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स्टाफ की कमी से ही जूझते रहे
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Mon, 28 Dec 2015 12:00 AM IST
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वैसे तो जिला बनने के बाद से शिक्षा के क्षेत्र में
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कन्नौज तेजी से आगे बढ़ा है, पर वर्ष 15 में शैक्षिक संस्थानों की तरक्की
की गति धीमी रही। कभी पंचायत चुनावों की व्यस्तता तो कभी दंगे को कंट्रोल
करने की मशक्कत में प्रशासनिक प्रयास भी पूरी क्षमता से नहीं हो सके।
यही वजह रही कि कभी भवन कंप्लीट न होने तो कहीं टीचिंग स्टाफ का इंतजाम न होने से स्टूडेंट्स को इनका पूरा लाभ नहीं मिल सका। उधर, सियरमऊ गांव में निर्माणाधीन नेडा का ट्रेनिंग सेंटर भी नहीं बन पाया। यहां युवाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण दिया जाना है। रहने और खाने के साथ ही प्रशिक्षण की सुविधा मुफ्त होगी।
इसमें न सिर्फ जनपद कन्नौज बल्कि आसपास के जिलों के शिक्षित बेरोजगारों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों की तरफ से प्रशिक्षण मिलना है। इन कंपनियों के विशेषज्ञ डिप्लोमा होल्डरों को प्रशिक्षण देने के बाद रोजगार का अवसर भी देंगी। इस ट्रेनिंग सेंटर के अधूरे रहने के कारण मजबूरी में एफएफडीसी का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसके अलावा जिले में केंद्रीय विद्यालय स्थापित होने का सपना भी तमाम प्रयासों के बावजूद पूरा नहीं हुआ। तत्कालीन एडीएम रमेश चंद्र के प्रयासों से कुछ महीने पूर्व जमीन की तलाश शुरू की गई पर नतीजा नहीं निकल सका। केंद्रीय विद्यालय के लिए भवन बनाने के लिए न तो मंजूरी मिली और न ही बजट मिला।
इस वजह से जिले के गरीब तबके के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर गंभीरता से प्रयास करते नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, विनोद दीक्षित अस्पताल के सामने मकरंदनगर में एससी के छात्रों के लिए बना राजकीय छात्रावास बड़ी मुश्किल से इस साल पुलिस के कब्जे से मुक्त हो गया।
इसके बावजूद यह छात्रों से गुलजार अब तक नहीं हो सका, क्योंकि मरम्मत कार्य के लिए शासन से धनराशि नहीं मिल पाई। मुख्य गेट न होने, पानी के लिए बनी टंकी टूटी होने, बिजली कनेक्शन न होने व खिड़की, दरवाजे क्षतिग्रस्त होने के कारण छात्रावास बेहाल हालत में पड़ा है, इसलिए छात्रों को यहां रहकर पढ़ने की सुविधा नहीं मिल सकी।
यही वजह रही कि कभी भवन कंप्लीट न होने तो कहीं टीचिंग स्टाफ का इंतजाम न होने से स्टूडेंट्स को इनका पूरा लाभ नहीं मिल सका। उधर, सियरमऊ गांव में निर्माणाधीन नेडा का ट्रेनिंग सेंटर भी नहीं बन पाया। यहां युवाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण दिया जाना है। रहने और खाने के साथ ही प्रशिक्षण की सुविधा मुफ्त होगी।
इसमें न सिर्फ जनपद कन्नौज बल्कि आसपास के जिलों के शिक्षित बेरोजगारों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों की तरफ से प्रशिक्षण मिलना है। इन कंपनियों के विशेषज्ञ डिप्लोमा होल्डरों को प्रशिक्षण देने के बाद रोजगार का अवसर भी देंगी। इस ट्रेनिंग सेंटर के अधूरे रहने के कारण मजबूरी में एफएफडीसी का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसके अलावा जिले में केंद्रीय विद्यालय स्थापित होने का सपना भी तमाम प्रयासों के बावजूद पूरा नहीं हुआ। तत्कालीन एडीएम रमेश चंद्र के प्रयासों से कुछ महीने पूर्व जमीन की तलाश शुरू की गई पर नतीजा नहीं निकल सका। केंद्रीय विद्यालय के लिए भवन बनाने के लिए न तो मंजूरी मिली और न ही बजट मिला।
इस वजह से जिले के गरीब तबके के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर गंभीरता से प्रयास करते नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, विनोद दीक्षित अस्पताल के सामने मकरंदनगर में एससी के छात्रों के लिए बना राजकीय छात्रावास बड़ी मुश्किल से इस साल पुलिस के कब्जे से मुक्त हो गया।
इसके बावजूद यह छात्रों से गुलजार अब तक नहीं हो सका, क्योंकि मरम्मत कार्य के लिए शासन से धनराशि नहीं मिल पाई। मुख्य गेट न होने, पानी के लिए बनी टंकी टूटी होने, बिजली कनेक्शन न होने व खिड़की, दरवाजे क्षतिग्रस्त होने के कारण छात्रावास बेहाल हालत में पड़ा है, इसलिए छात्रों को यहां रहकर पढ़ने की सुविधा नहीं मिल सकी।