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Kannauj News: बिना पंजीकरण के अस्पताल और क्लीनिक संचालित
Sat, 07 Jun 2025 11:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:35 PM IST
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कन्नौज। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण के निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। इनमें मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। स्वास्थ्य महकमा इन पर कार्रवाई कर लगाम लगाने के दावे तो कर रहा है, लेकिन दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। अभी भी बिना पंजीकरण के निजी अस्पताल और बिना डिग्री के झोलाछाप क्लीनिक संचालित हो रहे हैं।
गर्मी के साथ ही लोग संक्रामक बीमारियों से ग्रसित होने लगे हैं। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिना पंजीकरण के अस्पताल और बिना डिग्री के झोलाछाप क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, जहां पर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मई में निजी अस्पतालों में दो मरीजों की जान चली गई। इसके अलावा मरीजों की जान खतरे में पड़ने की भी जानकारियां आती रहती हैं। स्वास्थ्य महकमा अभियान चलाकर बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पतालों और बिना डिग्री के क्लीनिक चलाने वाले झोलाछापों पर कार्रवाई करनी की बात कह रही है, लेकिन हकीकत में ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी झोलाछाप लोगों का इलाज कर रहे हैं।
अब देखना है कि स्वास्थ्य महकमा बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पतालों पर ताला लगा पाता है या फिर जुगाड़ से यह अस्पताल और झोलाछापों के क्लीनिक संचालित होते रहेंगे। नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र नाग ने बताया कि बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे निजी अस्पतालों और झोलाछाप के क्लीनिकों की जांच के लिए अभियान चल रहा है। अभी तक दो अस्पताल बंद कराए गए हैं और तीन क्लीनिक संचालकों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा गया है।
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गर्मी के साथ ही लोग संक्रामक बीमारियों से ग्रसित होने लगे हैं। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिना पंजीकरण के अस्पताल और बिना डिग्री के झोलाछाप क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, जहां पर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मई में निजी अस्पतालों में दो मरीजों की जान चली गई। इसके अलावा मरीजों की जान खतरे में पड़ने की भी जानकारियां आती रहती हैं। स्वास्थ्य महकमा अभियान चलाकर बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पतालों और बिना डिग्री के क्लीनिक चलाने वाले झोलाछापों पर कार्रवाई करनी की बात कह रही है, लेकिन हकीकत में ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी झोलाछाप लोगों का इलाज कर रहे हैं।
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अब देखना है कि स्वास्थ्य महकमा बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पतालों पर ताला लगा पाता है या फिर जुगाड़ से यह अस्पताल और झोलाछापों के क्लीनिक संचालित होते रहेंगे। नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र नाग ने बताया कि बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे निजी अस्पतालों और झोलाछाप के क्लीनिकों की जांच के लिए अभियान चल रहा है। अभी तक दो अस्पताल बंद कराए गए हैं और तीन क्लीनिक संचालकों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा गया है।
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