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फोस्टर केयर से पल रहे मरीजों, गरीबों के बच्चे
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कन्नौज। अगर किसी बच्चे के माता-पिता कैंसर के मरीज हैं या दोनों को किसी मामले में सजा हो चुकी है या अभिभावक गरीबी के कारण बच्चे को पालन पोषण नहीं कर पा रहे हैं तो उन बच्चों का पालन पोषण और पढ़ाई फोस्टर केयर के माध्यम से की जाएगी। प्रत्येक बच्चे पर प्रतिमाह दो हजार रुपये खर्च किए जाने हैं। अभी ऐसे छह बच्चों का पालन पोषण जिले में किया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन 1989 में निराश्रित व जरूरतमंद परिवारों केे बच्चों को पढ़ाने और पालन पोषण करना जरूरी है। इसके लिए सरकार ने स्पांसरशिप एवं पालन-पोषण देखभाल (फोस्टर केयर) योजना शुरू की है।
इसमें कैंसर पीड़ित परिवार, माता-पिता को किसी अपराध में सजा होने पर उनके बच्चों और अनाथ बच्चों की जन्म से 18 वर्ष होने तक देखभाल की जानी है। योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर माता पिता को भी देने के आदेश हैं। शहरी क्षेत्र में परिवार की आय 56 हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये से कम होने चाहिए।
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ये समिति करती है चयन
जिला बाल संरक्षण अधिकारी अध्यक्ष
बाल संरक्षण अधिकारी सदस्य
अध्यक्ष बाल कल्याण समिति सदस्य
प्रतिनिधि विशेषज्ञ दस्तक ग्रहण अभिकरण सदस्य
बाल संरक्षण क्षेत्र में समाज सेवी संगठन सदस्य
छह बच्चों को किया गया लाभान्वित
फोस्टर केयर से जिले में छह बच्चों को लाभान्वित किया गया है। इसमें चार बेटियों और दो बेटे हैं। इनममें दो बच्चों के पिता कैंसर से पीड़ित हैं। एक बालिका के माता-पिता की मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई थी और दूसरे के माता-पिता ने आत्महत्या कर ली थी। एक बालिका के पिता-मां हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
दो लाख का मिला बजट
जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रेवेंद्र कुमार ने बताया कि अभी तक बाल कल्याण विभाग को दो लाख का बजट मिला है। प्रत्येक बच्चे पर दो लाख रुपये खर्च कर उनका मानसिक व शारीरिक विकास किया जा रहा है। छह बच्चों का पालन पोषण किया जा रहा है। ऐसे अन्य बच्चों की तलाश भी की जा रही है। आवेदन करने पर पात्रता की जांच की जाती है। 75 से 90 दिन में पात्रता तय कर दी जाती है।
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संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन 1989 में निराश्रित व जरूरतमंद परिवारों केे बच्चों को पढ़ाने और पालन पोषण करना जरूरी है। इसके लिए सरकार ने स्पांसरशिप एवं पालन-पोषण देखभाल (फोस्टर केयर) योजना शुरू की है।
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इसमें कैंसर पीड़ित परिवार, माता-पिता को किसी अपराध में सजा होने पर उनके बच्चों और अनाथ बच्चों की जन्म से 18 वर्ष होने तक देखभाल की जानी है। योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर माता पिता को भी देने के आदेश हैं। शहरी क्षेत्र में परिवार की आय 56 हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये से कम होने चाहिए।
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ये समिति करती है चयन
जिला बाल संरक्षण अधिकारी अध्यक्ष
बाल संरक्षण अधिकारी सदस्य
अध्यक्ष बाल कल्याण समिति सदस्य
प्रतिनिधि विशेषज्ञ दस्तक ग्रहण अभिकरण सदस्य
बाल संरक्षण क्षेत्र में समाज सेवी संगठन सदस्य
छह बच्चों को किया गया लाभान्वित
फोस्टर केयर से जिले में छह बच्चों को लाभान्वित किया गया है। इसमें चार बेटियों और दो बेटे हैं। इनममें दो बच्चों के पिता कैंसर से पीड़ित हैं। एक बालिका के माता-पिता की मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई थी और दूसरे के माता-पिता ने आत्महत्या कर ली थी। एक बालिका के पिता-मां हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
दो लाख का मिला बजट
जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रेवेंद्र कुमार ने बताया कि अभी तक बाल कल्याण विभाग को दो लाख का बजट मिला है। प्रत्येक बच्चे पर दो लाख रुपये खर्च कर उनका मानसिक व शारीरिक विकास किया जा रहा है। छह बच्चों का पालन पोषण किया जा रहा है। ऐसे अन्य बच्चों की तलाश भी की जा रही है। आवेदन करने पर पात्रता की जांच की जाती है। 75 से 90 दिन में पात्रता तय कर दी जाती है।