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कन्नौज : काली और गंगा नदी में मिले सैकड़ों गोवंशों के शव
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पानी कम होने पर नदी किनारे पड़े गोवंशों के शव। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। काली और गंगा नदी में शुक्रवार को सैकड़ों गोवंशों के शव उतराते मिले। नदी किनारे पहुंचे इन शवों को कुत्ते और कौवे नोच रहे थे। ये सभी शव एक दो दिन पहले ही यहां बहकर आए अथवा फेंके गए। लोगों ने बताया कि इससे पहले नदी साफ सुथरी थी।
शहर के मेहंदीघाट पर गंगा और काली नदी का संगम है। यहां से महज 200 मीटर दूरी पर गुमटिया गांव के सामने ग्रामीणों ने सौ से अधिक गोवंशों के सड़े-गले शव देखे। इसके अलावा करीब 50 शव गंगा में बहते दिखाई दिए। झुंड बनाकर कुत्ते और कौवे शवों को नोच रहे हैं। बदबू से लोग परेशान हैं।
स्थानीय किसान विनोद कुमार और गंगादास दोहरे ने बताया कि इन गोवंशों के शव अचानक दिखाई दिए हैं। इस पर प्रशासन को सूचना दी गई। अधिकारियों ने जेसीबी से शवों को हटाकर दफन कराने की बात कही है। एसडीएम सदर उमाकांत तिवारी ने कहा कि गोवंशों के शव कहां से बहकर आए हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। टीम को भेजकर शवों को दफन कराया जाएगा। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शाल्य ने बताया कि फिलहाल जिले में गोवंशों की मौत नहीं हुई है। ये कहीं से बहकर आए होंगे।
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उधर, स्थानीय लोगों ने दबी जुबान में कहा कि किसी गोशाला में ठंड और भूख से मवेशियों की मौत हुई है। इन्हें नदियों में फेंककर आसानी से ठिकाने लगा दिया गया।
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शहर के मेहंदीघाट पर गंगा और काली नदी का संगम है। यहां से महज 200 मीटर दूरी पर गुमटिया गांव के सामने ग्रामीणों ने सौ से अधिक गोवंशों के सड़े-गले शव देखे। इसके अलावा करीब 50 शव गंगा में बहते दिखाई दिए। झुंड बनाकर कुत्ते और कौवे शवों को नोच रहे हैं। बदबू से लोग परेशान हैं।
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स्थानीय किसान विनोद कुमार और गंगादास दोहरे ने बताया कि इन गोवंशों के शव अचानक दिखाई दिए हैं। इस पर प्रशासन को सूचना दी गई। अधिकारियों ने जेसीबी से शवों को हटाकर दफन कराने की बात कही है। एसडीएम सदर उमाकांत तिवारी ने कहा कि गोवंशों के शव कहां से बहकर आए हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। टीम को भेजकर शवों को दफन कराया जाएगा। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शाल्य ने बताया कि फिलहाल जिले में गोवंशों की मौत नहीं हुई है। ये कहीं से बहकर आए होंगे।
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उधर, स्थानीय लोगों ने दबी जुबान में कहा कि किसी गोशाला में ठंड और भूख से मवेशियों की मौत हुई है। इन्हें नदियों में फेंककर आसानी से ठिकाने लगा दिया गया।