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Kannauj News: अच्छे दाम के इंतजार में थमी आलू निकासी
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कन्नौज। लगातार तीन साल से घाटा झेल रहे आलू किसानों की निगाहें इस बार बाजार पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद थी कि भंडारित आलू 800 से 1000 रुपये प्रति पैकेट तक बिकेगा लेकिन सीजन शुरू होने के दो महीने बाद भी भाव 300 से 350 रुपये प्रति पैकेट के आसपास हैं। नतीजा यह है कि किसानों ने आलू निकालने की रफ्तार धीमी कर दी है और बेहतर कीमत के लिए समय का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में इस वर्ष 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती हुई थी। उत्पादन 20.46 लाख मीट्रिक टन रहा। इत्रनगरी के 197 कोल्ड स्टोरेजों में 16.98 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया था जबकि कुल भंडारण क्षमता 21.82 लाख मीट्रिक टन है। इसके बावजूद अब तक महज साढ़े आठ फीसदी आलू ही कोल्ड स्टोर से बाहर निकल पाया है। किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर आलू बेचने से लागत निकालना भी मुश्किल है। बैसावारी के किसान सुबोध कटियार का कहना है कि बीज, खाद, मजदूरी और भंडारण खर्च लगातार बढ़े हैं लेकिन बाजार भाव किसानों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं पहुंचा। किसानों जल्दबाजी में आलू निकालने से नुकसान होगा, इसलिए अधिकांश किसान फिलहाल इंतजार की रणनीति अपनाए हुए हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि निकासी की धीमी रफ्तार से बाजार में आपूर्ति नियंत्रित बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में मांग बढ़ती है तो किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। फिलहाल जिले के कोल्ड स्टोरेजों में आलू के साथ किसानों की उम्मीदें भी कैद हैं और सभी की नजरें बाजार के अगले रुख पर टिकी हुई हैं।
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बोले किसान
फोटो :31: ब्रजेश दुबे। संवाद
अभी भाव काफी कम
जलालाबाद किसान ब्रजेश दुबे बताते हैं कि इस बार किसानों को अच्छे दाम की उम्मीद थी लेकिन अभी भाव काफी कम हैं। मौजूदा कीमत पर आलू बेचने से लागत भी नहीं निकल रही है। इसलिए अधिकांश किसान निकासी रोककर बाजार सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
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फोटो:32: रामजी पाठक। संवाद
तीन साल से झेल रहे नुकसान
जलालाबाद के रहने वाले आलू किसान रामजी पाठक कहते हैं कि तीन साल से आलू में नुकसान झेल रहे हैं। इस बार जल्दबाजी में आलू निकालने से फायदा नहीं दिख रहा। अगर भाव बढ़े तो किसानों को कुछ राहत मिलेगी, इसलिए फिलहाल आलू कोल्ड स्टोर में ही रखा है।
वर्जन
अभी सिर्फ कुछ व्यापारी ही आलू की खरीदकर निकासी कर रहे हैं। वैसे भी बारिश के मौसम में आलू की निकासी कम होती है। सितंबर में आलू की निकासी बंपर की जाती है।
- आशीष कटियार, जिला उद्यान अधिकारी
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जिले में इस वर्ष 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती हुई थी। उत्पादन 20.46 लाख मीट्रिक टन रहा। इत्रनगरी के 197 कोल्ड स्टोरेजों में 16.98 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया था जबकि कुल भंडारण क्षमता 21.82 लाख मीट्रिक टन है। इसके बावजूद अब तक महज साढ़े आठ फीसदी आलू ही कोल्ड स्टोर से बाहर निकल पाया है। किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर आलू बेचने से लागत निकालना भी मुश्किल है। बैसावारी के किसान सुबोध कटियार का कहना है कि बीज, खाद, मजदूरी और भंडारण खर्च लगातार बढ़े हैं लेकिन बाजार भाव किसानों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं पहुंचा। किसानों जल्दबाजी में आलू निकालने से नुकसान होगा, इसलिए अधिकांश किसान फिलहाल इंतजार की रणनीति अपनाए हुए हैं।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि निकासी की धीमी रफ्तार से बाजार में आपूर्ति नियंत्रित बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में मांग बढ़ती है तो किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। फिलहाल जिले के कोल्ड स्टोरेजों में आलू के साथ किसानों की उम्मीदें भी कैद हैं और सभी की नजरें बाजार के अगले रुख पर टिकी हुई हैं।
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बोले किसान
फोटो :31: ब्रजेश दुबे। संवाद
अभी भाव काफी कम
जलालाबाद किसान ब्रजेश दुबे बताते हैं कि इस बार किसानों को अच्छे दाम की उम्मीद थी लेकिन अभी भाव काफी कम हैं। मौजूदा कीमत पर आलू बेचने से लागत भी नहीं निकल रही है। इसलिए अधिकांश किसान निकासी रोककर बाजार सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
फोटो:32: रामजी पाठक। संवाद
तीन साल से झेल रहे नुकसान
जलालाबाद के रहने वाले आलू किसान रामजी पाठक कहते हैं कि तीन साल से आलू में नुकसान झेल रहे हैं। इस बार जल्दबाजी में आलू निकालने से फायदा नहीं दिख रहा। अगर भाव बढ़े तो किसानों को कुछ राहत मिलेगी, इसलिए फिलहाल आलू कोल्ड स्टोर में ही रखा है।
वर्जन
अभी सिर्फ कुछ व्यापारी ही आलू की खरीदकर निकासी कर रहे हैं। वैसे भी बारिश के मौसम में आलू की निकासी कम होती है। सितंबर में आलू की निकासी बंपर की जाती है।
- आशीष कटियार, जिला उद्यान अधिकारी