे 27.36 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। 1993 के चुनाव में भाजपा की टिकट से लड़े बनवारी लाल एक बार फिर लकी साबित हुए। यहां पर उन्होंने सपा के अनिल दोहरे को पराजित कर जीत हासिल की थी। बनवारी लाल दोहरे ने 1996 के विधानसभा चुनाव में भी सदर से टिकट मिलने पर भाजपा का विश्वास कायम रखा और यहां भी वह सीट निकालने में कामयाब रहे। इसके बाद भी उन्होंने भाजपा का दामन नहीं छोड़ा। 2002, 2007 व 2012 के चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा ने एक बार फिर बनवारी लाल दोहरे को चुनावी मैदान में उतारा है।
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कैलाश राजपूत की आस हुई पूरी
कन्नौज। तिर्वा विधानसभा की राजनीति में कैलाश राजपूत दो बार विधायक बन चुके हैं। एक बार वह भाजपा के टिकट से तो दूसरी बार बसपा के टिकट से विधायक रहे हैं। कैलाश राजपूत तिर्वा विधानसभा से 1996 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे। उन्हें जनता की उपेक्षाओं को झेलना पड़ा। जिसके चलते 2002 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे। 2007 में इसी विधानसभा से कैलाश राजपूत से बसपा के टिकट से जीत हासिल की। लेकिन 2012 के चुनाव में उन्हें सपा के विजय बहादुर पाल ने पटखनी दे दी। इस पर बसपा से उनका टिकट कटा तो वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने कैलाश राजपूत को टिकट देकर वोट बैंक हथियाने का काम किया है। फिलहाल कैलाश राजपूत भाजपा के टिकट से चुनावी मैदान में हैं।
पिता के पदचिह्न पर चलने से अर्चना को मिली सफलता
भाजपा के कद्दावर नेता रहे रामप्रकाश त्रिपाठी की पुत्री अर्चना पांडेय एक दशक से छिबरामऊ क्षेत्र में राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने 2012 में पिता की सहानुभूति बटोरने का प्रयास भी किया था। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अर्चना पांडेय ने क्षेत्र में अपनी जमीनी पकड़ बनाकर इस चुनाव में 27.35 फीसदी मत हासिल कर अपनी उपस्थिति का अहसास करा दिया था। भाजपा ने भी उनके इसी जुझारूपन और सक्रियता को देखते हुए चुनावी मैदान में उतारा है। अर्चना को टिकट मिलने से क्षेत्र के भाजपाइयोें में खुशी है।