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शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर जड़ा ताला, किया अर्धनग्न प्रदर्शन
kannauj
Updated Fri, 08 Sep 2017 12:04 AM IST
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बीएसए कार्यालय में प्रदर्शन करते शिक्षामित्र।
- फोटो : अमर उजाला
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कन्नौज। कैबिनेट के फैसले के विरोध में शिक्षामित्रों ने गुरुवार को बीएसए कार्यालय में ताला जड़ दिया और चार घंटे तक अर्द्धनग्न प्रदर्शन किया। संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष समिति ने जिले के 60 फीसदी विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित होने का दावा किया। इससे पूर्व शिक्षामित्रों को कानपुर, लखनऊ जाने से रोकने के लिए रात नौ बजे से सुबह तक रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टाप पर दरोगाओं की तैनाती कर विशेष चौकसी बरती गई। इसके बावजूद करीब 300 शिक्षामित्र सुबह सात बजे ट्रेन से रवाना हो गए।
पुलिस-प्रशासन को शिक्षामित्रों के कानपुर में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देने और लखनऊ में प्रदर्शन करने की जानकारी मिली थी। इस पर पुलिस प्रशासन रात में सक्रिय हो गया। रोडवेज बस स्टैंड पर दो दरोगाओं व सिपाहियों व रेलवे स्टेशन पर पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी। जिले की सीमाओं पर पुलिस चौकस रही। शिक्षामित्रों को रोकने के लिए पुलिस पूरी रात उन पर नजर बनाए रही। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिले से किसी भी पदाधिकारी व शिक्षामित्र को नहीं जाने दिया गया। वहीं, संघर्ष समिति का दावा है कि सुबह सात बजे की ट्रेन से करीब 300 शिक्षामित्र रवाना हो गए। उधर, सुबह 11 बजे बीएसए कार्यालय पर पहुंचकर शिक्षामित्रों ने वहां बाबुओं और बेसिक शिक्षा अधिकारी के कमरों में ताले ज़ड़ दिए। हालांकि बाद में बाबुओं के अनुरोध पर उनके कार्यालय खोल दिए गए।
बीएसए का कार्यालय शाम करीब तीन बजे के बाद खुल सका। इस दौरान संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्र फिलहाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। धैर्य की सीमा खत्म होने पर आंदोलन उग्र रूप ले लेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। धरने के बाद शिक्षामित्रों ने तहसीलदार ऋषिकांत राजवंशी को सीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
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इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने समस्याओं के निराकरण के लिए पांच सचिवों की कमेटी बनाई। लीगल ओपेनियन लाने प्रदेश अध्यक्ष को सर्वोच्च न्यायालय भेज दिया गया। साल में 11 माह तक 10 हजार रुपये मानदेय देने की घोषणा कर शिक्षामित्रों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया गया है। इस मौके पर सौरभ यादव, मुकेश सिंह, पवन सविता, परवेज, हंसराम, अनूप कटियार, अनीता तिवारी, रजनी सिंह, पूनम शर्मा, अंजू सैनी, दीपेंद्र यादव, रामवरन, महेंद्र यादव, प्रभाकर सिंह, जयपाल आदि मौजूद रहे।
कार्यालय में नहीं बैठ सके बीएसए
कन्नौज। बीएसए कार्यालय पर शिक्षामित्रो के अर्द्धनग्न प्रदर्शन के दौरान सीओ लक्ष्मीकांत गौतम, तहसीलदार ऋषिकांत राजवंशी सहित पुलिस के जवान सुरक्षा की दृष्टि से बीएसए कार्यालय से लेकर बाहर तक जायजा लेते रहे। प्रशासन ने किसी तरह की चूक न बरतते हुए बीएसए कार्यालय के बाहर फायर बिग्रेड की गाड़ी भी खड़ी करा दी। हालांकि प्रदर्शन और तालाबंदी के कारण बीएसए अपने कार्यालय के बाहर ही खड़े रहे। प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद ही वह कार्यालय में बैठ सके।
फैसले के बाद से बंद चल रहा विद्यालय
इंदरगढ़। हसेरन विकास खंड क्षेत्र के गांव कठेला में संचालित प्राथमिक विद्यालय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ताला बंद है। विद्यालय में नियुक्त इंचार्ज प्रधानाध्यापक मृदुल दीक्षित पिछले तीन वर्ष से अवकाश पर चल रहे है। स्कूल संचालन की जिम्मेदारी कुलदीप भदौरिया के पास थी, लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद से उन्होंने भी विद्यालय आना छोड़ दिया है। विद्यालय के बंद हो जाने से अराजक तत्वों ने इसे काफी नुकसान भी पहुंचाया है। गांव के अनिल कुमार, सतीश चंद्र, टिल्लू का कहना है कि वह स्कूल पढ़ने के लिए छात्रो को भेजते हैं, लेकिन किसी अध्यापक के न आने से छात्र बैरंग वापस लौट आते है। इस मसले पर खंड शिक्षाधिकारी रामऔतार वर्मा का कहना है कि स्कूल बंद नहीं होने दिया जाएगा। उनको जानकारी नहीं थी कि विद्यालय में कोई नहीं पहुंच रहा है। आधे घंटे में शिक्षक को भेजा जा रहा है। ग्यारह बजे मोबाइल पर वार्ता के बाद बारह बजे तक कोई शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंचा था।
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पुलिस-प्रशासन को शिक्षामित्रों के कानपुर में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देने और लखनऊ में प्रदर्शन करने की जानकारी मिली थी। इस पर पुलिस प्रशासन रात में सक्रिय हो गया। रोडवेज बस स्टैंड पर दो दरोगाओं व सिपाहियों व रेलवे स्टेशन पर पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी। जिले की सीमाओं पर पुलिस चौकस रही। शिक्षामित्रों को रोकने के लिए पुलिस पूरी रात उन पर नजर बनाए रही। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जिले से किसी भी पदाधिकारी व शिक्षामित्र को नहीं जाने दिया गया। वहीं, संघर्ष समिति का दावा है कि सुबह सात बजे की ट्रेन से करीब 300 शिक्षामित्र रवाना हो गए। उधर, सुबह 11 बजे बीएसए कार्यालय पर पहुंचकर शिक्षामित्रों ने वहां बाबुओं और बेसिक शिक्षा अधिकारी के कमरों में ताले ज़ड़ दिए। हालांकि बाद में बाबुओं के अनुरोध पर उनके कार्यालय खोल दिए गए।
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बीएसए का कार्यालय शाम करीब तीन बजे के बाद खुल सका। इस दौरान संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्र फिलहाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। धैर्य की सीमा खत्म होने पर आंदोलन उग्र रूप ले लेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। धरने के बाद शिक्षामित्रों ने तहसीलदार ऋषिकांत राजवंशी को सीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
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इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने समस्याओं के निराकरण के लिए पांच सचिवों की कमेटी बनाई। लीगल ओपेनियन लाने प्रदेश अध्यक्ष को सर्वोच्च न्यायालय भेज दिया गया। साल में 11 माह तक 10 हजार रुपये मानदेय देने की घोषणा कर शिक्षामित्रों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया गया है। इस मौके पर सौरभ यादव, मुकेश सिंह, पवन सविता, परवेज, हंसराम, अनूप कटियार, अनीता तिवारी, रजनी सिंह, पूनम शर्मा, अंजू सैनी, दीपेंद्र यादव, रामवरन, महेंद्र यादव, प्रभाकर सिंह, जयपाल आदि मौजूद रहे।
कार्यालय में नहीं बैठ सके बीएसए
कन्नौज। बीएसए कार्यालय पर शिक्षामित्रो के अर्द्धनग्न प्रदर्शन के दौरान सीओ लक्ष्मीकांत गौतम, तहसीलदार ऋषिकांत राजवंशी सहित पुलिस के जवान सुरक्षा की दृष्टि से बीएसए कार्यालय से लेकर बाहर तक जायजा लेते रहे। प्रशासन ने किसी तरह की चूक न बरतते हुए बीएसए कार्यालय के बाहर फायर बिग्रेड की गाड़ी भी खड़ी करा दी। हालांकि प्रदर्शन और तालाबंदी के कारण बीएसए अपने कार्यालय के बाहर ही खड़े रहे। प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद ही वह कार्यालय में बैठ सके।
फैसले के बाद से बंद चल रहा विद्यालय
इंदरगढ़। हसेरन विकास खंड क्षेत्र के गांव कठेला में संचालित प्राथमिक विद्यालय में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ताला बंद है। विद्यालय में नियुक्त इंचार्ज प्रधानाध्यापक मृदुल दीक्षित पिछले तीन वर्ष से अवकाश पर चल रहे है। स्कूल संचालन की जिम्मेदारी कुलदीप भदौरिया के पास थी, लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद से उन्होंने भी विद्यालय आना छोड़ दिया है। विद्यालय के बंद हो जाने से अराजक तत्वों ने इसे काफी नुकसान भी पहुंचाया है। गांव के अनिल कुमार, सतीश चंद्र, टिल्लू का कहना है कि वह स्कूल पढ़ने के लिए छात्रो को भेजते हैं, लेकिन किसी अध्यापक के न आने से छात्र बैरंग वापस लौट आते है। इस मसले पर खंड शिक्षाधिकारी रामऔतार वर्मा का कहना है कि स्कूल बंद नहीं होने दिया जाएगा। उनको जानकारी नहीं थी कि विद्यालय में कोई नहीं पहुंच रहा है। आधे घंटे में शिक्षक को भेजा जा रहा है। ग्यारह बजे मोबाइल पर वार्ता के बाद बारह बजे तक कोई शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंचा था।