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शार्ट सर्किट से लगी आग, पांच लाख का नुकसान
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पटकुलिया गांव में आग बुझाते दमकल कर्मी।
- फोटो : CHIBRAMAU
छिबरामऊ(कन्नौज)। शार्ट सर्किट से लगी आग में पटकुलिया गांव में बंजारा समुदाय के चार घरों का सामान राख हो गया। नगदी, घरेलू समान, अनाज, जेवर सहित लगभग पांच लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। वहीं एसडीएम गौरव शुक्ला ने बताया कि अग्निकांड की जांच करवाई गई है। खाना बनाते समय चूल्हे से निकली चिंगारी से हादसा हुआ है। अग्नि पीड़ितों को राशन किट भिजवा दी गई हैं।
शनिवार को लगभग 11 बजे पटकुलिया गांव के ओमप्रकाश पुत्र बलवंत के घर में रखे छप्पर में शार्ट सर्किट से आग लग गई। लपटों ने पड़ोस के बालेश्वर पुत्र अमीर सिंह, छविराम पुत्र बालेश्वर और कैलाश पुत्र इंद्र सिंह के घरों को चपेट में ले लिया। गांव के लोगों ने सबमर्सिबल चलवाकर आग बुझाने के प्रयास शुरू कर दिए। प्रधान राजेश कुमार नायक और बिल्लू भारतीय ने आग लगने की सूचना पुलिस, दमकल विभाग को दी। कुछ ही देर में पुलिस और दमकल की गाड़ियां पहुंच गईं। एक घंटे मशक्कत के बाद आग बुझाई जा सकी।
पहने हुए कपड़े बचे, बाकी सब जल गया
अग्नि पीड़ित छविराम और पत्नी वर्षा की खुशियां स्वाहा हो गईं। तीन वर्ष पहले दोनों का विवाह हुआ था। दहेज में मिले सामान के अलावा गृहस्थी का सामान भी स्वाहा हो गया। पहने हुए कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा। छविराम के भाई उदयवीर का रिश्ता तय हो चुका है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद बरात जानी थी। जेवर और कपड़ों की खरीदारी हो चुकी थी। आग में यह सब भी नहीं बचा।
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दाने-दाने को मोहताज हुए अग्नि पीड़ित
चारों अग्नि पीड़ित मजदूरी और खेती से परिवार का भरण पोषण करते थे। खेतों से कटान के बाद गेहूं और भूसा घरों में पहुंच चुका था। यह भी स्वाहा हो गया। अब परिवार दाने-दाने को मोहताज है।
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शनिवार को लगभग 11 बजे पटकुलिया गांव के ओमप्रकाश पुत्र बलवंत के घर में रखे छप्पर में शार्ट सर्किट से आग लग गई। लपटों ने पड़ोस के बालेश्वर पुत्र अमीर सिंह, छविराम पुत्र बालेश्वर और कैलाश पुत्र इंद्र सिंह के घरों को चपेट में ले लिया। गांव के लोगों ने सबमर्सिबल चलवाकर आग बुझाने के प्रयास शुरू कर दिए। प्रधान राजेश कुमार नायक और बिल्लू भारतीय ने आग लगने की सूचना पुलिस, दमकल विभाग को दी। कुछ ही देर में पुलिस और दमकल की गाड़ियां पहुंच गईं। एक घंटे मशक्कत के बाद आग बुझाई जा सकी।
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पहने हुए कपड़े बचे, बाकी सब जल गया
अग्नि पीड़ित छविराम और पत्नी वर्षा की खुशियां स्वाहा हो गईं। तीन वर्ष पहले दोनों का विवाह हुआ था। दहेज में मिले सामान के अलावा गृहस्थी का सामान भी स्वाहा हो गया। पहने हुए कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा। छविराम के भाई उदयवीर का रिश्ता तय हो चुका है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद बरात जानी थी। जेवर और कपड़ों की खरीदारी हो चुकी थी। आग में यह सब भी नहीं बचा।
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दाने-दाने को मोहताज हुए अग्नि पीड़ित
चारों अग्नि पीड़ित मजदूरी और खेती से परिवार का भरण पोषण करते थे। खेतों से कटान के बाद गेहूं और भूसा घरों में पहुंच चुका था। यह भी स्वाहा हो गया। अब परिवार दाने-दाने को मोहताज है।