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इन हनुमान के काम बनाते मारुति नंदन
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Fri, 16 Oct 2015 12:47 AM IST
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रामलीला के हनुमान पर मारुति नंदन की पूरी मेहरबानी
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है। 23 सालों में उनके कई बड़े काम बने तो उसके पीछे वह इसी चरित्र को
निभाने को हनुमान का प्रसाद मानते हैं। जन्म के बाद छह माह तक हनुमान मंदिर
में पले बढ़े राजीव मिश्रा हनुमान के पुजारी हैं।
सराफान मोहल्ले के बाशिंदे राजीव मिश्रा रोडवेज में प्रभारी स्टेशन इंचार्ज के पद पर तैनात हैं। रामरूप व भगवती की संतान राजीव जन्म के छह माह तक हनुमान मंदिर में पले। मां बाप की कोई संतान जीवित न रहने से परिवार ने यह कदम उठाया था। 1992 में रामलीला कमेटी को हनुमान की तलाश हुई।
तत्कालीन कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद यज्ञसैनी वैश्य ने उन्हें तलाशा। राजीव के लिए यह सपना पूरा जैसे होना था। वह तैयार हो गए। तब से वह यह किरदार निभाते आ रहे हैं। राजीव का कहना है कि यह चरित्र अदा करने का ही फल रहा कि बिना किसी सिफारिश के यह नौकरी मिल गई।
राजीव रामलीला के दौरान छुट्टी ले लेते हैं। हनुमान के स्वरूप में वह ऐसे ढले की तरक्की भी उनके कदम चूमने लगी। आज वह रोडवेज में प्रभारी स्टेशन इंचार्ज के पद का दायित्व संभाल रहे हैं। मेकअप का पैसा वह जेब से ही खर्च करते हैं। कभी कमेटी से मेहनताना नहीं लिया। वह कहते हैं कि बचपन से हनुमान का पुजारी हूं। हनुमान की कृपा परिवार पर भी है।
बेटा संजीव को डाकघर में नौकरी मिली है। बेटी कीर्ति टीचर हैं। कहा कि वह इस चरित्र को आखिरी सांस तक निभाएंगे। वर्ष 02 में इस किरदार को न निभा पाने का मलाल भी है। इस साल अटैक पड़ गया था। हनुमान बनने वाले दिन को वह खास मानते हैं। उनका कहना है कि इस दिन अपने अंदर अलग किस्म की ऊर्जा महसूस होती है।
सराफान मोहल्ले के बाशिंदे राजीव मिश्रा रोडवेज में प्रभारी स्टेशन इंचार्ज के पद पर तैनात हैं। रामरूप व भगवती की संतान राजीव जन्म के छह माह तक हनुमान मंदिर में पले। मां बाप की कोई संतान जीवित न रहने से परिवार ने यह कदम उठाया था। 1992 में रामलीला कमेटी को हनुमान की तलाश हुई।
तत्कालीन कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद यज्ञसैनी वैश्य ने उन्हें तलाशा। राजीव के लिए यह सपना पूरा जैसे होना था। वह तैयार हो गए। तब से वह यह किरदार निभाते आ रहे हैं। राजीव का कहना है कि यह चरित्र अदा करने का ही फल रहा कि बिना किसी सिफारिश के यह नौकरी मिल गई।
राजीव रामलीला के दौरान छुट्टी ले लेते हैं। हनुमान के स्वरूप में वह ऐसे ढले की तरक्की भी उनके कदम चूमने लगी। आज वह रोडवेज में प्रभारी स्टेशन इंचार्ज के पद का दायित्व संभाल रहे हैं। मेकअप का पैसा वह जेब से ही खर्च करते हैं। कभी कमेटी से मेहनताना नहीं लिया। वह कहते हैं कि बचपन से हनुमान का पुजारी हूं। हनुमान की कृपा परिवार पर भी है।
बेटा संजीव को डाकघर में नौकरी मिली है। बेटी कीर्ति टीचर हैं। कहा कि वह इस चरित्र को आखिरी सांस तक निभाएंगे। वर्ष 02 में इस किरदार को न निभा पाने का मलाल भी है। इस साल अटैक पड़ गया था। हनुमान बनने वाले दिन को वह खास मानते हैं। उनका कहना है कि इस दिन अपने अंदर अलग किस्म की ऊर्जा महसूस होती है।