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परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर दयनीय
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
Updated Thu, 25 Dec 2014 12:05 AM IST
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जिले के परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। डीएम के आदेश पर जिले के 80 से अधिक अफसरों द्वारा कराई गई छानबीन के दौरान तमाम स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई का स्तर दयनीय मिला। कुछ स्कूलों में पढ़ाई का स्तर शून्य निकला।
सदर ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी सहकारिता शिवमूर्ति पांडेय की तरफ से उच्चाधिकारियों को भेजी गई निरीक्षण आख्या में लिखा गया है कि कन्या प्राइमरी स्कूल दुरजनापुर में कक्षा दो एवं तीन के बच्चों का हिंदी पठन पाठन व गिनती का ज्ञान कम पाया गया।
कक्षा दो के सात व कक्षा तीन के सात बच्चों से सवाल पूछे गए पर कोई जवाब नहीं दे पाया। पढ़ाई का स्तर इस स्कूल में शून्य पाया गया। कक्षा चार व पांच के बच्चों के पहाड़े व सामान्य ज्ञान का स्तर भी बहुत दयनीय पाया गया।
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प्राथमिक स्कूल गदनपुर नरहा में भी कक्षा दो एवं तीन के बच्चों का हिंदी पाठन एवं गिनती का ज्ञान गड़बड़ पाया गया।
कक्षा चार एवं पांच के बच्चों को पहाड़े एवं सामान्य ज्ञान का स्तर भी काफी कमजोर निकला। प्राथमिक स्कूल मियांगंज प्रथम में तो निरीक्षण वाले दिन तीन में से दो टीचर रंजीता व सुमन गैरहाजिर मिलीं। कक्षा दो एवं तीन तथा चार एवं पांच के बच्चों का पढ़ाई स्तर यहां पर शून्य पाया गया।
कक्षा दो के 14, तीन के 8, चार में 19 व पांच में 14 में से ज्यादातर विद्यार्थी पूछे गए प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सके। इसी तरह प्राथमिक स्कूल सैयदपुर सकरी में बच्चों की पढ़ाई का स्तर भी बहुत ज्यादा खराब पाया गया।
परिषदीय स्कूलों में छापामारी के दौरान अब मिडडेमील, शौचालय, टीचरों की उपस्थिति के साथ ही पढ़ाई-लिखाई व्यवस्था को परखने पर जोर दिया जाएगा। डीएम ने बीएसए को सख्ती के साथ शिक्षा का स्तर सुधारने के निर्देश दिए हैं।
डीएम अनुज कुमार ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों व टीचरों के स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। बेसिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने-लिखाने के स्तर के सुधार के लिए सख्ती की शुरुआत खंड शिक्षा अधिकारियों से होगी। बीईओ को हिदायत दी गई है कि वे अपना ज्ञान बढ़ाएं।
नियमित रूप से स्कूलों में जाकर निरीक्षण करें। पता करें कि रोज टीचर पढ़ाते हैं या नहीं। किस दिन किस टीचर ने क्या पढ़ाया, बच्चों को घर के लिए क्या होमवर्क दिया? इसे विशेष तौर पर जांचा जाए।
बीएसए का कहना है कि बीईओ को आगाह कर दिया गया है कि वे शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रयास शुरू कर दें। अभिभावकों को भी जागरूक करें। ऐसे टीचरों को चिह्नित कर उनकी हौसलाफजाई करें जो बेहतर ढंग से पढ़ा रहे हैं। वहीं जो टीचर देर से पहुंचते हैं या जल्दी स्कूल से घर के लिए निकल पड़ते हैं उन्हें दंडित कराएं।
निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं से उनके कोर्स के बारे में पूछताछ करें। कापी-किताबें चेक कर पता करें कि पढ़ाई नियति होती है या कभी-कभार है। टीचरों को निर्देश दें कि रोजाना बच्चों की कापियों पर तारीख डलवाएं। जो होमवर्क दें उसे अगले दिन चेक कर अपने दस्तखत भी करें। इस व्यवस्था से मूल्यांकन हो जाएगा कि किस-किस कक्षा में पढ़ाई हुई और कहां कितने दिन पढ़ाई या होमवर्क देने का काम नहीं किया गया।
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सदर ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी सहकारिता शिवमूर्ति पांडेय की तरफ से उच्चाधिकारियों को भेजी गई निरीक्षण आख्या में लिखा गया है कि कन्या प्राइमरी स्कूल दुरजनापुर में कक्षा दो एवं तीन के बच्चों का हिंदी पठन पाठन व गिनती का ज्ञान कम पाया गया।
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कक्षा दो के सात व कक्षा तीन के सात बच्चों से सवाल पूछे गए पर कोई जवाब नहीं दे पाया। पढ़ाई का स्तर इस स्कूल में शून्य पाया गया। कक्षा चार व पांच के बच्चों के पहाड़े व सामान्य ज्ञान का स्तर भी बहुत दयनीय पाया गया।
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प्राथमिक स्कूल गदनपुर नरहा में भी कक्षा दो एवं तीन के बच्चों का हिंदी पाठन एवं गिनती का ज्ञान गड़बड़ पाया गया।
कक्षा चार एवं पांच के बच्चों को पहाड़े एवं सामान्य ज्ञान का स्तर भी काफी कमजोर निकला। प्राथमिक स्कूल मियांगंज प्रथम में तो निरीक्षण वाले दिन तीन में से दो टीचर रंजीता व सुमन गैरहाजिर मिलीं। कक्षा दो एवं तीन तथा चार एवं पांच के बच्चों का पढ़ाई स्तर यहां पर शून्य पाया गया।
कक्षा दो के 14, तीन के 8, चार में 19 व पांच में 14 में से ज्यादातर विद्यार्थी पूछे गए प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सके। इसी तरह प्राथमिक स्कूल सैयदपुर सकरी में बच्चों की पढ़ाई का स्तर भी बहुत ज्यादा खराब पाया गया।
परिषदीय स्कूलों में छापामारी के दौरान अब मिडडेमील, शौचालय, टीचरों की उपस्थिति के साथ ही पढ़ाई-लिखाई व्यवस्था को परखने पर जोर दिया जाएगा। डीएम ने बीएसए को सख्ती के साथ शिक्षा का स्तर सुधारने के निर्देश दिए हैं।
डीएम अनुज कुमार ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों व टीचरों के स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। बेसिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने-लिखाने के स्तर के सुधार के लिए सख्ती की शुरुआत खंड शिक्षा अधिकारियों से होगी। बीईओ को हिदायत दी गई है कि वे अपना ज्ञान बढ़ाएं।
नियमित रूप से स्कूलों में जाकर निरीक्षण करें। पता करें कि रोज टीचर पढ़ाते हैं या नहीं। किस दिन किस टीचर ने क्या पढ़ाया, बच्चों को घर के लिए क्या होमवर्क दिया? इसे विशेष तौर पर जांचा जाए।
बीएसए का कहना है कि बीईओ को आगाह कर दिया गया है कि वे शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रयास शुरू कर दें। अभिभावकों को भी जागरूक करें। ऐसे टीचरों को चिह्नित कर उनकी हौसलाफजाई करें जो बेहतर ढंग से पढ़ा रहे हैं। वहीं जो टीचर देर से पहुंचते हैं या जल्दी स्कूल से घर के लिए निकल पड़ते हैं उन्हें दंडित कराएं।
निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं से उनके कोर्स के बारे में पूछताछ करें। कापी-किताबें चेक कर पता करें कि पढ़ाई नियति होती है या कभी-कभार है। टीचरों को निर्देश दें कि रोजाना बच्चों की कापियों पर तारीख डलवाएं। जो होमवर्क दें उसे अगले दिन चेक कर अपने दस्तखत भी करें। इस व्यवस्था से मूल्यांकन हो जाएगा कि किस-किस कक्षा में पढ़ाई हुई और कहां कितने दिन पढ़ाई या होमवर्क देने का काम नहीं किया गया।