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पद टेक्नीशियन का, कर रहे बाबूगीरी
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कार्यालय में काउंटर लगा कर बकाया बिजली बिल जमा करते टेक्नीशियन।
- फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। बिजली विभाग का अजब हाल है। जनता लोकल फाल्ट, कटौती से जूझ रही है। फाल्ट ठीक कराने और निगरानी की जिम्मेदारी तकनीकी विशेषज्ञों पर है। यह बाबूगीरी कर रहे हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति व्यवस्था भगवान भरोसे है। शहरी और ग्रामीण इलाकों को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है। लाइन में आने वाली खराबी अनुभवहीन लाइनमैन ठीक कर रहे हैं। ऐसे में यह अक्सर करंट का शिकार हो जाते हैं।
जिले में 50 से ज्यादा टेक्नीशियन तैनात हैं। बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए इनकी तैनाती की गई है। इनका काम उपकेंद्रों पर तैनात रहकर बिजली की खराबी दूर कराना है। कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर टेक्नीशियन अपना मूल काम नहीं कर रहे हैं। विभाग के अधिकारी इनसे कार्यालय में बाबूगीरी करा रहे हैं। इन्हें बाकायदा बाबू का पटल भी दिया गया है।
बिजली की तकनीकी जानकारी रखने वाले जेई के बाद यह दूसरे नंबर पर आते हैं। शासन से इनकी तैनाती उपकेंद्रों पर की गई है। जिले में आने के बाद विभाग ने इन्हें मूल पद पर नहीं भेजा। एक साल पहले शासन ने इन्हें मूल पद पर भेजने का पत्र विभागीय अधिकारियों को दिया था। इसके बाद भी यह अधिशासी अभियंता कार्यालय में बैठकर बाबू के काम कर रहे हैं। सुबह 10 बजे कार्यालय पहुंचना और फाइलें निपटाकर शाम पांच बजे कार्यालय से आवास पर लौटना, इनकी दिनचर्या बन गई है। सूत्रों का कहना है कि यह यही काम करते रहे तो इनकी तकनीकी जानकारी धीरे-धीरे कम हो जाएगी। 27000 से अधिक पगार लेने वाले टेक्नीशियन के बाबूगीरी करने से महकमे को नुकसान हो रहा है।
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जिले में 50 से ज्यादा टेक्नीशियन तैनात हैं। बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए इनकी तैनाती की गई है। इनका काम उपकेंद्रों पर तैनात रहकर बिजली की खराबी दूर कराना है। कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर टेक्नीशियन अपना मूल काम नहीं कर रहे हैं। विभाग के अधिकारी इनसे कार्यालय में बाबूगीरी करा रहे हैं। इन्हें बाकायदा बाबू का पटल भी दिया गया है।
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बिजली की तकनीकी जानकारी रखने वाले जेई के बाद यह दूसरे नंबर पर आते हैं। शासन से इनकी तैनाती उपकेंद्रों पर की गई है। जिले में आने के बाद विभाग ने इन्हें मूल पद पर नहीं भेजा। एक साल पहले शासन ने इन्हें मूल पद पर भेजने का पत्र विभागीय अधिकारियों को दिया था। इसके बाद भी यह अधिशासी अभियंता कार्यालय में बैठकर बाबू के काम कर रहे हैं। सुबह 10 बजे कार्यालय पहुंचना और फाइलें निपटाकर शाम पांच बजे कार्यालय से आवास पर लौटना, इनकी दिनचर्या बन गई है। सूत्रों का कहना है कि यह यही काम करते रहे तो इनकी तकनीकी जानकारी धीरे-धीरे कम हो जाएगी। 27000 से अधिक पगार लेने वाले टेक्नीशियन के बाबूगीरी करने से महकमे को नुकसान हो रहा है।
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