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छात्रों का हितकारी होगा शनि सिद्ध योग
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
Updated Wed, 21 Jan 2015 12:01 AM IST
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इस बार बसंत पंचमी का पर्व 24 जनवरी को है और इसी दिन से ही ऋतुराज बसंत का आगमन शुरू हो रहा है। शनिवार होने के साथ पूर्वा भाद्र नक्षत्र एवं परिधि योग से शनि सिद्ध योग बन रहा है। यह अद्भुत संयोग छात्रों व सृजनात्मक कार्य से जुड़े लोगों के लिए विशेष लाभकारी होगा। इस दिन मां सरस्वती की आराधना लाभदायक होती है। सभी शुभ कार्य करने का सिद्ध मुहूर्त है।
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यूं करें पूजा-अर्चना
मोहल्ला दीदारगंज निवासी ज्योतिषाचार्य पं. रामप्रताप मिश्र के मुताबिक इस दिन विद्यार्थियों कच्चे दूध में काला तिल, हल्दी या केसर मिलाकर तुलसी को अर्पित करना चाहिए। मां सरस्वती का 16 प्रकार से पूजन करने के बाद ऊं सरस्वयै नम: मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। कन्याएं पान के पत्ते पर केसर, शहद और सिंदूर रखकर मां गौरी को अर्पित करें। मन वांछित फल की प्राप्ति होती है।
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आध्यात्मिक महत्व
मोहल्ला फर्श निवासी आचार्य प. करूणाशंकर पांडेय का कहना है कि बसंती रंग भारतीय संस्कृति में अत्याधिक समाहित है। यज्ञोपवीत के दौरान बालक केसर या हल्दी से रंगा हुआ होता है। विवाह के समय वर-वधू को हल्दी के रंगे वस्त्र ही पहनकर फेरों का कार्य होता है।
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साहित्यिक महत्व
गांव मानीमऊ निवासी आचार्य पं. कौशल किशोर त्रिपाठी ने बताया कि बसंत ऋतु में बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का पादुर्भाव हुआ है। इसलिए सभी स्कूलों में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्र का प्रारम्भ गुप्त साधना के लिए किया जाता है।
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पीले रंग का महत्व
मोहल्ला चौहट्टा निवासी ज्योतिषाचार्य व साहित्यकार उमाशंकर वर्मा ‘साहिल’ ने बताया कि जिस प्रकार देव गुरू बृहस्पति को सभी नवग्रहों और देवताओं का गुरू माना जाता है। ठीक उसी प्रकार से पीला रंग सभी रंगों में सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वाधिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
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प्राकृतिक महत्व
मोहल्ला गढ़ैया निवासी आचार्य प्रकाशचंद्र मिश्रा का कहना है कि प्रकृति प्रेमी बसंत ऋतु में आनंदित होते हैं क्योंकि वृक्षों में नई कोपलें आती हैं। फलों के राजा आम में भी बौर का आगमन होता है। इसकी सुगंध नई ऊर्जा देती है। ठिठुरन भरी सर्दी से भी इसी ऋतु में राहत मिलती है। बसंत गीत के उस संदेश को प्रमाणित करती है कि जर्जरता के बाद नवीनता आती है।
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यूं करें पूजा-अर्चना
मोहल्ला दीदारगंज निवासी ज्योतिषाचार्य पं. रामप्रताप मिश्र के मुताबिक इस दिन विद्यार्थियों कच्चे दूध में काला तिल, हल्दी या केसर मिलाकर तुलसी को अर्पित करना चाहिए। मां सरस्वती का 16 प्रकार से पूजन करने के बाद ऊं सरस्वयै नम: मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। कन्याएं पान के पत्ते पर केसर, शहद और सिंदूर रखकर मां गौरी को अर्पित करें। मन वांछित फल की प्राप्ति होती है।
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आध्यात्मिक महत्व
मोहल्ला फर्श निवासी आचार्य प. करूणाशंकर पांडेय का कहना है कि बसंती रंग भारतीय संस्कृति में अत्याधिक समाहित है। यज्ञोपवीत के दौरान बालक केसर या हल्दी से रंगा हुआ होता है। विवाह के समय वर-वधू को हल्दी के रंगे वस्त्र ही पहनकर फेरों का कार्य होता है।
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साहित्यिक महत्व
गांव मानीमऊ निवासी आचार्य पं. कौशल किशोर त्रिपाठी ने बताया कि बसंत ऋतु में बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का पादुर्भाव हुआ है। इसलिए सभी स्कूलों में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्र का प्रारम्भ गुप्त साधना के लिए किया जाता है।
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पीले रंग का महत्व
मोहल्ला चौहट्टा निवासी ज्योतिषाचार्य व साहित्यकार उमाशंकर वर्मा ‘साहिल’ ने बताया कि जिस प्रकार देव गुरू बृहस्पति को सभी नवग्रहों और देवताओं का गुरू माना जाता है। ठीक उसी प्रकार से पीला रंग सभी रंगों में सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वाधिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
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प्राकृतिक महत्व
मोहल्ला गढ़ैया निवासी आचार्य प्रकाशचंद्र मिश्रा का कहना है कि प्रकृति प्रेमी बसंत ऋतु में आनंदित होते हैं क्योंकि वृक्षों में नई कोपलें आती हैं। फलों के राजा आम में भी बौर का आगमन होता है। इसकी सुगंध नई ऊर्जा देती है। ठिठुरन भरी सर्दी से भी इसी ऋतु में राहत मिलती है। बसंत गीत के उस संदेश को प्रमाणित करती है कि जर्जरता के बाद नवीनता आती है।