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सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 05 Dec 2015 11:52 PM IST
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सुप्रभाष अकादमी में आयोजित ग्रांड पैरेंट्स डे में
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बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने स्कूल
आए अपने दादा, दादी, नाना, नानी को तिलक लगा माल्यार्पण किया।
गीत, दादी अम्मा दादी अम्मा मान जाओ और ...मां तू कितनी अच्छी है पर डांस करके बच्चों ने वाहवाही लूटी। इसके अलावा पापा तो बैंड बजाए, नानी तेरी मोरनी को चोर ले गए, हम तो हैं आंधी हम तो हैं तूफान, लकड़ी की काठी और बच्चे मन के सच्चे आदि गीतों पर भी बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं।
इससे पूर्व अकादमी के तरंग रंगमंच पर मुख्य अतिथि अनीस जमील ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बच्चों से दुनिया को और खुशनुमा बनाने में योगदान की अपील की। सरस्वती वंदना के बाद शाल ओड़ाकर व गीता भेंट करके मुख्य अतिथि सहित विशिष्ट अतिथि जनार्दन प्रसाद मिश्रा एवं अकादमी की अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी शीतला देवी का अभिनंदन किया गया।
अकादमी के निदेशक सुप्रभाष सक्सेना ने कहा कि संसार की प्रगति में हमारे पूर्वजों और बुजुर्गों के संचित ज्ञानकोष को भावी पीढ़ियों में हस्तांतरण का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज हम जहां पर हैं, उसके लिए अपनी पिछली पीढ़ियों के प्रति कृतज्ञ हैं। अवधेश पाठक, सत्यराम यादव, अनिल मिश्रा, अनिल दुबे, फहीम जमा खां, सत्यप्रकाश आदि ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे प्रति वर्ष मनाने का आग्रह किया।
गीत, दादी अम्मा दादी अम्मा मान जाओ और ...मां तू कितनी अच्छी है पर डांस करके बच्चों ने वाहवाही लूटी। इसके अलावा पापा तो बैंड बजाए, नानी तेरी मोरनी को चोर ले गए, हम तो हैं आंधी हम तो हैं तूफान, लकड़ी की काठी और बच्चे मन के सच्चे आदि गीतों पर भी बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं।
इससे पूर्व अकादमी के तरंग रंगमंच पर मुख्य अतिथि अनीस जमील ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बच्चों से दुनिया को और खुशनुमा बनाने में योगदान की अपील की। सरस्वती वंदना के बाद शाल ओड़ाकर व गीता भेंट करके मुख्य अतिथि सहित विशिष्ट अतिथि जनार्दन प्रसाद मिश्रा एवं अकादमी की अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी शीतला देवी का अभिनंदन किया गया।
अकादमी के निदेशक सुप्रभाष सक्सेना ने कहा कि संसार की प्रगति में हमारे पूर्वजों और बुजुर्गों के संचित ज्ञानकोष को भावी पीढ़ियों में हस्तांतरण का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज हम जहां पर हैं, उसके लिए अपनी पिछली पीढ़ियों के प्रति कृतज्ञ हैं। अवधेश पाठक, सत्यराम यादव, अनिल मिश्रा, अनिल दुबे, फहीम जमा खां, सत्यप्रकाश आदि ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे प्रति वर्ष मनाने का आग्रह किया।