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Kannauj News: खुद की एप्रेन गायब, स्टाफ को नसीहत
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कन्नौज। जिला अस्पताल में नए सीएमएस डॉ. गोपाल नारायण द्विवेदी ने कार्यभार संभालते ही व्यवस्थाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गुरुवार को किए गए औचक निरीक्षण में अव्यवस्थाएं सामने आने पर उन्होंने साफ संदेश दिया कि अब अस्पताल में मनमानी नहीं, नियमों से काम होगा। उधर, अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एक दिलचस्प चर्चा भी रही। कर्मचारियों को एप्रेन और आई-कार्ड पहनने की हिदायत देने वाले सीएमएस खुद बिना एप्रेन नजर आए।
निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारी बिना एप्रेन और आई-कार्ड के ड्यूटी करते मिले। इस पर सीएमएस ने नाराजगी जताते हुए कर्मचारियों को चेतावनी दी। कहा कि बिना निर्धारित ड्रेस कोड और पहचान पत्र के ड्यूटी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को यह पता होना चाहिए कि सामने खड़ा युवक किस पद पर कार्यरत है। ओपीडी के बाहर मरीजों और तीमारदारों की भीड़ देखकर भी सीएमएस ने नाराजगी जताई। धक्कामुक्की और अव्यवस्था की जगह अब लाइन व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा।
दवा वितरण काउंटर पर भी उन्होंने फार्मासिस्टों को निर्देश दिए कि दवा थमाने के साथ उसके सेवन का समय और तरीका भी बताया जाए। उनका कहना था कि अधूरी जानकारी के कारण मरीज बार-बार डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं और ओपीडी पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।अल्ट्रासाउंड विभाग में भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अब अल्ट्रासाउंड के लिए जारी होने वाली प्रत्येक पर्ची पर चिकित्सक के हस्ताक्षर के साथ विभागीय मोहर अनिवार्य होगी। सीएमएस का मानना है कि इससे वास्तविक मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी।
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पर्ची के बिना नहीं होगी मुलाकात
अस्पताल में इन दिनों एक और चर्चा जोरों पर है। अब सीएमएस से मिलने के लिए पहले पर्ची भेजनी पड़ रही है। उनके कार्यालय में पड़ोस की कुर्सी पर बैठने वाले एक बुजुर्ग बाबू भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। कर्मचारी वर्ग में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर साहब के साथ हर समय नजर आने वाले यह बाबू जी किस भूमिका में हैं।हालांकि इस पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
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निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारी बिना एप्रेन और आई-कार्ड के ड्यूटी करते मिले। इस पर सीएमएस ने नाराजगी जताते हुए कर्मचारियों को चेतावनी दी। कहा कि बिना निर्धारित ड्रेस कोड और पहचान पत्र के ड्यूटी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को यह पता होना चाहिए कि सामने खड़ा युवक किस पद पर कार्यरत है। ओपीडी के बाहर मरीजों और तीमारदारों की भीड़ देखकर भी सीएमएस ने नाराजगी जताई। धक्कामुक्की और अव्यवस्था की जगह अब लाइन व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा।
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दवा वितरण काउंटर पर भी उन्होंने फार्मासिस्टों को निर्देश दिए कि दवा थमाने के साथ उसके सेवन का समय और तरीका भी बताया जाए। उनका कहना था कि अधूरी जानकारी के कारण मरीज बार-बार डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं और ओपीडी पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।अल्ट्रासाउंड विभाग में भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अब अल्ट्रासाउंड के लिए जारी होने वाली प्रत्येक पर्ची पर चिकित्सक के हस्ताक्षर के साथ विभागीय मोहर अनिवार्य होगी। सीएमएस का मानना है कि इससे वास्तविक मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी।
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पर्ची के बिना नहीं होगी मुलाकात
अस्पताल में इन दिनों एक और चर्चा जोरों पर है। अब सीएमएस से मिलने के लिए पहले पर्ची भेजनी पड़ रही है। उनके कार्यालय में पड़ोस की कुर्सी पर बैठने वाले एक बुजुर्ग बाबू भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। कर्मचारी वर्ग में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर साहब के साथ हर समय नजर आने वाले यह बाबू जी किस भूमिका में हैं।हालांकि इस पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।