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कलेक्ट्रेट में घंटों गरजे शिक्षामित्र
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
Updated Tue, 15 Sep 2015 11:54 PM IST
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हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ जिले भर के शिक्षामित्रों में मंगलवार को कलेक्ट्रेट में धरना दिया। आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन और उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से हक व हितों की आवाज बुलंद की। बाद में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर समायोजन बहाल कराने की मांग की।
संघ के जिलाध्यक्ष सौरभ यादव, जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, महामंत्री अखिलेश पाठक, अजीत दीक्षित ने कहा कि बीते 15 सालों से शिक्षामित्र स्कूलों में कार्यरत हैं। सभी शिक्षामित्रों को दो वर्षीय दूरस्थ शिक्षा से बीटीसी प्रशिक्षण पूर्ण कराकर प्रदेश सरकार ने सहायक अध्यापक पद पर 2014-15 में समायोजित किया था।
अब हाईकोर्ट के समायोजन रद्द करने संबंधी आदेश से प्रदेश भर के शिक्षामित्र आहत है। वह आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। उच्च न्यायालय के फैसले से एक लाख 72 हजार शिक्षामित्र व उनके परिवार आर्थिक संकट के मुहाने पर आ गए हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षामित्रों ने प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के साथ-साथ सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान किया है। अब 35 से 45 वर्ष की आयु में वह कहां जाएं।
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यूसुफ वारसी, ह्रदयेश दुबे, अनूप कटियार, अनीता तिवारी, विनय मिश्रा, इरफान अली, दीपेंद्र यादव, संगीता मिश्रा, शीतला देवी आदि शिक्षा मित्रों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे एनसीटीई एवं एमएचआरडी से बेसिक शिक्षा नियमावली संशोधन की अनुमति लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करें। शिक्षामित्रों ने कहा कि अब वे एकजुट हैं। न्याय न मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शन के दौरान कौशलेंद्र मिश्रा, कमलेश दुबे, आनंद चौहान, सुशील द्विवेदी, मुकेश राजपूत, रामबरन, महेंद्र यादव, राजवीर यादव आदि शिक्षा मित्रों के अलावा रामऔतार यादव, सुरेश चंद्र शास्त्री आदि मौजूद रहे।
चंदे की रकम बनी चर्चा का विषय
कन्नौज। हाईकोर्ट में चल रहे केस की पैरवी के लिए वसूला गया चंदा अब चर्चा का विषय बन गया है। चंदे की रकम कहां गई। इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। वहीं संगठन के नेताओं के रवैये को लेकर भी बहस छिड़ी रही। शिक्षामित्रों ने प्रांतीय पदाधिकारियों को कोसते हुए कहा कि चंदा के नाम पर जमा किए गए रुपयों का बंदरबांट हुआ। दमदार वकील नहीं खड़े किए गए।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संगठन मंत्री विनय पांडेय ने आरोप लगाया कि शिक्षामित्र संघ के नेताओं ने चंदा के धन का बंदरबांट किया है। अपने फायदे की राजनीति करने वालों से शिक्षामित्रों को सावधान हो जाना चाहिए। उधर शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि कुछ लोग अनर्गल आरोप लगाकर शिक्षामित्रों को गुमराह करके भड़का रहे हैं। ऐसे लोग शिक्षामित्रों के हितैषी नहीं हैं। संगठन के पास चंदे में लिए गए एक-एक रुपये का हिसाब है। एकाउंट के जरिए प्रांतीय पदाधिकारियों को धनराशि भेजी गई। कोर्ट में दर्जनभर से ज्यादा नामी अधिवक्ताओं को खड़ा कराकर पैरवी कराई गई है।
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संघ के जिलाध्यक्ष सौरभ यादव, जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, महामंत्री अखिलेश पाठक, अजीत दीक्षित ने कहा कि बीते 15 सालों से शिक्षामित्र स्कूलों में कार्यरत हैं। सभी शिक्षामित्रों को दो वर्षीय दूरस्थ शिक्षा से बीटीसी प्रशिक्षण पूर्ण कराकर प्रदेश सरकार ने सहायक अध्यापक पद पर 2014-15 में समायोजित किया था।
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अब हाईकोर्ट के समायोजन रद्द करने संबंधी आदेश से प्रदेश भर के शिक्षामित्र आहत है। वह आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। उच्च न्यायालय के फैसले से एक लाख 72 हजार शिक्षामित्र व उनके परिवार आर्थिक संकट के मुहाने पर आ गए हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षामित्रों ने प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के साथ-साथ सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान किया है। अब 35 से 45 वर्ष की आयु में वह कहां जाएं।
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यूसुफ वारसी, ह्रदयेश दुबे, अनूप कटियार, अनीता तिवारी, विनय मिश्रा, इरफान अली, दीपेंद्र यादव, संगीता मिश्रा, शीतला देवी आदि शिक्षा मित्रों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे एनसीटीई एवं एमएचआरडी से बेसिक शिक्षा नियमावली संशोधन की अनुमति लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करें। शिक्षामित्रों ने कहा कि अब वे एकजुट हैं। न्याय न मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शन के दौरान कौशलेंद्र मिश्रा, कमलेश दुबे, आनंद चौहान, सुशील द्विवेदी, मुकेश राजपूत, रामबरन, महेंद्र यादव, राजवीर यादव आदि शिक्षा मित्रों के अलावा रामऔतार यादव, सुरेश चंद्र शास्त्री आदि मौजूद रहे।
चंदे की रकम बनी चर्चा का विषय
कन्नौज। हाईकोर्ट में चल रहे केस की पैरवी के लिए वसूला गया चंदा अब चर्चा का विषय बन गया है। चंदे की रकम कहां गई। इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। वहीं संगठन के नेताओं के रवैये को लेकर भी बहस छिड़ी रही। शिक्षामित्रों ने प्रांतीय पदाधिकारियों को कोसते हुए कहा कि चंदा के नाम पर जमा किए गए रुपयों का बंदरबांट हुआ। दमदार वकील नहीं खड़े किए गए।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संगठन मंत्री विनय पांडेय ने आरोप लगाया कि शिक्षामित्र संघ के नेताओं ने चंदा के धन का बंदरबांट किया है। अपने फायदे की राजनीति करने वालों से शिक्षामित्रों को सावधान हो जाना चाहिए। उधर शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि कुछ लोग अनर्गल आरोप लगाकर शिक्षामित्रों को गुमराह करके भड़का रहे हैं। ऐसे लोग शिक्षामित्रों के हितैषी नहीं हैं। संगठन के पास चंदे में लिए गए एक-एक रुपये का हिसाब है। एकाउंट के जरिए प्रांतीय पदाधिकारियों को धनराशि भेजी गई। कोर्ट में दर्जनभर से ज्यादा नामी अधिवक्ताओं को खड़ा कराकर पैरवी कराई गई है।