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मुफ्त राशन सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचा
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कन्नौज। कोविड काल में आजीविका की दिक्कत को देखते हुए सरकार ने कार्डधारकों को मुफ्त में राशन बांटा। मुफ्त में राशन लेने के बाद जिले के तमाम लोगों ने उसे सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच दिया। ऐसा कर लाखों रुपये कमा लिए गए। शिकायत पर मामला खुला। जांच हुई तो जिले में 291 कार्ड अपात्रों के मिले। इनमें 11 लोग पड़ोसी जिलों के हैं। इन्होंने मुफ्त में राशन पा लिया। इन सभी के राशन कार्ड निरस्त कर सूचना शासन को भेजी जा रही है।
प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना में राशनकार्ड वाले परिवारों को प्रत्येक माह तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल प्रति यूनिट के हिसाब से मुफ्त दिया जाता है। जिले में 291 कार्ड धारकाें ने मुफ्त मिले राशन को सरकारी क्रय केंद्रों पर अपने पास कृषि भूमि दर्शाते हुए रबी और खरीफ में बेच दिया। इसे तीन लाख रुपये से ज्यादा में बेचा गया। राशनकार्ड अब आधार से लिंक हो गया है। यह सरकारी क्रय केंद्रों पर अनाज बेचने गए तो वहां आधार नंबर ले लिया गया। आधार का मिलान हुआ तो पकड़ में आया कि एक-एक किसान ने तीन-तीन लाख रुपये से ज्यादा का अनाज बेच दिया। जांच का दायरा बढ़ा तो पकड़ में आया कि मुफ्त राशन लेकर सरकारी केंद्रों पर बेचा गया है। दूसरी ओर चर्चा है कि कुछ आढ़तियों ने मजदूरों का आधार लगाकर अनाज सरकारी केंद्रों पर बेचा है। यह मजदूर मुफ्त अनाज पा रहे थे। ऐसे में कुछ मजदूर भी फंस गए हैं।
जिले में ज्यादा मामले सौरिख, हसेरन, छिबरामऊ, तालग्राम क्षेत्र के हैं। शासन से आधार के माध्यम से पकड़ में आए 291 लोगों की सूची पूर्ति निरीक्षकों को सौंपी गई। पूर्ति निरीक्षकों ने सत्यापन किया तो हकीकत खुल गई। विभागीय सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण में दो लाख और शहरी में तीन लाख रुपये की आय सीमा से ज्यादा के लोग राशनकार्ड के लिए अपात्र होते हैं। ऐसे में जिन लोगों ने क्रय केंद्र पर अनाज बिक्री में यह सीमा तोड़ दी, उन्हें अपात्र मान लिया गया।
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कृषि भूमि के दस्तावेज की भी जांच रिपोर्ट लगेगी: जिला पूर्ति अधिकारी
जिला पूर्ति अधिकारी कमलेश गुप्ता का कहना है कि 291 की सूची में 11 राशनकार्ड धारक पड़ोसी जिलों के हैं। उन्होंने यहां से राशन लिया है। इन सभी लोगों को सत्यापन में अपात्र पाया गया। ऐसे में सभी के राशनकार्ड निरस्त करने की संस्तुति के साथ शासन को भेजे जा रहे हैं। राजस्व से इनके कृषि भूमि के दस्तावेज की भी जांच रिपोर्ट लगेगी। इसके बाद शासन से जो निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना में राशनकार्ड वाले परिवारों को प्रत्येक माह तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल प्रति यूनिट के हिसाब से मुफ्त दिया जाता है। जिले में 291 कार्ड धारकाें ने मुफ्त मिले राशन को सरकारी क्रय केंद्रों पर अपने पास कृषि भूमि दर्शाते हुए रबी और खरीफ में बेच दिया। इसे तीन लाख रुपये से ज्यादा में बेचा गया। राशनकार्ड अब आधार से लिंक हो गया है। यह सरकारी क्रय केंद्रों पर अनाज बेचने गए तो वहां आधार नंबर ले लिया गया। आधार का मिलान हुआ तो पकड़ में आया कि एक-एक किसान ने तीन-तीन लाख रुपये से ज्यादा का अनाज बेच दिया। जांच का दायरा बढ़ा तो पकड़ में आया कि मुफ्त राशन लेकर सरकारी केंद्रों पर बेचा गया है। दूसरी ओर चर्चा है कि कुछ आढ़तियों ने मजदूरों का आधार लगाकर अनाज सरकारी केंद्रों पर बेचा है। यह मजदूर मुफ्त अनाज पा रहे थे। ऐसे में कुछ मजदूर भी फंस गए हैं।
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जिले में ज्यादा मामले सौरिख, हसेरन, छिबरामऊ, तालग्राम क्षेत्र के हैं। शासन से आधार के माध्यम से पकड़ में आए 291 लोगों की सूची पूर्ति निरीक्षकों को सौंपी गई। पूर्ति निरीक्षकों ने सत्यापन किया तो हकीकत खुल गई। विभागीय सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण में दो लाख और शहरी में तीन लाख रुपये की आय सीमा से ज्यादा के लोग राशनकार्ड के लिए अपात्र होते हैं। ऐसे में जिन लोगों ने क्रय केंद्र पर अनाज बिक्री में यह सीमा तोड़ दी, उन्हें अपात्र मान लिया गया।
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कृषि भूमि के दस्तावेज की भी जांच रिपोर्ट लगेगी: जिला पूर्ति अधिकारी
जिला पूर्ति अधिकारी कमलेश गुप्ता का कहना है कि 291 की सूची में 11 राशनकार्ड धारक पड़ोसी जिलों के हैं। उन्होंने यहां से राशन लिया है। इन सभी लोगों को सत्यापन में अपात्र पाया गया। ऐसे में सभी के राशनकार्ड निरस्त करने की संस्तुति के साथ शासन को भेजे जा रहे हैं। राजस्व से इनके कृषि भूमि के दस्तावेज की भी जांच रिपोर्ट लगेगी। इसके बाद शासन से जो निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।