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कानपुर में नौकरी करना चाहती हैं शहीद की पत्नी
Sat, 23 Feb 2019 12:08 AM IST
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kannauj
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Published by: gaurav gaurav
Updated Sat, 23 Feb 2019 12:08 AM IST
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शहीद प्रदीप सिंह (फाइल फोटो)।
- फोटो : amarujala
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पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद सुखसेनपुर के अजान गांव निवासी प्रदीप कुमार यादव की पत्नी नीरज ने कानपुर में सिविल सेवा में नौकरी करने की इच्छा जताई है। अभी तक किसी विभाग में नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया है। पुलिस विभाग की ओर से शहीद की पत्नी नीरज का ब्योरा जुटाया गया है। नीरज की ओर से अभी तक शपथ पत्र न मिल पाने से डिटेल प्रदेश के गृह विभाग के पास नहीं भेजी जा सकी है। हालांकि प्रदेश सरकार ने यह जानकारी देने के लिए एक माह का समय निर्धारित किया है।
अमर उजाला से बातचीत में शहीद की पत्नी नीरज ने बताया कि अभी तक उन्होंने किसी भी विभाग में नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया है। उनसे किसी ने कोई फार्म नहीं भरवाया है। न ही दस्तखत कराए हैं। वह शादी के बाद से कानपुर के बारासिरोही में रह रही हैं। बड़ी बेटी सुप्रिया कल्याणपुर के डा. वीरेंद्र स्वरूप एजूकेशन सेंटर में कक्षा पांच की छात्र है। दूसरे बेटी डेढ़ साल की सोना है। वह चार माह की गर्भवती हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन्हें कानपुर में ही सिविल सेवा से जुड़ी नौकरी दी जाए। इससे कि वह नौकरी के साथ ही बच्चों का ध्यान ख सकें। वह स्नातक हैं इसलिए शैक्षिक योग्यता के हिसाब से ही नौकरी दी जाए। उधर, एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय को एक माह के भीतर नौकरी के लिए जरूरी दस्तावेज भेजने हैं। थाना पुलिस की मदद से नौकरी के आवेदन के लिए काम चल रहा है। परिजनों की मदद से वीर नारी नीरज के बारे में कुछ जानकारी जुटाई गई हैं। उनसे एक शपथपत्र लिया जाना बाकी है। नीरज की ओर से अभी तक कोई आवेदन नहीं किया गया है। गृह विभाग दस्तावेज मिलने के बाद उनकी इच्छा और सुविधा के हिसाब से विभाग और स्थान का चयन करेगा।
लोन लेकर बनवाया था मकान
शहीद प्रदीप कुमार यादव ने 2014 में कानपुर माल रोड स्थित एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से छह लाख रुपये का लोन लेकर मकान बनाया था। अभी करीब चार लाख रुपये अदा करने हैं। शहीद की पत्नी नीरज ने मांग की है कि जिस तरह से एसबीआई ने शहीदों का लोन माफ किया, उसी तरह से पीएनबी भी ऐसा करे। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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अभी और संघर्ष है बाकी
शहीद की पत्नी नीरज के सामने आने वाले दिनों में चुनौतियां कम नहीं हैं। नौकरी के साथ ही बेटियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। वह चार माह की गर्भवती भी हैं। इसका भी ध्यान रखना है।
जनप्रतिनिधियों और नेताओं के बर्ताव से नाखुश
नीरज ने बताया कि पति की शहादत के बाद 14 फरवरी को वह अजान गांव पहुंच गई थीं। तब उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह किसी से बात कर पातीं। 16 फरवरी को वह कानपुर स्थित घर आ गई थीं। कानपुर आने के बाद कन्नौज के नेता या जनप्रतिनिधि अजान गांव तो गए लेकिन उनसे किसी ने भी बात करने की जरूरत नहीं समझी।
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अमर उजाला से बातचीत में शहीद की पत्नी नीरज ने बताया कि अभी तक उन्होंने किसी भी विभाग में नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया है। उनसे किसी ने कोई फार्म नहीं भरवाया है। न ही दस्तखत कराए हैं। वह शादी के बाद से कानपुर के बारासिरोही में रह रही हैं। बड़ी बेटी सुप्रिया कल्याणपुर के डा. वीरेंद्र स्वरूप एजूकेशन सेंटर में कक्षा पांच की छात्र है। दूसरे बेटी डेढ़ साल की सोना है। वह चार माह की गर्भवती हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन्हें कानपुर में ही सिविल सेवा से जुड़ी नौकरी दी जाए। इससे कि वह नौकरी के साथ ही बच्चों का ध्यान ख सकें। वह स्नातक हैं इसलिए शैक्षिक योग्यता के हिसाब से ही नौकरी दी जाए। उधर, एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय को एक माह के भीतर नौकरी के लिए जरूरी दस्तावेज भेजने हैं। थाना पुलिस की मदद से नौकरी के आवेदन के लिए काम चल रहा है। परिजनों की मदद से वीर नारी नीरज के बारे में कुछ जानकारी जुटाई गई हैं। उनसे एक शपथपत्र लिया जाना बाकी है। नीरज की ओर से अभी तक कोई आवेदन नहीं किया गया है। गृह विभाग दस्तावेज मिलने के बाद उनकी इच्छा और सुविधा के हिसाब से विभाग और स्थान का चयन करेगा।
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लोन लेकर बनवाया था मकान
शहीद प्रदीप कुमार यादव ने 2014 में कानपुर माल रोड स्थित एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से छह लाख रुपये का लोन लेकर मकान बनाया था। अभी करीब चार लाख रुपये अदा करने हैं। शहीद की पत्नी नीरज ने मांग की है कि जिस तरह से एसबीआई ने शहीदों का लोन माफ किया, उसी तरह से पीएनबी भी ऐसा करे। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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अभी और संघर्ष है बाकी
शहीद की पत्नी नीरज के सामने आने वाले दिनों में चुनौतियां कम नहीं हैं। नौकरी के साथ ही बेटियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। वह चार माह की गर्भवती भी हैं। इसका भी ध्यान रखना है।
जनप्रतिनिधियों और नेताओं के बर्ताव से नाखुश
नीरज ने बताया कि पति की शहादत के बाद 14 फरवरी को वह अजान गांव पहुंच गई थीं। तब उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह किसी से बात कर पातीं। 16 फरवरी को वह कानपुर स्थित घर आ गई थीं। कानपुर आने के बाद कन्नौज के नेता या जनप्रतिनिधि अजान गांव तो गए लेकिन उनसे किसी ने भी बात करने की जरूरत नहीं समझी।
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