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कोरोना गाइडलाइन के तहत किए जाहरा माता के दर्शन
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मंदिर के बाहर से मिट्टी उठाते दर्शनार्थी।
- फोटो : KANNAUJ
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तालग्राम(कन्नौज)। रोहली स्थित मां जाहरा देवी के कोरोना गाइडलाइन के तहत दर्शन किए गए। पूजा, अर्चना कर मन वांछित फल की मनोकामना की गई। वहीं पुलिस सख्ती के चलते दुकानदारों ने खेतों में दुकानें लगाईं।
कोरोना महामारी के कारण इस बार भी मेले का आयोजन नहीं किया गया। इसके बाद भी दुकानदारों ने प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानें लगा लीं। कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। भक्तों ने मां के चरणों में अनाज, घी और चढ़ावा अर्पित किया। कई बार भीड़ भी लगी। भक्त मंदिर परिसर की मिट्टी और अखंड ज्योति से भभूत लेकर आगे बढ़ते रहे।
चढ़ावा की जिम्मेदारी अमीन ध्रुव वर्मा, योगेश कुमार, विमल कुमार, रामकिशोर समेत 12 राजस्व अमीनों की टीम को दी गई है। थाना प्रभारी कृष्णलाल पटेल, उप निरीक्षक नन्हेंलाल, राम प्रकाश, रोहित के अलावा लाइन से आई पुलिस और यातायात पुलिस के साथ गाड़ी समेत फायर ब्रिगेड टीम मौजूद रही।
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ये है मंदिर की मान्यता
रोहली गांव के बुजुर्ग अमर सिंह ठाकुर बताते हैं कि मंदिर ढाई सौ साल से अधिक पुराना है। पूर्वज बताते हैं कि तिसौली गांव के कुछ लोग बैल गाड़ी से तीर्थ यात्रा के लिए निकले थे। बैल बीमार हो जाने पर इन्होंने जाहारा देवी की आराधना की। इससे बैल ठीक हो गए। यह देवी की मूर्ति लेकर गांव के लिए चल दिए। रोहली गांव के पास मूर्ति को जमीन पर रख कर लघु शंका करने लगे। बाद में मूर्ति को नहीं उठा सके। यह थककर चले गए। बाद में इस जगह पर जमींदार ने छोटी मठिया बना दी। इस पर मूर्ति रखी गई। यह भादों माह का शनिवार था। इससे भादों माह और शनिवार की काफी मान्यता है। तिसौली गांव में भी जाहरा देवी की मठिया बनी है। वहीं मंदिर के पुजारी रामवीर ने बताया कि मान्यता है कि मां की पूजा, अर्चना से मवेशी बीमार नहीं होते हैं। परिवार में सुख, समृद्धि और शांति रहती है। परिसर की मिट्टी खेतों में डालने से पैदावार अच्छी होती है। इसी से झारखंड, पंजाब, हरियाणा, बिहार कई प्रांतों के लोग आते हैं। पशु व्यापारी भी मन्नत मांगने आते हैं।
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कोरोना महामारी के कारण इस बार भी मेले का आयोजन नहीं किया गया। इसके बाद भी दुकानदारों ने प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानें लगा लीं। कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। भक्तों ने मां के चरणों में अनाज, घी और चढ़ावा अर्पित किया। कई बार भीड़ भी लगी। भक्त मंदिर परिसर की मिट्टी और अखंड ज्योति से भभूत लेकर आगे बढ़ते रहे।
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चढ़ावा की जिम्मेदारी अमीन ध्रुव वर्मा, योगेश कुमार, विमल कुमार, रामकिशोर समेत 12 राजस्व अमीनों की टीम को दी गई है। थाना प्रभारी कृष्णलाल पटेल, उप निरीक्षक नन्हेंलाल, राम प्रकाश, रोहित के अलावा लाइन से आई पुलिस और यातायात पुलिस के साथ गाड़ी समेत फायर ब्रिगेड टीम मौजूद रही।
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ये है मंदिर की मान्यता
रोहली गांव के बुजुर्ग अमर सिंह ठाकुर बताते हैं कि मंदिर ढाई सौ साल से अधिक पुराना है। पूर्वज बताते हैं कि तिसौली गांव के कुछ लोग बैल गाड़ी से तीर्थ यात्रा के लिए निकले थे। बैल बीमार हो जाने पर इन्होंने जाहारा देवी की आराधना की। इससे बैल ठीक हो गए। यह देवी की मूर्ति लेकर गांव के लिए चल दिए। रोहली गांव के पास मूर्ति को जमीन पर रख कर लघु शंका करने लगे। बाद में मूर्ति को नहीं उठा सके। यह थककर चले गए। बाद में इस जगह पर जमींदार ने छोटी मठिया बना दी। इस पर मूर्ति रखी गई। यह भादों माह का शनिवार था। इससे भादों माह और शनिवार की काफी मान्यता है। तिसौली गांव में भी जाहरा देवी की मठिया बनी है। वहीं मंदिर के पुजारी रामवीर ने बताया कि मान्यता है कि मां की पूजा, अर्चना से मवेशी बीमार नहीं होते हैं। परिवार में सुख, समृद्धि और शांति रहती है। परिसर की मिट्टी खेतों में डालने से पैदावार अच्छी होती है। इसी से झारखंड, पंजाब, हरियाणा, बिहार कई प्रांतों के लोग आते हैं। पशु व्यापारी भी मन्नत मांगने आते हैं।