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भजनों पर नाचते-गाते निकले कांवरिये

Tue, 17 Feb 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूरो/अमर उजाला, कन्नौज Updated Tue, 17 Feb 2015 12:10 AM IST
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Sing and dance to songs out Kanvriye

पैदल चलकर सैकड़ों मील की दूरी तय करने वाली कांवर यात्रा में इस बार डीजे की धूम रही। शिव भक्त कांवर लेकर डीजे पर बजने वाले भजनों की मधुर आवाज पर थिरकते हुए चल रहे थे। महाशिवरात्रि का पर्व और कांवर यात्रा का अनूठा संगम है।

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आस्था से लबरेज शिवभक्त सजी-धजी कांवर लेकर भजन और लांगुरिया गाते हुए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर पूरी करते हैं। लंबी पद यात्रा और कांधे पर कांवर का वजन लेकिन आस्था के चलते थकान मानो किसी कांवरिये को छू तक नहीं पाती।
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वैसे तो महाशिवरात्रि के पर्व पर कांवर यात्रा की सदियों पुरानी परंपरा है लेकिन इस बार कांवर यात्रा का निराला अंदाज देखने को मिला। ज्यादातर लोग इस बार लोडर पर डीजे साउंड की व्यवस्था कर गंगा मइया के पावन धाम जिला फर्रुखाबाद के श्रंगीरामपुर घाट तक गए।
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वहां पर गंगा स्नान कर कांवर को आकर्षक ढंग से सजाया और फिर गंगाजल लेकर पैदल शुरू की अपनी यात्रा। इस यात्रा के दौरान साथ चल रहे डीजे पर बज रहे भजनों पर कांवरिये नाचते झूमते चल रहे थे। शिवभक्तों यह टोली जिस अंदाज में डीजे पर थिरकते चल रही थी उससे यह अंदाज लगा पाना काफी कठिन लग रहा था कि यह लोग मीलों लंबी दूरी पैदल तय करके आ रहे हैं।

यही नहीं अभी इन्हें कई किमी. दूर और जाना है। शिवभक्ति में लीन यह कांवरिए गाते गुनगुनाते और थिरकते हुए चले जा रहे थे। उससे यही लगता था कि आस्था के आगे थकान और दूरी कोई मायने नहीं रखती।

आस्था और विश्वास के बलबूते मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना, शिवपुरी तथा इटावा, औरैया जिलों के तीर्थस्थलों तक जाने वाले शिवभक्तों में महिलाएं, लड़कियां तथा बच्चे भी होते हैं। रास्ते भर ये लोग भगवान शंकर से जुड़े प्रसंगों के गीत भी गुनगुनाते रहते हैं।


कांवर लिए यात्रा में तल्लीन मुरैना की सावित्री कहती हैं कि जब मन में विश्वास और आस्था हो तो दूरी मायने नहीं रखती। रंगबिरंगी सजी धजी कांवर कांधे पर रखकर और पैरों में घुंघरू बांधकर जब कांवरियों का रेला नगर के बीच से गुजरता है तो उस समय घुंघरुओं की छमछम व भोला तेरी बम के उद्घोषों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो जाता है।

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