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डडवारी सपूतों के कहर से अंग्रेजों के खून से लाल हुआ था गंगा जल

Wed, 10 Aug 2022 12:22 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 12:22 AM IST
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Due to the havoc of Dadwari sons, the water of the Ganges was red with the blood of the British.
कन्नौज। गंगा और काली नदी के बीच डडवारी नाम से पहचानी जाने वाली भूमि 1857 में क्रांति भूमि के नाम से चर्चित थी। गंगा तलहटी के माटी की तासीर क्रांतिकारियों की वीरगाथा बयां करती है। गंगा किनारे बसे कुसुमखोर गांव के क्रांतिकारियों के खौफ से अंग्रेजों को गंगा नदी से नावों के जरिये परिवहन बंद करना पड़ा था।
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गंगा और काली नदी के बीच बसे कुसुमखोर गांव के 34 क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फांसी और काला पानी की सजा दी थी। गुरसहायगंज निवासी वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता शमशाद ने बताया कि 1857 में बहादुर शाह के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर कुमसुमखोर गांव में रहने वाले क्रांतिकारी अब्दुल रहीम, अफजल खां, गुन्नाम खां, इंदुइयागंज निवासी पंडित रामसेवक मिश्र, हरदयाल और वीरेंद्र सिंह ने गुट बनाकर फिरंगियों के खिलाफ खूनी आंदोलन छेड़ दिया था।
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इस दौर में सुगम सफर के लिहाज से अंग्रेजी अफसर फतेहगढ़ से अक्सर गंगा नदी में नाव और डोगों से कानपुर, बनारस और प्रयागराज आते-जाते थे। क्रांतिकारी कुसुमखोर गांव के टीले पर बैठकर घात लगाकर अंग्रेजों के बेड़ों का इंतजार करते थे। अंग्रेजों की नाव और डोगें देखते ही पानी में कूदकर अंग्रेजों को मौत के घाट उतार देते थे।
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क्रांतिकारियों के खौफ के चलते अंग्रेजों को गंगा नदी में जल मार्ग के सफर को बंद करना पड़ा था। इसके बाद अंग्रेजों ने पूरे गांव को घेर कर क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था। कुछ को सरेआम फांसी पर लटका दिया था, तो कुछ को काला पानी सजा भेज दिया था।
क्रांति से बौखलाकर पूरे क्षेत्र में लगाया था दंड
कुसुमखोर में क्रांतिकारियों के आतंक से खौफ खाकर अंग्रेजों ने आसपास के करीब 30 गांव में खेतीबाड़ी से लेकर दुकानदारों पर दंड के रुप में कर लगा दिया था। जनसहयोग आंदोलन के बाद ब्रिटिश गर्वनरी ने क्षेत्र को दंडवरी कर दिया था। इससे इस क्षेत्र को आज भी दंडवरी और डडवारी के नाम से जाना जाता है।

आजादी के बाद डडवारी विकास मंच का हुआ था गठन
क्रांतिकारियों की शरणस्थली रही डडवारी क्षेत्र अंग्रेजों की प्रताडना के चलते अति पिछड़ा क्षेत्र था। आजादी के बाद क्षेत्र के विकास के लिए डडवारी विकास मंच का गठन हुआ था। 1980 तक यह मंच सक्रिय रहा। कांग्रेसी नेता शमशाद ने बताया कि वह खुद डडवारी विकास मंच के अध्यक्ष रहे थे। मौजूदा समय मंच निष्क्रिय चल रहा है।
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