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अन्नदाता के लिए आफत बनकर बरसा पानी
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
Updated Wed, 20 Jan 2016 12:37 AM IST
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मंगलवार को दिन भर हुई रिमझिम बारिश किसानों के लिए आफत लेकर आई। मौसम का मिजाज बदलने व बरसात की वजह से न्यूनतम व अधिकतम तापमान गिरने से आलू, सरसों, मटर व चना की फसल नष्ट होने की आशंका गहराने लगी है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का का मानना है कि सप्ताह भर तक मौसम का मिजाज ऐसे ही बिगड़ा रहा तो 15 से 20 फीसदी तक पैदावार घट सकती है। साथ ही यह भी कहते हैं कि गेहूं उत्पादक किसानों के लिए बारिश से फायदा होगा।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि बदली के बीच बूंदाबांदी एवं नम वातावरण में झुलसा का रोग बहुत तेजी से फैलता है। मंगलवार को जिस तरह से बादल छाए रहे और पानी बरसा, उससे आलू में झुलसा रोग तेजी से फैलने के आसार बढ़ गए हैं।
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यदि जल्द ही मौसम सामान्य न हुआ तो धूप निकलने के बाद जैसे तापमान बढ़ेगा वैसे ही झुलसा रोग पैर फैलाने लगेगा। मौसम में यह परिवर्तन किसानों के लिए खतरे की घंटी है।अपर जिला कृषि अधिकारी रामकुमार ने बताया कि यदि 5 से 7 दिन तक यूं ही कोहरा व पाला गिरता रहा व धूप न निकली तो राई, सरसों, चना, मटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचेगा।
पाला पड़ने से सरसों के खेतों में फूल झड़ने लगते हैं। मटर में सफेद गेरूर रोग फैल सकता है। इससे पत्ती व फली दोनों को नुकसान पहुंचेगा। सूर्य की रोशनी न मिलने से सरसों में माहू कीट का प्रकोप भी फैलता है। उन्होंने बेमौसम बारिश व बदलीयुक्त मौसम से किसानों के लिए 15 से 20 फीसदी पैदावार घटने का खतरा जताया है।
अरहर की फसल पर भी बुरा असर पड़ रहा है। 8 से 10 दिन के अंदर मौसम साफ न हुआ तो रोग ज्यादा तेजी से फैलेंगे। उन्होंने कहा कि किसान बचाव के लिए खेतों में हल्का पानी लगाकर नियमित रूप से जमीन में नमी बरकरार रखें। वहीं शाम को खेतों के पास आग जलाकर धुंआ करें, जिससे फसलों को बचाया जा सकता है।
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कृषि विभाग के अधिकारियों का का मानना है कि सप्ताह भर तक मौसम का मिजाज ऐसे ही बिगड़ा रहा तो 15 से 20 फीसदी तक पैदावार घट सकती है। साथ ही यह भी कहते हैं कि गेहूं उत्पादक किसानों के लिए बारिश से फायदा होगा।
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जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि बदली के बीच बूंदाबांदी एवं नम वातावरण में झुलसा का रोग बहुत तेजी से फैलता है। मंगलवार को जिस तरह से बादल छाए रहे और पानी बरसा, उससे आलू में झुलसा रोग तेजी से फैलने के आसार बढ़ गए हैं।
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यदि जल्द ही मौसम सामान्य न हुआ तो धूप निकलने के बाद जैसे तापमान बढ़ेगा वैसे ही झुलसा रोग पैर फैलाने लगेगा। मौसम में यह परिवर्तन किसानों के लिए खतरे की घंटी है।अपर जिला कृषि अधिकारी रामकुमार ने बताया कि यदि 5 से 7 दिन तक यूं ही कोहरा व पाला गिरता रहा व धूप न निकली तो राई, सरसों, चना, मटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचेगा।
पाला पड़ने से सरसों के खेतों में फूल झड़ने लगते हैं। मटर में सफेद गेरूर रोग फैल सकता है। इससे पत्ती व फली दोनों को नुकसान पहुंचेगा। सूर्य की रोशनी न मिलने से सरसों में माहू कीट का प्रकोप भी फैलता है। उन्होंने बेमौसम बारिश व बदलीयुक्त मौसम से किसानों के लिए 15 से 20 फीसदी पैदावार घटने का खतरा जताया है।
अरहर की फसल पर भी बुरा असर पड़ रहा है। 8 से 10 दिन के अंदर मौसम साफ न हुआ तो रोग ज्यादा तेजी से फैलेंगे। उन्होंने कहा कि किसान बचाव के लिए खेतों में हल्का पानी लगाकर नियमित रूप से जमीन में नमी बरकरार रखें। वहीं शाम को खेतों के पास आग जलाकर धुंआ करें, जिससे फसलों को बचाया जा सकता है।