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कालीदह मर्दन की लीला ने लुभाया
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 19 Nov 2015 11:58 PM IST
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स्कूल में चल रही रासलीला के चौथे दिन कालीदह के मर्दन की लीला का मंचन
किया गया। नगर में लगभग दो दशक बाद हो रही रासलीला में वृंदावन धाम से आए
कलाकारों द्वारा बुधवार की रात कालीदह मर्दन की लीला का मंचन किया गया।
स्वामी अवधेश शर्मा ने कालीदह लीला का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि मथुरा के राजा कंस जब कई उपाय के बाद भी कृष्ण की हत्या नहीं कर सका जब उसने अपने मंत्रियों से परामर्श किया और फिर जब कोई बात नहीं बनी तब उसने अपने गुरु ऋषि नारद का आह्वान किया।
नारद ऋषि के सुझाए उपाय के बाद कंस ने नंद बाबा को संदेशा भेजा कि वह कालीदह से एक हजार नीले कमल पूजा के लिए उसके पास भिजवाने की व्यवस्था करें। कालीदह में जहरीला नाग रहता था। जिसके जहर से उसका पानी काला हो गया था उसे जो भी पीता था वह मर जाता था।
कंस का संदेशा सुनने के बाद नंद और माता यशोदा दुखी हो गईं। दोनों को दुखी देख भगवान कृष्ण ने अपने बाल सखाओं के साथ खेलने का बहाना बनाकर वह सभी को कालीदह के किनारे ले गए और खेल के दौरान गेंद उसमें डाल दी। गेंद निकालने का बहाना कर कृष्ण ने उसमें छलांग लगा दी। यह देख बाल सखा रोने लगे।
कुछ देर बाद भगवान कृष्ण ने कालीदह का मर्दन कर उसके फन पर नृत्य करने लगे। यह दृश्य देख बाल सखा झूम उठे। बाल स्वरूप कृष्ण की लीलाओं को देखकर लोग जहां भावविभोर होते रहे, वहीं हास्य कलाकार मुदमंगल के अभिनय को देख दर्शक हंस-हंस कर लोटपोट हो जाते हैं।
लीला के दौरान...कालीदह पर खेलन आयो मेरो बारो सो कन्हैया भजन की प्रस्तुति पर पांडाल तालियों से गूंज उठा। मंचन के दौरान भगवान कृष्ण और राधा ने गोपिकाओं और सखियों के साथ रास रचाया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया मयूर नृत्य देख लोग रोमांचित हो उठे। अंत में बाल स्वरूप राधाकृष्ण की झांकी की शोभा दुबे, राजीव दुबे, नेमीचंद्र राठौर, नरेश वर्मा, रामानंद वर्मा, सुरेश पेंटर, दिलीप गुप्ता, करुणा शंकर गुप्ता, भाष्कर चतुर्वेदी आदि ने आरती उतारी।
स्वामी अवधेश शर्मा ने कालीदह लीला का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि मथुरा के राजा कंस जब कई उपाय के बाद भी कृष्ण की हत्या नहीं कर सका जब उसने अपने मंत्रियों से परामर्श किया और फिर जब कोई बात नहीं बनी तब उसने अपने गुरु ऋषि नारद का आह्वान किया।
नारद ऋषि के सुझाए उपाय के बाद कंस ने नंद बाबा को संदेशा भेजा कि वह कालीदह से एक हजार नीले कमल पूजा के लिए उसके पास भिजवाने की व्यवस्था करें। कालीदह में जहरीला नाग रहता था। जिसके जहर से उसका पानी काला हो गया था उसे जो भी पीता था वह मर जाता था।
कंस का संदेशा सुनने के बाद नंद और माता यशोदा दुखी हो गईं। दोनों को दुखी देख भगवान कृष्ण ने अपने बाल सखाओं के साथ खेलने का बहाना बनाकर वह सभी को कालीदह के किनारे ले गए और खेल के दौरान गेंद उसमें डाल दी। गेंद निकालने का बहाना कर कृष्ण ने उसमें छलांग लगा दी। यह देख बाल सखा रोने लगे।
कुछ देर बाद भगवान कृष्ण ने कालीदह का मर्दन कर उसके फन पर नृत्य करने लगे। यह दृश्य देख बाल सखा झूम उठे। बाल स्वरूप कृष्ण की लीलाओं को देखकर लोग जहां भावविभोर होते रहे, वहीं हास्य कलाकार मुदमंगल के अभिनय को देख दर्शक हंस-हंस कर लोटपोट हो जाते हैं।
लीला के दौरान...कालीदह पर खेलन आयो मेरो बारो सो कन्हैया भजन की प्रस्तुति पर पांडाल तालियों से गूंज उठा। मंचन के दौरान भगवान कृष्ण और राधा ने गोपिकाओं और सखियों के साथ रास रचाया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया मयूर नृत्य देख लोग रोमांचित हो उठे। अंत में बाल स्वरूप राधाकृष्ण की झांकी की शोभा दुबे, राजीव दुबे, नेमीचंद्र राठौर, नरेश वर्मा, रामानंद वर्मा, सुरेश पेंटर, दिलीप गुप्ता, करुणा शंकर गुप्ता, भाष्कर चतुर्वेदी आदि ने आरती उतारी।