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मांग बढ़ी तो फिर महके गुलाब के दाम
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खेत में खड़ी गुलाब की फसल।
- फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। लॉकडाउन में इत्र कारखाने बंद होने से गुलाब की खपत घटने से दाम गिर गए थे। सरकार ने कर में छूट दी तो गुलाब की मांग पहले जैसी हो गई। इत्र, गुलकंद के साथ पंखुड़ियों से पाउडर बनाने से गुलाब के भाव फिर महकने लगे हैं।
जिले में डहलेपुर, खिदरपुरबाग, पट्टियन, पैंदाबाद, जलालपुर पनवारा समेत ब्लाक गुगरापुर तक करीब 400 हेक्टेयर में गुलाब की खेती है। ये रकबा शहरी क्षेत्र के करीब 15 किमी क्षेत्रफल में फैला है। यहां हल्के गुलाबी दमिश गुलाब की खेती होती है।
इस गुलाब का प्रयोग सिर्फ इत्र, कुलकंद और पंखुडियों से पाउडर बनाने में होता है। 25 मार्च से 14 अप्रैल तक हुए लॉकडाउन में इत्र कारखाने बंद हो गए। इसका असर गुलाब की खेती पर पड़ा। गुलाब की मांग कम होने से वह खेतों पर सड़ने लगा और भाव भी 40 रुपये से गिरकर 20-22 रुपये प्रति किलो तक पहुुंच गए। बाद में सरकार ने जैसे-जैसे कारखानों को चलाने की छूट दी तो गुलाब की खेती का धंधा फिर से चल पड़ा। अब फिर इत्र कारोबारी गुलाब को 30 से 40 रुपये किलो में खरीद रहे हैं।
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गुलाबी गुलाब का सजावट में नहीं होता प्रयोग
कन्नौज में गुलाबी गुलाब की खेती की जाती है, जिसे दमिश कहा जाता है। इसका इत्र बनाने के अलावा गुलकंद, गुलाब जल व पाउडर बनाने में प्रयोग होता है। वहीं, सुर्ख लाल गुलाब का प्रयोग शादी समारोह, मंदिरों के सजावट समेत अन्य निजी कार्यक्रमों में सजावट के काम में प्रयोग किया जाता है। कन्नौज के लोग इस कार्य के लिए कानपुर से गुलाब का फूल मंगवाते हैं। इससे कन्नौज के गुलाव का लॉकडाउन में कुछ खास असर नहीं पड़ा है।
अलीगढ़ से भी मंगवाते गुलाब
कन्नौज के अलावा अलीगढ़ में गुलाबी गुलाब की खेती की जाती है। यहां के इत्र व्यापारी अधिक मांग होने पर अलीगढ़ से गुलाब मंगवाते हैं। बताया कि कन्नौज के गुलाब की जगह अलीगढ़ के गुलाब की खुशबू तीखी है। इसका कई लोग प्रयोग करते हैं।
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शुरुआती लॉकडाउन में गुलाब की मांग कम हो गई थी, इससे भाव गिर गए थे। वर्तमान में गुलाब की मांग पहले जैसी है। इससे गुलाब की खेती पर कोई असर नहीं पड़ा है। किसान को गुलाब की खेती करने में कोई दिक्कत नहीं है। इत्र कारखाने बराबर चल रहे हैं।
-पवन त्रिवेदी, अध्यक्ष द अतर एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन।
पहले लॉकडाउन में सबकुछ बंद हो जाने से गुलाब की खेती पर असर पड़ा था। बाद में इत्र कारखाने शुरू होने से गुलाब की खेती की खपत होने लगी। यहां का गुलाब सारा इत्र कारखाने में खपत हो जाता है। वहीं, सजावट व शादी समारोह में प्रयोग होने वाले गुलाब को कानपुर से मंगवाया जाता है।
-मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।
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जिले में डहलेपुर, खिदरपुरबाग, पट्टियन, पैंदाबाद, जलालपुर पनवारा समेत ब्लाक गुगरापुर तक करीब 400 हेक्टेयर में गुलाब की खेती है। ये रकबा शहरी क्षेत्र के करीब 15 किमी क्षेत्रफल में फैला है। यहां हल्के गुलाबी दमिश गुलाब की खेती होती है।
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इस गुलाब का प्रयोग सिर्फ इत्र, कुलकंद और पंखुडियों से पाउडर बनाने में होता है। 25 मार्च से 14 अप्रैल तक हुए लॉकडाउन में इत्र कारखाने बंद हो गए। इसका असर गुलाब की खेती पर पड़ा। गुलाब की मांग कम होने से वह खेतों पर सड़ने लगा और भाव भी 40 रुपये से गिरकर 20-22 रुपये प्रति किलो तक पहुुंच गए। बाद में सरकार ने जैसे-जैसे कारखानों को चलाने की छूट दी तो गुलाब की खेती का धंधा फिर से चल पड़ा। अब फिर इत्र कारोबारी गुलाब को 30 से 40 रुपये किलो में खरीद रहे हैं।
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गुलाबी गुलाब का सजावट में नहीं होता प्रयोग
कन्नौज में गुलाबी गुलाब की खेती की जाती है, जिसे दमिश कहा जाता है। इसका इत्र बनाने के अलावा गुलकंद, गुलाब जल व पाउडर बनाने में प्रयोग होता है। वहीं, सुर्ख लाल गुलाब का प्रयोग शादी समारोह, मंदिरों के सजावट समेत अन्य निजी कार्यक्रमों में सजावट के काम में प्रयोग किया जाता है। कन्नौज के लोग इस कार्य के लिए कानपुर से गुलाब का फूल मंगवाते हैं। इससे कन्नौज के गुलाव का लॉकडाउन में कुछ खास असर नहीं पड़ा है।
अलीगढ़ से भी मंगवाते गुलाब
कन्नौज के अलावा अलीगढ़ में गुलाबी गुलाब की खेती की जाती है। यहां के इत्र व्यापारी अधिक मांग होने पर अलीगढ़ से गुलाब मंगवाते हैं। बताया कि कन्नौज के गुलाब की जगह अलीगढ़ के गुलाब की खुशबू तीखी है। इसका कई लोग प्रयोग करते हैं।
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शुरुआती लॉकडाउन में गुलाब की मांग कम हो गई थी, इससे भाव गिर गए थे। वर्तमान में गुलाब की मांग पहले जैसी है। इससे गुलाब की खेती पर कोई असर नहीं पड़ा है। किसान को गुलाब की खेती करने में कोई दिक्कत नहीं है। इत्र कारखाने बराबर चल रहे हैं।
-पवन त्रिवेदी, अध्यक्ष द अतर एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन।
पहले लॉकडाउन में सबकुछ बंद हो जाने से गुलाब की खेती पर असर पड़ा था। बाद में इत्र कारखाने शुरू होने से गुलाब की खेती की खपत होने लगी। यहां का गुलाब सारा इत्र कारखाने में खपत हो जाता है। वहीं, सजावट व शादी समारोह में प्रयोग होने वाले गुलाब को कानपुर से मंगवाया जाता है।
-मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।