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जल्द हैंडओवर होगा सदर तहसील भवन
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Sun, 29 Mar 2015 11:22 PM IST
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सदर तहसील के भवन को अंतिम रूप देने में कार्यदायी संस्था जुट गयी है। रंगाई-पुताई के साथ ही अधूरे पड़े कामों को पूरा करने में मजदूर जुट गए हैं। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन की सख्ती का असर काम में दिखने लगा है। ठेकेदार मजदूरों की संख्या बढ़ाकर दिन रात काम करवा रहे हैं। इसके चलते जल्द ही निर्माणाधीन भवन के हैंडओवर होने की उम्मीद जगी है।
सदर तहसील भवन का निर्माण सितंबर 2009 में शुरू हुआ था। मूल स्वीकृत लागत 247.89 लाख रुपये से दो साल में काम पूरा होना था। कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम कानपुर द्वारा इसे बनवाया जा रहा था। लेकिन अफसरों की उदासीनता से तहसील भवन के निर्माण कछुआ गति से चला। परिणामस्वरूप 70 फीसदी काम कराने के बाद कार्यदायी संस्था ने हाथ खड़े कर दिए।
इस पर अमर उजाला ने विगत 27 फरवरी को निर्माणाधीन भवन पर कब्जा शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। शासन से अतिरिक्त बजट मिलते ही सदर तहसील भवन के अधूरे पड़े काम फिर से शुरू हो गए। खिड़कियों व दरवाजों की फिटिंग के बाद बिजली की केबिलों की फिंटिंग (वायरिंग), विद्युत राड, सीलिंग फैन व रंगाई-पुताई को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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उधर जिला परियोजना प्रबंधक (विद्युत) आरपी सिन्हा का कहना है कि तहसील की मेन बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है। करीब 30 फीसदी वायरिंग व विद्युत उपकरणों की फिटिंग का काम बाकी है। इसे पूरा कराने के लिए तकनीशियनों व मजदूरों को काफी तादात में लगाया गया है। निर्धारित समय में काम पूरा कराकर तहसील भवन का हैंडओवर कर दिया जाएगा।
अतिरिक्त बजट पाने में होती है देरी
सदर तहसील के अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव की मानें तो अतिरिक्त बजट पाने के लिए निर्माण कार्यो में देरी की जाती है। नियमानुसार तो भवन निर्माण के समय अनुमानित लागत निर्धारित करते समय निर्माण अवधि में बढ़ने वाली महंगाई को भी ध्यान में रखा जाता है। नियमित तरीके से काम कराने पर बजट की किश्त भी शासन द्वारा समय से भेजी जाती है। इसके बाद भी काम में देरी करते हैं और महंगाई का हवाला देकर अतिरिक्त बजट की डिमांड की जाती है। यदि देरी के चलते अनुमानित लागत से अधिक बजट लगता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था या ठेकेदार की होनी चाहिए।
कार्यदायी संस्था को शासन से अतिरिक्त बजट मिल चुका है। बजट का हवाला देकर काम में देरी अब कोई बहाना नही है। निर्माणाधीन भवन का काम पूरा करने के लिए संस्था को 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है। निर्धारित समय में काम पूरा कर हैंडओवर न करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लापरवाह कर्मचारियों को भी दंडित किया जाएगा।
...रमेशचंद्र यादव, एडीएम, कन्नौज।
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सदर तहसील भवन का निर्माण सितंबर 2009 में शुरू हुआ था। मूल स्वीकृत लागत 247.89 लाख रुपये से दो साल में काम पूरा होना था। कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम कानपुर द्वारा इसे बनवाया जा रहा था। लेकिन अफसरों की उदासीनता से तहसील भवन के निर्माण कछुआ गति से चला। परिणामस्वरूप 70 फीसदी काम कराने के बाद कार्यदायी संस्था ने हाथ खड़े कर दिए।
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इस पर अमर उजाला ने विगत 27 फरवरी को निर्माणाधीन भवन पर कब्जा शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। शासन से अतिरिक्त बजट मिलते ही सदर तहसील भवन के अधूरे पड़े काम फिर से शुरू हो गए। खिड़कियों व दरवाजों की फिटिंग के बाद बिजली की केबिलों की फिंटिंग (वायरिंग), विद्युत राड, सीलिंग फैन व रंगाई-पुताई को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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उधर जिला परियोजना प्रबंधक (विद्युत) आरपी सिन्हा का कहना है कि तहसील की मेन बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है। करीब 30 फीसदी वायरिंग व विद्युत उपकरणों की फिटिंग का काम बाकी है। इसे पूरा कराने के लिए तकनीशियनों व मजदूरों को काफी तादात में लगाया गया है। निर्धारित समय में काम पूरा कराकर तहसील भवन का हैंडओवर कर दिया जाएगा।
अतिरिक्त बजट पाने में होती है देरी
सदर तहसील के अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव की मानें तो अतिरिक्त बजट पाने के लिए निर्माण कार्यो में देरी की जाती है। नियमानुसार तो भवन निर्माण के समय अनुमानित लागत निर्धारित करते समय निर्माण अवधि में बढ़ने वाली महंगाई को भी ध्यान में रखा जाता है। नियमित तरीके से काम कराने पर बजट की किश्त भी शासन द्वारा समय से भेजी जाती है। इसके बाद भी काम में देरी करते हैं और महंगाई का हवाला देकर अतिरिक्त बजट की डिमांड की जाती है। यदि देरी के चलते अनुमानित लागत से अधिक बजट लगता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था या ठेकेदार की होनी चाहिए।
कार्यदायी संस्था को शासन से अतिरिक्त बजट मिल चुका है। बजट का हवाला देकर काम में देरी अब कोई बहाना नही है। निर्माणाधीन भवन का काम पूरा करने के लिए संस्था को 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है। निर्धारित समय में काम पूरा कर हैंडओवर न करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लापरवाह कर्मचारियों को भी दंडित किया जाएगा।
...रमेशचंद्र यादव, एडीएम, कन्नौज।