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‘बिन तुलसी हरि एक न मानी’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 24 Nov 2015 12:05 AM IST
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मंशेश्वरनाथ मंदिर स्थित में तुलसी सालिगराम का विवाह
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धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने तुलसी सालिगराम का विधिवत श्रंगार कर
बैंडबाजों के साथ धूमधाम से बारात निकाली।
मेरे खुल गए भाग्य मिली तुलसी और बिन तुलसी हरि एक न मानी, जय-जय-जय तुलसी महारानी भजन के साथ महिलाओं ने गीत और भजन पेश किए। दूल्हे के रूप में सालिगराम की सुंदरता देखते ही बन रही थी। वहीं सोलह श्रंगार में तुलसी महारानी शोभाएमान हो रही थी। बारात आने के बाद आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की रस्म संपन्न कराई गई।
शास्त्रों के अनुसार तुलसी का पौधा हर हिंदू परिवार के आंगन में होना जरूरी बताया गया है। रामचरित मानस के अनुसार, हनुमान जी जब लंका गए वहां भक्त विभीषण के आंगन में तुलसी के पौधे को देखकर ही उन्होंने विभीषण को भगवान का भक्त समझा और उन्हें राम की भक्ति प्रदान की। आयोजन के दौरान काफी संख्या में महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।
मेरे खुल गए भाग्य मिली तुलसी और बिन तुलसी हरि एक न मानी, जय-जय-जय तुलसी महारानी भजन के साथ महिलाओं ने गीत और भजन पेश किए। दूल्हे के रूप में सालिगराम की सुंदरता देखते ही बन रही थी। वहीं सोलह श्रंगार में तुलसी महारानी शोभाएमान हो रही थी। बारात आने के बाद आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की रस्म संपन्न कराई गई।
शास्त्रों के अनुसार तुलसी का पौधा हर हिंदू परिवार के आंगन में होना जरूरी बताया गया है। रामचरित मानस के अनुसार, हनुमान जी जब लंका गए वहां भक्त विभीषण के आंगन में तुलसी के पौधे को देखकर ही उन्होंने विभीषण को भगवान का भक्त समझा और उन्हें राम की भक्ति प्रदान की। आयोजन के दौरान काफी संख्या में महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।