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Kannauj News: सर्वर ठप, 286 मासूम बैरंग लौटे, नहीं बने दिव्यांग प्रमाण पत्र
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कन्नौज। जिले में अलग-अलग तिथियों में आयोजित दिव्यांग प्रमाण पत्र शिविर दिव्यांग बच्चों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। आठों ब्लाॅक में शिविर लगाकर दिव्यांग बच्चों के प्रमाण पत्र बनाए जाने थे पर शुक्रवार को सर्वर ठप होने और तकनीकी समस्याओं की वजह से शिविर में पहुंचे दिव्यांग बच्चे और उनके परिजन दर-दर भटकने को मजबूर हुए। अव्यवस्था का आलम यह रहा कि शिविर में पहुंचे 384 मासूमों में से 286 बच्चों को बिना प्रमाण पत्र बनवाए ही मायूक होकर लौटना पड़ा।
समेकित शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस शिविर में विभागीय दावों की जमीनी हकीकत उस वक्त उजागर हो गई जब काम शुरू होते ही सर्वर पूरी तरह ठप हो गया। दूरदराज के गांवों से भारी मशक्कत करके दिव्यांग बच्चों को गोद में उठाकर या घसीटकर शिविर तक लाए परिजनों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ा। सर्वर न चलने और तकनीकी खामियों के कारण काम ठप रहा, जिससे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चे बिलखते रहे।
विभागीय तैयारियों की पोल तब खुली जब सर्वर डाउन हो गया। इसके अलावा कई बच्चों के आधार कार्ड में नाम की गड़बड़ी और मोबाइल नंबर लिंक न होने के कारण पंजीकरण नहीं हो पाया। मात्र 98 बच्चों के ही दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जा सके, जबकि 286 से अधिक बच्चों को बिना प्रमाण पत्र बनवाए ही निराश होकर बैरंग वापस लौटना पड़ा। उधर, कुछ दिन पहले सदर बीआरसी में एलिम्को कानपुर की विशेषज्ञ तकनीकी टीम द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत 79 और पीएमश्री योजना के तहत पंजीकृत छह बच्चों का उपकरण वितरण के लिए मापन एवं चिह्नांकन किया गया था। समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक सुबोध कुमार अवस्थी ने बताया कि सर्वर और तकनीकी कमियों के कारण कई बच्चों के प्रमाण पत्र नहीं बन पाए हैं। सभी बच्चों के प्रमाण पत्र बनवाएं जाएंगे।
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आधार की खामियां और तकनीकी अड़चनें बनीं मुसीबत
सर्वर की कछुआ चाल के साथ-साथ प्रशासनिक उदासीनता ने आग में घी का काम किया। कई मासूम बच्चों के आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग गलत थी, तो कइयों के आधार से मोबाइल नंबर लिंक ही नहीं था। मौके पर इन समस्याओं को सुलझाने या सुधार करने का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया था। इस कारण महज 98 बच्चों का ही पंजीकरण संभव हो सका, जबकि 286 से अधिक बच्चे बिना काम कराए दर-दर भटकने को मजबूर हुए।
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समेकित शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस शिविर में विभागीय दावों की जमीनी हकीकत उस वक्त उजागर हो गई जब काम शुरू होते ही सर्वर पूरी तरह ठप हो गया। दूरदराज के गांवों से भारी मशक्कत करके दिव्यांग बच्चों को गोद में उठाकर या घसीटकर शिविर तक लाए परिजनों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ा। सर्वर न चलने और तकनीकी खामियों के कारण काम ठप रहा, जिससे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चे बिलखते रहे।
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विभागीय तैयारियों की पोल तब खुली जब सर्वर डाउन हो गया। इसके अलावा कई बच्चों के आधार कार्ड में नाम की गड़बड़ी और मोबाइल नंबर लिंक न होने के कारण पंजीकरण नहीं हो पाया। मात्र 98 बच्चों के ही दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जा सके, जबकि 286 से अधिक बच्चों को बिना प्रमाण पत्र बनवाए ही निराश होकर बैरंग वापस लौटना पड़ा। उधर, कुछ दिन पहले सदर बीआरसी में एलिम्को कानपुर की विशेषज्ञ तकनीकी टीम द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत 79 और पीएमश्री योजना के तहत पंजीकृत छह बच्चों का उपकरण वितरण के लिए मापन एवं चिह्नांकन किया गया था। समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक सुबोध कुमार अवस्थी ने बताया कि सर्वर और तकनीकी कमियों के कारण कई बच्चों के प्रमाण पत्र नहीं बन पाए हैं। सभी बच्चों के प्रमाण पत्र बनवाएं जाएंगे।
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आधार की खामियां और तकनीकी अड़चनें बनीं मुसीबत
सर्वर की कछुआ चाल के साथ-साथ प्रशासनिक उदासीनता ने आग में घी का काम किया। कई मासूम बच्चों के आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग गलत थी, तो कइयों के आधार से मोबाइल नंबर लिंक ही नहीं था। मौके पर इन समस्याओं को सुलझाने या सुधार करने का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया था। इस कारण महज 98 बच्चों का ही पंजीकरण संभव हो सका, जबकि 286 से अधिक बच्चे बिना काम कराए दर-दर भटकने को मजबूर हुए।