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‘सुखमय जीवन के लिए सत्संग जरूरी’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:59 PM IST
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बाईपास स्थित एक मार्केट में आयोजित सत्संग में हंसलोक आश्रम दिल्ली से आई
साध्वी हरिप्रिया ने कहा कि मानव जीवन को सुखमय बिताने के लिए सत्संग जरूरी
है, क्योंकि इसमें ही संत समागम होता है।
उन्होंने कहा कि संत संसार में शांति के लिए आते हैं, क्रांति के लिए नहीं। किसी ने कहा भी है कि दुनिया के झमेले हरगिज कम न होंगे, अफसोस है कि एक दिन दुनियां में हम न होंगे अर्थात श्मशान का शरीर पर अधिकार निश्चित है। ठीक इसी तरह आत्मा का अधिकार परमात्मा पर है जिसे मानव अज्ञानतावश भूल जाता है।
ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या के अनुसार जब जीव भजन के द्वारा आत्मा को परमात्मा से जोड़ेगा, तभी जीवात्मा कहलाने का अधिकारी बनेगा। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि नव वर्ष पर हम सभी आध्यात्म ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने का संकल्प लें तथा इस धरा को अपने सद् व्यवहार और सद्ज्ञान से धन्य बनाएं।
इसके अलावा मिथलेश सिंह, रामसनेही शर्मा, राधेश्याम, महिपाल, रामऔतार शास्त्री, रामजीत सक्सेना और जिलेदार सिंह ने भी भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। पुजारी नत्थू सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
उन्होंने कहा कि संत संसार में शांति के लिए आते हैं, क्रांति के लिए नहीं। किसी ने कहा भी है कि दुनिया के झमेले हरगिज कम न होंगे, अफसोस है कि एक दिन दुनियां में हम न होंगे अर्थात श्मशान का शरीर पर अधिकार निश्चित है। ठीक इसी तरह आत्मा का अधिकार परमात्मा पर है जिसे मानव अज्ञानतावश भूल जाता है।
ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या के अनुसार जब जीव भजन के द्वारा आत्मा को परमात्मा से जोड़ेगा, तभी जीवात्मा कहलाने का अधिकारी बनेगा। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि नव वर्ष पर हम सभी आध्यात्म ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने का संकल्प लें तथा इस धरा को अपने सद् व्यवहार और सद्ज्ञान से धन्य बनाएं।
इसके अलावा मिथलेश सिंह, रामसनेही शर्मा, राधेश्याम, महिपाल, रामऔतार शास्त्री, रामजीत सक्सेना और जिलेदार सिंह ने भी भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। पुजारी नत्थू सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।