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Kannauj News: जिंक की कमी से धान फसल का रुकता विकास
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तालग्राम। इस समय धान की फसल की रोपाई हो चुकी है। धान में जिंक की कमी के कारण तना छेदक, पत्ता लपेटक, पीली पत्ती, ब्लॉस्ट, खैरा रोग जैसी बीमारियां लगनी शुरू हो जाती हैं। इससे विकास रुक जाता है। किसानों को अच्छे उत्पादन के लिए इनका रोकथाम और समय पर प्रबंधन कराना जरूरी है।
कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह ने बताया कि धान की फसल में जिंक की कमी से पत्ती पीली होने लगती है और अधिक जिंक की कमी से पत्ते पर भूरे रंग के धब्बे होने लगते हैं। इसकी कमी से धान के नए किल्ले निकलना बंद हो जाते हैं और धान फसल का विकास भी रुक जाता है। पत्तियां मुड़ने लगती हैं और बालियां निकलने में देरी होती है। इसलिए धान की एक एकड़ फसल में 45 किलोग्राम यूरिया के साथ पांच किलो जिंक सल्फेट और चार किलो फेरस सल्फेट डालना अति आवश्यक है।
तालग्राम कृषि रक्षा इकाई प्रभारी शिव सिंह ने बताया कि जिंक की कमी होने के कारण लक्षण दिखाई देने लगें, तो एक किलोग्राम जिंक सल्फेट और पांच किलो यूरिया को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद धान के किल्ले निकलने से पहले दो किलोग्राम जिंक सल्फेट का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से धान के अधिक किल्ले निकलते हैं। धान की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कई प्रकार के रोग प्रभाव नहीं डाल पाते हैं। उन्होंने बताया कि फेरस सल्फेट की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने से आयरन की कमी को रोकता है। आयरन क्लोरोसिस और पत्तियों के पीलेपन को ठीक करता है।
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कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह ने बताया कि धान की फसल में जिंक की कमी से पत्ती पीली होने लगती है और अधिक जिंक की कमी से पत्ते पर भूरे रंग के धब्बे होने लगते हैं। इसकी कमी से धान के नए किल्ले निकलना बंद हो जाते हैं और धान फसल का विकास भी रुक जाता है। पत्तियां मुड़ने लगती हैं और बालियां निकलने में देरी होती है। इसलिए धान की एक एकड़ फसल में 45 किलोग्राम यूरिया के साथ पांच किलो जिंक सल्फेट और चार किलो फेरस सल्फेट डालना अति आवश्यक है।
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तालग्राम कृषि रक्षा इकाई प्रभारी शिव सिंह ने बताया कि जिंक की कमी होने के कारण लक्षण दिखाई देने लगें, तो एक किलोग्राम जिंक सल्फेट और पांच किलो यूरिया को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद धान के किल्ले निकलने से पहले दो किलोग्राम जिंक सल्फेट का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से धान के अधिक किल्ले निकलते हैं। धान की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कई प्रकार के रोग प्रभाव नहीं डाल पाते हैं। उन्होंने बताया कि फेरस सल्फेट की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने से आयरन की कमी को रोकता है। आयरन क्लोरोसिस और पत्तियों के पीलेपन को ठीक करता है।
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