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Kannauj News: बेटी की विदाई के बाद उठी पिता की अर्थी, दादी ने भी तोड़ा दम
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तिर्वा। जिस घर से बेटी की डोली विदा हुई, उसी घर में कुछ ही घंटों बाद पिता की अर्थी उठ गई। बेटे की मौत का सदमा मां सहन नहीं कर सकी और उसने भी दम तोड़ दिया। एक ही दिन में मां-बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।
कोतवाली क्षेत्र के डंबरपुर गांव निवासी प्रेम नारायण (52) मां चंद्रावती (74) के साथ ननिहाल में रहते थे। बुधवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में उन्होंने अपनी नेत्रहीन बेटी नीतू (24) का हाथ थामकर उसे विदा किया था। पिता के चेहरे पर बेटी की शादी की खुशी साफ झलक रही थी,लेकिन किसे पता था कि यह खुशी कुछ ही घंटों की मेहमान है।
बेटी को विदा कर घर लौटने के बाद बुधवार की देर शाम अचानक प्रेम नारायण की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गए।वहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। देर रात उनका शव घर पहुंचा तो खुशियों से भरा आंगन मातम में बदल गया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी सन्न रह गए। बेटे के शव को देखकर मां चंद्रावती का दिल टूट गया। बेटे के गम में रोते-रोते उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
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भाई विवेकानंद ने बताया कि प्रेम नारायण छह महीने से बीमार चल रहे थे। मां चंद्रावती भी पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थीं और बड़े बेटे के साथ ही रहती थीं। सुबह जिस घर में बेटी की विदाई के गीत गूंजे थे, शाम तक वहीं सिसकियां सुनाई देने लगीं। एक ही दिन में मां और बेटे की मौत से पूरा गांव गमगीन हो गया। लोग बस यही कहते नजर आए कि यह दिन उस परिवार के लिए जिंदगी का सबसे भारी दिन बन गया।
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कोतवाली क्षेत्र के डंबरपुर गांव निवासी प्रेम नारायण (52) मां चंद्रावती (74) के साथ ननिहाल में रहते थे। बुधवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में उन्होंने अपनी नेत्रहीन बेटी नीतू (24) का हाथ थामकर उसे विदा किया था। पिता के चेहरे पर बेटी की शादी की खुशी साफ झलक रही थी,लेकिन किसे पता था कि यह खुशी कुछ ही घंटों की मेहमान है।
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बेटी को विदा कर घर लौटने के बाद बुधवार की देर शाम अचानक प्रेम नारायण की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गए।वहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। देर रात उनका शव घर पहुंचा तो खुशियों से भरा आंगन मातम में बदल गया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी सन्न रह गए। बेटे के शव को देखकर मां चंद्रावती का दिल टूट गया। बेटे के गम में रोते-रोते उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
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भाई विवेकानंद ने बताया कि प्रेम नारायण छह महीने से बीमार चल रहे थे। मां चंद्रावती भी पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थीं और बड़े बेटे के साथ ही रहती थीं। सुबह जिस घर में बेटी की विदाई के गीत गूंजे थे, शाम तक वहीं सिसकियां सुनाई देने लगीं। एक ही दिन में मां और बेटे की मौत से पूरा गांव गमगीन हो गया। लोग बस यही कहते नजर आए कि यह दिन उस परिवार के लिए जिंदगी का सबसे भारी दिन बन गया।