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Kannauj News: जेसीबी से खुदवाया तालाब, मनरेगा से भुगतान की तैयारी
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छिबरामऊ। शासन और प्रशासन मनरेगा के तहत श्रमिकों को 100 दिनों का रोजगार दिलाने के दावे कर रहा है पर हकीकत कुछ और ही है। गांव प्रधान व सचिव मिलकर जेसीबी मशीनों से कार्य पूरे कराकर फर्जी तरीके से मनरेगा से धनराशि निकालकर बंदरबांट कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला गांव सभा भौंराजपुर के मजरा मलपुरा जगदीशपुर में भी सामने आया है।
विकास खंड के मलपुरा जगदीशपुर गांव के अंकित प्रताप ने डीएम से शिकायत करते हुए बताया कि अमृत योजना के तहत गांव समाज की जमीन पर अमृत सरोवर खुदवाया गया है। शासन की मंशा के अनुरूप तालाब खुदाई का काम मनरेगा योजना के तहत होना चाहिए पर प्रधान, मनरेगा सचिव मनरेगा से भुगतान कराने के लिए मजदूरों की फोटो खिंचवा लेते हैं। खुदाई मजदूरों से कराने की बजाय जेसीबी से कराते है। गांव सोनू, अमित प्रताप, सुमित आदि का कहना है कि सौ रुपये उन्हें फोटो खिंचवाने के मिलते है, शेष रुपये का आपस में बंटवारा कर लिया जाता है। फोटो खिंचवाने के लिए उन्हीं मजदूरों को बुलाया जाता है, जो आसानी से खातों से रुपये निकालकर सौंप देते हैं।
डीएम के निर्देश पर रविवार को बीडीओ दीपांकर आर्य ने तालाब पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। बीडीओ ने बताया कि जेसीबी से तालाब की खुदवाई कराने के निशान मिले हैं। तकनीकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस संबंध में सचिव संतोष कुमार ने बताया कि मिट्टी की ऊपरी पर्त जेसीबी से खुदवाने का स्टीमेट में खुदवाया गया है, शेष कार्य मजदूरों से कराया गया है।
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जांच के बाद जेसीबी से खोदाई के मिटवाए निशान
शिकायतकर्ता अंकित प्रताप का आरोप है कि रविवार को बीडीओ को जांच में जेसीबी से तालाब खुदवाने के निशान मिले थे। उनके जाते ही गांव प्रधान ने मनरेगा मजदूरों को लगाकर निशान मिटाने का काम शुरू करा दिया। गांव प्रधान की हनक के चलते गांव का अधिकांश लोग उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं, जिस कारण विकास कार्याें में मनमानी की जा रही है।
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विकास खंड के मलपुरा जगदीशपुर गांव के अंकित प्रताप ने डीएम से शिकायत करते हुए बताया कि अमृत योजना के तहत गांव समाज की जमीन पर अमृत सरोवर खुदवाया गया है। शासन की मंशा के अनुरूप तालाब खुदाई का काम मनरेगा योजना के तहत होना चाहिए पर प्रधान, मनरेगा सचिव मनरेगा से भुगतान कराने के लिए मजदूरों की फोटो खिंचवा लेते हैं। खुदाई मजदूरों से कराने की बजाय जेसीबी से कराते है। गांव सोनू, अमित प्रताप, सुमित आदि का कहना है कि सौ रुपये उन्हें फोटो खिंचवाने के मिलते है, शेष रुपये का आपस में बंटवारा कर लिया जाता है। फोटो खिंचवाने के लिए उन्हीं मजदूरों को बुलाया जाता है, जो आसानी से खातों से रुपये निकालकर सौंप देते हैं।
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डीएम के निर्देश पर रविवार को बीडीओ दीपांकर आर्य ने तालाब पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। बीडीओ ने बताया कि जेसीबी से तालाब की खुदवाई कराने के निशान मिले हैं। तकनीकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस संबंध में सचिव संतोष कुमार ने बताया कि मिट्टी की ऊपरी पर्त जेसीबी से खुदवाने का स्टीमेट में खुदवाया गया है, शेष कार्य मजदूरों से कराया गया है।
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जांच के बाद जेसीबी से खोदाई के मिटवाए निशान
शिकायतकर्ता अंकित प्रताप का आरोप है कि रविवार को बीडीओ को जांच में जेसीबी से तालाब खुदवाने के निशान मिले थे। उनके जाते ही गांव प्रधान ने मनरेगा मजदूरों को लगाकर निशान मिटाने का काम शुरू करा दिया। गांव प्रधान की हनक के चलते गांव का अधिकांश लोग उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं, जिस कारण विकास कार्याें में मनमानी की जा रही है।