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वृद्धों के अनुभव और युवाओं जोश से संवरेगा देश
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शहर के आशा गार्डन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते गोविंदाचार्य।
- फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। भारतीय जनता पार्टी के थिंक टैंक रहे केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व में सबसे प्राचीन है। मौजूदा समय देश का युवा ही इसे संरक्षित कर सकता है। बुजुर्गों और पुराने राजनीति में माहिर लोगों के अनुभव से युवा देश का भविष्य संभाल सकते हैं। पूरे विश्व में सबसे ऊंचाई से गिरने वाली गंगा नदी के कई इतिहास है, जिनसे विश्व के लोग अचरज में है। यह विचार उन्होंने शनिवार को एक होटल में व्यक्त किए। वह देव प्रयाग से गंगासागर जाते समय वह अपने काफिले के साथ पहुंचे थे।
दो अक्तूबर को राजनीतिक सन्यास के 20 साल पूरे करने जा रहे गोविंदाचार्य ने बताया कि 9 सितंबर 2000 को 20 साल तक राजनीति से सन्यास लिया था। उन्होंने कहा कि गंगा को निर्मल बनाना और पौराणिक महिमा की जागरुकता फैलाना हम भारतीयों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अध्ययन प्रवास के दौरान करीब दो हजार देश हित के सफल प्रयोग किए हैं। जिन्हें वह दो अक्तूबर को सार्वजनिक करेंगे। एक बड़े मंच से अपने अध्ययन प्रवास को लेकर कई अहम फैसलों की घोषणा करेंगे। फिलहाल उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल में जाने से इंकार करते हुए कहा कि वह अब गैर राजनीतिक ढंग से देश के सर्वोच्च विकास के लिए कार्य करेंगे।
उन्होंने बताया कि गैर राजनीतिक ढंग से वह देश की राष्ट्रीयता, अखंडता और आर्थिक स्थिति को लेकर कई प्रयास करेंगे। बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने एमएससी किया था। अध्यापक की नौकरी लगने के बाद पीएचडी के लिए ऑक्सफोर्ड की स्कॉलरशिप मिलने वाली थी। जिसे ठुकरा कर देश सेवा में लग गए हैं। आज भी उनके लिए देश से बढ़कर कुछ नहीं है।
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इससे पहले शहर पहुंचने पर भाजपा नेता विपिन दीक्षित, श्याम दीक्षित, पूर्व विधायक बनवारी लाल दोहरे, पवन त्रिवेदी, बच्चा मिश्रा, विक्रम त्रिपाठी, छन्नू दुबे, राजकुमार वर्मा और वैभव मिश्रा विक्की ने उनका स्वागत किया। इस दौरान शिक्षक अतुल दीक्षित ने गोविंदाचार्य का चित्र उन्हें भेंट किया। इत्र कारोबारी विपिन दीक्षित ने भी उपहार भेंट किए।
सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री का सबसे पहले किया था विरोध
गोविंदाचार्य ने बताया कि 2004 में सोनिया गांधी देश की प्रधानमंत्री बनने वाली थीं। तब सबसे पहले उन्होंने सोनिया गांधी का विरोध किया था। बताया कि क्या सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में कोई योग्य प्रधानमंत्री नहीं है। इसके बाद देश के कोने-कोने से सोनिया गांधी का विरोध शुरू हो गया था। जिसके बाद वह स्वयं पीछे हट गईं और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया गया था।
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दो अक्तूबर को राजनीतिक सन्यास के 20 साल पूरे करने जा रहे गोविंदाचार्य ने बताया कि 9 सितंबर 2000 को 20 साल तक राजनीति से सन्यास लिया था। उन्होंने कहा कि गंगा को निर्मल बनाना और पौराणिक महिमा की जागरुकता फैलाना हम भारतीयों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अध्ययन प्रवास के दौरान करीब दो हजार देश हित के सफल प्रयोग किए हैं। जिन्हें वह दो अक्तूबर को सार्वजनिक करेंगे। एक बड़े मंच से अपने अध्ययन प्रवास को लेकर कई अहम फैसलों की घोषणा करेंगे। फिलहाल उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल में जाने से इंकार करते हुए कहा कि वह अब गैर राजनीतिक ढंग से देश के सर्वोच्च विकास के लिए कार्य करेंगे।
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उन्होंने बताया कि गैर राजनीतिक ढंग से वह देश की राष्ट्रीयता, अखंडता और आर्थिक स्थिति को लेकर कई प्रयास करेंगे। बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने एमएससी किया था। अध्यापक की नौकरी लगने के बाद पीएचडी के लिए ऑक्सफोर्ड की स्कॉलरशिप मिलने वाली थी। जिसे ठुकरा कर देश सेवा में लग गए हैं। आज भी उनके लिए देश से बढ़कर कुछ नहीं है।
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इससे पहले शहर पहुंचने पर भाजपा नेता विपिन दीक्षित, श्याम दीक्षित, पूर्व विधायक बनवारी लाल दोहरे, पवन त्रिवेदी, बच्चा मिश्रा, विक्रम त्रिपाठी, छन्नू दुबे, राजकुमार वर्मा और वैभव मिश्रा विक्की ने उनका स्वागत किया। इस दौरान शिक्षक अतुल दीक्षित ने गोविंदाचार्य का चित्र उन्हें भेंट किया। इत्र कारोबारी विपिन दीक्षित ने भी उपहार भेंट किए।
सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री का सबसे पहले किया था विरोध
गोविंदाचार्य ने बताया कि 2004 में सोनिया गांधी देश की प्रधानमंत्री बनने वाली थीं। तब सबसे पहले उन्होंने सोनिया गांधी का विरोध किया था। बताया कि क्या सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में कोई योग्य प्रधानमंत्री नहीं है। इसके बाद देश के कोने-कोने से सोनिया गांधी का विरोध शुरू हो गया था। जिसके बाद वह स्वयं पीछे हट गईं और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया गया था।