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‘भाव के भूखे होते हैं भगवान’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 08 Oct 2015 12:02 AM IST
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श्रीराम कथा महा महोत्सव के दौरान ऋषिकेश के
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ब्रह्मचारी बाल संत भोले बाबा महाराज ने भगवान राम और सबरी के मिलन की कथा
का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं।
बटेश्वरदयाल महाविद्यालय में चल रही श्रीराम कथा के दौरान भोले बाबा ने भगवान राम द्वारा सबरी की झोपड़ी में जाकर उसके बेर खाने की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम ने सबरी के निश्चल भाव को परख कर उसके झूठे बेरों को स्वीकार किया। कहा कि भगवान प्रेम और भाव के वशीभूत हैं।
इसके अलावा अशोक वाटिका में हनुमान के पहुंचने, उनके द्वारा माता सीता की वंदना करने, भगवान राम द्वारा दी गई मुद्रिका भेंट करने और राक्षसों द्वारा उनके पकड़ने पर अशोक वाटिका को तहस-नहस करने के जीवंत दृश्य देखकर भक्त रोमांचित हो उठे। इस दौरान अशोक वाटिका में सजाए गए फलदार पेड़ों पर हनुमान का अभिनय कर रहे पात्र ने फलों को तोड़कर खाया और पंडाल में मौजूद लोगों को भी दिए। यह दृश्य देख पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
बटेश्वरदयाल महाविद्यालय में चल रही श्रीराम कथा के दौरान भोले बाबा ने भगवान राम द्वारा सबरी की झोपड़ी में जाकर उसके बेर खाने की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम ने सबरी के निश्चल भाव को परख कर उसके झूठे बेरों को स्वीकार किया। कहा कि भगवान प्रेम और भाव के वशीभूत हैं।
इसके अलावा अशोक वाटिका में हनुमान के पहुंचने, उनके द्वारा माता सीता की वंदना करने, भगवान राम द्वारा दी गई मुद्रिका भेंट करने और राक्षसों द्वारा उनके पकड़ने पर अशोक वाटिका को तहस-नहस करने के जीवंत दृश्य देखकर भक्त रोमांचित हो उठे। इस दौरान अशोक वाटिका में सजाए गए फलदार पेड़ों पर हनुमान का अभिनय कर रहे पात्र ने फलों को तोड़कर खाया और पंडाल में मौजूद लोगों को भी दिए। यह दृश्य देख पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।