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तो गंगा को नाले गंदा न कर सकेंगे
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 09 Jan 2016 12:31 AM IST
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गंगा जल को गंदा कर रहे फर्रुखाबाद और कन्नौज जिला
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मुख्यालय के 10 नालों पर नकेल कसेगी। इनमें सात नाले फर्रुखाबाद और तीन
नाले कन्नौज के हैं। इसके अलावा आने वाले समय में नमामि गंगे योजना के तहत
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जो इन नालों के पानी को शोधित
करेंगे। इसके बाद नालों में बहने वाला पानी साफ होकर ही गंगा में गिर
सकेगा। ऐसा होने पर गंगा जल कुछ हद तक साफ व शुद्ध हो जाएगा।
ज्ञात हो कि कन्नौज शहर के कई मोहल्लों से होता हुआ पाटा नाला गंगा में मिलता है। इस नाले के जरिए पूरे शहर का गंदा पानी गंगा तक पहुंचता है। इसके अलावा शहर के जेरकिला, शेखाना समेत कई मोहल्लों का गंदा पानी अड़ंगापुर व टिम्मी के घर से सदिकापुर की ओर जाने वाले नाले से होकर काली नदी से गंगा नदी तक पहुंचता है।
इसी तरह फर्रुखाबाद जिले में सात नालों के पानी को शोधित करके गंगा में छोड़ा जाएगा, क्योंकि इन नालों के जरिए गंदा पानी गंगा में जाकर पहुंचता है। इनमेें कांशीराम कालोनी, दूल्हा सार मजार के पास वाले दो बड़े व पांच छोटे नाले शामिल हैं। जल निगम निर्माण इकाई के सहायक अभियंता सुनील सिंह ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश विभाग को प्राप्त हो गए हैं।
परियोजना प्रबंधक बीएस चाहर ने नालों से प्रवाहित होने वाले गंदे पानी की मात्रा और इनकी लंबाई, चौड़ाई आदि के सर्वे कर स्टीमेट तैयार करने की जिम्मेदारी विभागीय अभियंताओं को सौंपी है। फर्रुखाबाद में उनके अलावा जेई राहुल यादव व अंकुर सक्सेना और कन्नौज में एई नीरज गुप्ता, जेई सौरभ शुक्ला व अंकुर सक्सेना को नमामि गंगे प्रोजेक्ट में लगाया गया।
नालों के अंतिम छोर पर डिमांड के अनुरूप एसटीपी बनाने के लिए स्टीमेट जल्द तैयार कर शासन को मुहैया कराए जाएंगे। विभागीय अफसरों की मानें तो बजट की कोई कमी नहीं है। स्टीमेट स्वीकृत होते ही धन आवंटन हो जाएगा, ताकि नालों को टैप करके एसटीपी के अंदर उनके पानी को ले जाने के बाद उसे शोधित करके छोड़ा जा सके।
ऐसा होने पर घरों, शहरी कारखानों से निकलने वाले केमिकलयुक्त कचरे द्वारा गंगा में घुलकर पानी के दूषित करने पर अंकुश लग जाएगा। ज्ञात हो कि कन्नौज शहर के तीनों नालों पर बनने वाले एसटीपी की क्षमता व लागत का आकलन इनमें आमतौर पर बहने वाले पानी की मात्रा, बारिश में इकट्ठा होने वाले पानी की मात्रा का ब्योरा इकट्ठा होने व स्टीमेट पूर्ण होने के बाद हो सकेगा।
फर्रुखाबाद से होते हुए गंगा नदी कन्नौज में गुरसहायगंज क्षेत्र में प्रवेश करके जलालाबाद, जसोदा, कन्नौज शहर के अलावा मानीमऊ क्षेत्र से होकर कानपुर नगर की अरौल सीमा तक निकलती है। कन्नौज शहर व मानीमऊ के बीच मियांगंज गांव के पास गंगा किनारे महादेवी गंगा घाट पर सावन के सोमवार, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा समेत पूरे साल में कई पर्वों पर मेला लगता है। यहां लोग स्नान करने के साथ ही गंगा जल भरकर घर ले जाते हैं।
ज्ञात हो कि कन्नौज शहर के कई मोहल्लों से होता हुआ पाटा नाला गंगा में मिलता है। इस नाले के जरिए पूरे शहर का गंदा पानी गंगा तक पहुंचता है। इसके अलावा शहर के जेरकिला, शेखाना समेत कई मोहल्लों का गंदा पानी अड़ंगापुर व टिम्मी के घर से सदिकापुर की ओर जाने वाले नाले से होकर काली नदी से गंगा नदी तक पहुंचता है।
इसी तरह फर्रुखाबाद जिले में सात नालों के पानी को शोधित करके गंगा में छोड़ा जाएगा, क्योंकि इन नालों के जरिए गंदा पानी गंगा में जाकर पहुंचता है। इनमेें कांशीराम कालोनी, दूल्हा सार मजार के पास वाले दो बड़े व पांच छोटे नाले शामिल हैं। जल निगम निर्माण इकाई के सहायक अभियंता सुनील सिंह ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश विभाग को प्राप्त हो गए हैं।
परियोजना प्रबंधक बीएस चाहर ने नालों से प्रवाहित होने वाले गंदे पानी की मात्रा और इनकी लंबाई, चौड़ाई आदि के सर्वे कर स्टीमेट तैयार करने की जिम्मेदारी विभागीय अभियंताओं को सौंपी है। फर्रुखाबाद में उनके अलावा जेई राहुल यादव व अंकुर सक्सेना और कन्नौज में एई नीरज गुप्ता, जेई सौरभ शुक्ला व अंकुर सक्सेना को नमामि गंगे प्रोजेक्ट में लगाया गया।
नालों के अंतिम छोर पर डिमांड के अनुरूप एसटीपी बनाने के लिए स्टीमेट जल्द तैयार कर शासन को मुहैया कराए जाएंगे। विभागीय अफसरों की मानें तो बजट की कोई कमी नहीं है। स्टीमेट स्वीकृत होते ही धन आवंटन हो जाएगा, ताकि नालों को टैप करके एसटीपी के अंदर उनके पानी को ले जाने के बाद उसे शोधित करके छोड़ा जा सके।
ऐसा होने पर घरों, शहरी कारखानों से निकलने वाले केमिकलयुक्त कचरे द्वारा गंगा में घुलकर पानी के दूषित करने पर अंकुश लग जाएगा। ज्ञात हो कि कन्नौज शहर के तीनों नालों पर बनने वाले एसटीपी की क्षमता व लागत का आकलन इनमें आमतौर पर बहने वाले पानी की मात्रा, बारिश में इकट्ठा होने वाले पानी की मात्रा का ब्योरा इकट्ठा होने व स्टीमेट पूर्ण होने के बाद हो सकेगा।
फर्रुखाबाद से होते हुए गंगा नदी कन्नौज में गुरसहायगंज क्षेत्र में प्रवेश करके जलालाबाद, जसोदा, कन्नौज शहर के अलावा मानीमऊ क्षेत्र से होकर कानपुर नगर की अरौल सीमा तक निकलती है। कन्नौज शहर व मानीमऊ के बीच मियांगंज गांव के पास गंगा किनारे महादेवी गंगा घाट पर सावन के सोमवार, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा समेत पूरे साल में कई पर्वों पर मेला लगता है। यहां लोग स्नान करने के साथ ही गंगा जल भरकर घर ले जाते हैं।