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अस्पतालों में कचरा निस्तारण जरूरी : डा. रीमा
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
Updated Wed, 16 Sep 2015 12:00 AM IST
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अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का सही तरीके से निस्तारण करना बहुत जरूरी है। मेडिकल कॉलेजों में तो इसके लिए समितियों का गठन किया जाता है। मेडिसिन, पैथोलॉजी, ब्लड बैंक आदि विभागों में कचरे का सही निस्तारण न होने से एड्स, हेपटीटाइटिस, खसरा और कई रक्तजनित बीमारियां फैल सकती हैं। यह विचार केजीएमयू लखनऊ की सहायक प्रो. डा. रीमा कुमारी ने व्यक्त किए। वह राजकीय मेडिकल कालेज में आयोजित यूजी-पीजी कांफ्रेस 2015 के प्रथम दिन वेस्ट मैनेजमेंट वर्कशाप को संबोधित कर रही थीं।
इसके पूर्व कांफ्रेस का शुभारंभ प्राचार्य डा.डीएस मारतोलिया, प्रोफेसर डा. रीमा कुमारी व कचरा निस्तारण समिति कम्यूनिटी मेडिसिन केजीएमयू लखनऊ की सदस्य डा.अस्मिता सिंह व पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव ने किया। डा. रीमा कुमारी ने बताया कि मेडिकल कचरे को निपटाने के लिए पहली बार 1998 में केंद्र सरकार ने एक कानून बनाया था। जिसके तहत देश भर के सभी मेडिकल कालेजों व प्राइवेट नर्सिंग होम में समितियां गठित की गई थीं। उन्होंने बताया कि मेडिकल वेस्ट में सबसे अधिक खतरा इंजेक्शन सिरेंज से उत्पन्न होता है। इसमें लापरवाही से संक्रमित बीमारियां फैलती हैं।
डा.अस्मिता सिंह ने कहा कि मेडिकल कचरों के निस्तारण में यदि कोई मेडिकल कालेज व नर्सिंग होम लापरवाही बरतता है तो उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। इसके पूर्व कन्नौज मेडिकल कालेज के सहायक प्रोफेसर डा. प्रदीप खारया, डा.एसके वर्मन ने डायबिटीज पर भी एक वर्कशाप का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में पूरे विश्व में इस बीमारी से प्रभावित मरीजों की तादात कई गुना बढ़ी है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन भी डायबिटीज के बढ़ते मरीजों से चिंतित है। इसको जड़ से खत्म करने के लिए कई शोध चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज में लापरवाही बरतने वाले मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने लगती है। वर्कशाप के दौरान मेडिकल स्टूडेंटस से क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें बेहतर जवाब देने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिता का आयोजन डा. प्रदीप खार्या, डा. नरेंद्र त्रिपाठी, डा. तनु मिड्ढा, डा. समरजीत कौर ने किया। वर्कशाप के दौरान डा.वीरेंद्र कुशवाहा, डा.डाली रस्तोगी, डा.एसके ध्रुव, सीएचसी तिर्वा प्रभारी डा.जितेंद्र कुमार के अलावा राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक बीआर सिंह, नीरज द्विवेदी, अभिषेक यादव, राहुल पांडेय सहित कई लोग मौजूद रहे।
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इसके पूर्व कांफ्रेस का शुभारंभ प्राचार्य डा.डीएस मारतोलिया, प्रोफेसर डा. रीमा कुमारी व कचरा निस्तारण समिति कम्यूनिटी मेडिसिन केजीएमयू लखनऊ की सदस्य डा.अस्मिता सिंह व पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव ने किया। डा. रीमा कुमारी ने बताया कि मेडिकल कचरे को निपटाने के लिए पहली बार 1998 में केंद्र सरकार ने एक कानून बनाया था। जिसके तहत देश भर के सभी मेडिकल कालेजों व प्राइवेट नर्सिंग होम में समितियां गठित की गई थीं। उन्होंने बताया कि मेडिकल वेस्ट में सबसे अधिक खतरा इंजेक्शन सिरेंज से उत्पन्न होता है। इसमें लापरवाही से संक्रमित बीमारियां फैलती हैं।
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डा.अस्मिता सिंह ने कहा कि मेडिकल कचरों के निस्तारण में यदि कोई मेडिकल कालेज व नर्सिंग होम लापरवाही बरतता है तो उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। इसके पूर्व कन्नौज मेडिकल कालेज के सहायक प्रोफेसर डा. प्रदीप खारया, डा.एसके वर्मन ने डायबिटीज पर भी एक वर्कशाप का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में पूरे विश्व में इस बीमारी से प्रभावित मरीजों की तादात कई गुना बढ़ी है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन भी डायबिटीज के बढ़ते मरीजों से चिंतित है। इसको जड़ से खत्म करने के लिए कई शोध चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज में लापरवाही बरतने वाले मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने लगती है। वर्कशाप के दौरान मेडिकल स्टूडेंटस से क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें बेहतर जवाब देने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिता का आयोजन डा. प्रदीप खार्या, डा. नरेंद्र त्रिपाठी, डा. तनु मिड्ढा, डा. समरजीत कौर ने किया। वर्कशाप के दौरान डा.वीरेंद्र कुशवाहा, डा.डाली रस्तोगी, डा.एसके ध्रुव, सीएचसी तिर्वा प्रभारी डा.जितेंद्र कुमार के अलावा राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक बीआर सिंह, नीरज द्विवेदी, अभिषेक यादव, राहुल पांडेय सहित कई लोग मौजूद रहे।