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खुफिया की आशंका हल्के में लेनी पड़ी भारी

Sat, 24 Oct 2015 12:26 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Sat, 24 Oct 2015 12:26 AM IST
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Intelligence had to take in light , anticipating heavy

खुफिया तंत्र ने तीन दिन पहले ही संवेदनशीलता को

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भांपते हुए टकराव की आशंका जताई थी। पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों को लिखित तौर पर रिपोर्ट भेजकर संकेत भी दे दिए गए थे, पर अफसरों ने खतरे के अलर्ट को हल्के में ले लिया। यह चूक भी आखिर में महंगी पड़ी।

शुक्रवार को खुफिया विभाग के एक दरोगा ने बताया कि बीते दिनों शहर में घटी छिटपुट घटनाओं के बाद उपजा तनाव अंदर ही अंदर सुलगता रहा। बताया कि सादी वर्दी में कई कार्यक्रमों के आयोजकों से हुई बातचीत के दौरान सुगबुगाहट महसूस होते ही गर्म होते हालातों के मद्देनजर ठोस सुरक्षा इंतजाम करने के लिए रिपोर्ट भेजकर आगाह कर दिया था।

इसके बावजूद सुस्ती बरती गई। खुफिया तंत्र की मानें तो यदि खतरे को गंभीरता से ले ठोस कार्रवाई और सुरक्षा के इंतजाम हुए होते तो शायद यह नौबत न आती। उधर, गुरुवार को दुर्गा विसर्जन यात्रा के दौरान लाखन तिराहे पर फायरिंग के दौरान पुलिस भी मौजूद थी।

पथराव और फायरिंग के बीच एक मकान को भी चिह्नित किया गया था, जिसकी तीसरी मंजिल पर चढ़कर नकाबपोश कट्टे व अधिया लेकर फायरिंग कर रहे हैं। बवाल के दौरान बेकाबू हुए हालात को नियंत्रित करने की कोशिशों के दौरान उक्त मकान की घेराबंदी नहीं की गई।

यही वजह रही कि भगदड़ मची तो भीड़ के साथ ही मौका मिलते ही मकान की छत से फायरिंग कर रहे लोग नीचे उतरकर फरार हो गए। कई घंटे बाद जब पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उक्त मकान पर पहुंचकर खोजबीन की तब तक उपद्रवी उनकी पकड़ से दूर जा चुके थे।

गुरुवार को जिला अस्पताल में पुलिस व प्रशासन के आला अफसरों के समक्ष भीड़ ने आरोप जड़ते हुए कहा कि तीन महीने पहले भी मोहल्ला अजयपाल में दुकान खाली कराने को लेकर हुए सांप्रदायिक संघर्ष की शुरुआत में एक मकान की छत से अराजकतत्वों ने फायरिंग की थी। तब भी पुलिस मौके पर पहुंची थी।

उस वक्त तो सीओ सिटी व कोतवाल भी फायरिंग के दौरान बाल-बाल बचे थे। उस वक्त भी तत्काल पुलिस ने उपद्रवियों को पकड़ने के लिए मकान के आसपास घेराबंदी नहीं की। पुलिस की इसी चूक से गोली चलाने वालों को तब भी भागने का मौका मिल गया था। तब में जब फोर्स ने दबिश दी तो खाली हाथ लौटना पड़ा था।

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