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‘प्रेम के भूखे हैं परमात्मा’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 06 Oct 2015 11:59 PM IST
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बटेश्वदयाल महाविद्यालय में चल रही श्रीरामकथा
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महोत्सव में ऋषिकेश से पधारे ब्रह्मचारी बालसंत भोलेबाबा ने राम-भरत मिलन
की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान प्रेम के भूखे हैं।
गोविंद सत साहित्य समिति, प्रभातफेरी मंडल की ओर से आयोजित नौ दिवसीय दुर्लभ सत्संग एवं श्रीराम कथा महोत्सव में भोले बाबा ने वनवास के दौरान राम-भरत मिलन की कथा के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भरत ने अपने भाई राम से काफी अनुनय-विनय की, पर राम ने मर्यादाओं की दुहाई देते हुए अपने भाई भरत को गले से लगा लिया।
बाद में भरत अपने भाई राम की चरणपादुकाओं को लेकर अयोध्या लौट गए और उनके वापस न आने तक उनकी पूजा की। राम और भरत के भातृ प्रेम की कथा सुनकर लोग भावविभोर हो गए। कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं। प्यार से भगवान को हासिल किया जा सकता है। इस दौरान भगवान राम और भरत मिलन की जीवंत झांकियों का प्रदर्शन किया गया।
गोविंद सत साहित्य समिति, प्रभातफेरी मंडल की ओर से आयोजित नौ दिवसीय दुर्लभ सत्संग एवं श्रीराम कथा महोत्सव में भोले बाबा ने वनवास के दौरान राम-भरत मिलन की कथा के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भरत ने अपने भाई राम से काफी अनुनय-विनय की, पर राम ने मर्यादाओं की दुहाई देते हुए अपने भाई भरत को गले से लगा लिया।
बाद में भरत अपने भाई राम की चरणपादुकाओं को लेकर अयोध्या लौट गए और उनके वापस न आने तक उनकी पूजा की। राम और भरत के भातृ प्रेम की कथा सुनकर लोग भावविभोर हो गए। कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं। प्यार से भगवान को हासिल किया जा सकता है। इस दौरान भगवान राम और भरत मिलन की जीवंत झांकियों का प्रदर्शन किया गया।