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अपहरण, हत्या और अब खौफ
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Wed, 10 Feb 2016 12:05 AM IST
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क्षेत्र के गांव नगरिया अरुहो में एक छात्र की अपहरण
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के बाद हत्या से गांव में दहशत व्याप्त हो गई है। दहशत के चलते मंगलवार को
गांव के किसी भी अभिभावक ने अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजा। किशोर के घर
में कोहराम मचा रहा, वहीं गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा।
मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे प्रेमचंद्र का 14 वर्षीय पुत्र उमेश कक्षा नौ का छात्र था। चार फरवरी को अचानक वह लापता हो गया। परिजनों ने उसकी खोजबीन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, पर उसका कहीं पता नहीं चल सका। छात्र के अपहरण की चर्चाएं हो रही थी। हर कोई यहीं कह रहा था कि छात्र का अपहरण हो गया है।
पांच दिन बाद सोमवार की रात जब अपहृत छात्र की लाश नहर में मिली तो हड़कंप मच गया। हर कोई मौके पर पहुंचा और हालत देख भयभीत हो गया। पूरी रात गांव में कोहराम मचा रहा। परिजनों की करुण क्रंदन ने सभी को झकझोर कर रख दिया। जहां एक तरफ शोक की लहर थी वहीं दूसरी तरफ गांव में दहशत भी थी कि अपहरण के बाद हत्या की घटना को अंजाम किसने दिया।
रात जैसे तैसे कट गई, पर सुबह होते ही किसी भी अभिभावक ने अपने बच्चो को घर से नहीं निकलने दिया। यहां तक की कोई भी बच्चा स्कूल भी नहीं गया। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि किशोर के घर में महिलाओं और ग्रामीणों को जमावड़ा बना रहा।
चार फरवरी को जब से उमेश गायब हुआ तो घर का हर शख्स उसकी तलाश कर रहा था, पर एक उसकी मां ही ऐसी थी जो कि दरवाजे पर उम्मीद भरी निगाहों से टकटकी लगाए रहती थी कि अभी उसका बेटा आएगा या उसके पति उसके बेटे के कोई खबर लाएंगे। इसी उम्मीद में चार दिन कट गए, पर न बेटा आया और न ही उसकी कोई सूचना मिली।
सोमवार की रात जब छात्र का पिता बेटे की तलाश में छिबरामऊ गया था तभी गांव में एक छात्र की लाश मिलने का हड़कंप मच गया। मां ने जब अपने बेटे की लाश को देखा तो वह बेहोश हो गई। महिलाओं ने पानी डाल होश में लाईं, पर वह दहाड़े मारकर रो रही थी कि उसकी आंखों के तारे को किसने मारा? किससे क्या दुश्मनी थी? एक मां की पीड़ा को सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम हो गई थी।
मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे प्रेमचंद्र का 14 वर्षीय पुत्र उमेश कक्षा नौ का छात्र था। चार फरवरी को अचानक वह लापता हो गया। परिजनों ने उसकी खोजबीन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, पर उसका कहीं पता नहीं चल सका। छात्र के अपहरण की चर्चाएं हो रही थी। हर कोई यहीं कह रहा था कि छात्र का अपहरण हो गया है।
पांच दिन बाद सोमवार की रात जब अपहृत छात्र की लाश नहर में मिली तो हड़कंप मच गया। हर कोई मौके पर पहुंचा और हालत देख भयभीत हो गया। पूरी रात गांव में कोहराम मचा रहा। परिजनों की करुण क्रंदन ने सभी को झकझोर कर रख दिया। जहां एक तरफ शोक की लहर थी वहीं दूसरी तरफ गांव में दहशत भी थी कि अपहरण के बाद हत्या की घटना को अंजाम किसने दिया।
रात जैसे तैसे कट गई, पर सुबह होते ही किसी भी अभिभावक ने अपने बच्चो को घर से नहीं निकलने दिया। यहां तक की कोई भी बच्चा स्कूल भी नहीं गया। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि किशोर के घर में महिलाओं और ग्रामीणों को जमावड़ा बना रहा।
चार फरवरी को जब से उमेश गायब हुआ तो घर का हर शख्स उसकी तलाश कर रहा था, पर एक उसकी मां ही ऐसी थी जो कि दरवाजे पर उम्मीद भरी निगाहों से टकटकी लगाए रहती थी कि अभी उसका बेटा आएगा या उसके पति उसके बेटे के कोई खबर लाएंगे। इसी उम्मीद में चार दिन कट गए, पर न बेटा आया और न ही उसकी कोई सूचना मिली।
सोमवार की रात जब छात्र का पिता बेटे की तलाश में छिबरामऊ गया था तभी गांव में एक छात्र की लाश मिलने का हड़कंप मच गया। मां ने जब अपने बेटे की लाश को देखा तो वह बेहोश हो गई। महिलाओं ने पानी डाल होश में लाईं, पर वह दहाड़े मारकर रो रही थी कि उसकी आंखों के तारे को किसने मारा? किससे क्या दुश्मनी थी? एक मां की पीड़ा को सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम हो गई थी।