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चक्रवाती तूफान ने मचाई तबाही
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Thu, 14 May 2015 12:22 AM IST
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अभी भूकंप की दहशत से लोग उबर नहीं पाए थे कि बुधवार सुबह आए तूफान ने जलालाबाद क्षेत्र में भीषण तबाही मचाई। करीब पांच किमी की परिधि में बसे दर्जनों गांवों में भारी नुकसान हुआ। दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़ गए। सीएचसी समेत कई जगहों पर चहारदीवारी टूट गई। टीन शेड, छप्पर और लकड़ी के खोखे कई सौ मीटर दूर जा पहुंचे। मक्का, उर्द, मूंग, खरबूजा की फसलों में जबर्दस्त नुकसान हुआ है।
जलालाबाद कसबा व आसपास क्षेत्र में बुधवार सुबह साढ़े सात बजे चक्रवाती तूफान आया। इसके साथ ही जोरदार बारिश होने लगी। छोटी मस्जिद के पास रखा पप्पू का खोखा उड़ गया। खोखे में रखे टायर, ट्यूब, साइकिल व अन्य सामान बिखर गए। दुकानदार ने बताया कि दुकान में गेहूं खरीदने के लिए 20 हजार रुपये रखे थे। जिनका कोई पता नहीं चला।
जलालाबाद में ही तौफीक की दुकान के सामने रखे टीन के बक्शा व बखारी पलट कर पिचक गई। शीलू सक्सेना की जीटी रोड के पास रखी 13 बर्फ की सिल्ली टूटकर नष्ट हो गईं। नीरज की बर्फ की ठिलिया से भगौना, खोया, बरतन आदि हवा के झोकों से दूर जा गिरे। कहरौंधा मोहल्ला निवासी शेर सिंह यादव की छत पर नीम का पेड़ गिरने से लेंटर चटक गया। वहीं शिवशरन की तिवारी की छत पर नीम का पेड़ की डंगाल गिरने से दीवार चिटक गई।
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जलालाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की करीब 200 मीटर बाउंड्री टूट गई। लिली कोल्डस्टोरेज की चहारदीवारी भी ईंटों के ढेर में तब्दील हो गई। सरस्वती शिशु मंदिर की टीन शेड उड़कर कई मीटर दूर जा गिरा। दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़ गए। रेलवे लाइन पर भी जगह-जगह पेड़ गिर गए।
खेतों में खड़ी मक्का, उर्द, मूंग, तरबूज की फसल भी खेत में गिर गई। गुगरापुर, जलालाबाद, नेकपुर, खुदलापुर, पांडेयपुरवा, हनुमंतखेड़ा समेत आसपास के दर्जनों गांवों में चक्रवाती तूफान ने करीब आधे घंटे में ही भारी संपत्ति का नुकसान हुआ। इस तूफान के दौरान बरसा पानी जगह-जगह सड़कों पर भर गया।
सालों बाद आया ऐसा तूफान
कसबे के गोविंद वर्मा, सुनील श्रीवास्तव, दिलीप सक्सेना, श्यामू सैनी, जलील अहमद आदि लोगों का कहना है कि करीब 25 सालों बाद उनके गांव में इतनी तेज आंधी व पानी आया है। इससे चारों तरफ हाहाकार मच गया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जांच कराकर नुकसान का मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है।
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जलालाबाद कसबा व आसपास क्षेत्र में बुधवार सुबह साढ़े सात बजे चक्रवाती तूफान आया। इसके साथ ही जोरदार बारिश होने लगी। छोटी मस्जिद के पास रखा पप्पू का खोखा उड़ गया। खोखे में रखे टायर, ट्यूब, साइकिल व अन्य सामान बिखर गए। दुकानदार ने बताया कि दुकान में गेहूं खरीदने के लिए 20 हजार रुपये रखे थे। जिनका कोई पता नहीं चला।
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जलालाबाद में ही तौफीक की दुकान के सामने रखे टीन के बक्शा व बखारी पलट कर पिचक गई। शीलू सक्सेना की जीटी रोड के पास रखी 13 बर्फ की सिल्ली टूटकर नष्ट हो गईं। नीरज की बर्फ की ठिलिया से भगौना, खोया, बरतन आदि हवा के झोकों से दूर जा गिरे। कहरौंधा मोहल्ला निवासी शेर सिंह यादव की छत पर नीम का पेड़ गिरने से लेंटर चटक गया। वहीं शिवशरन की तिवारी की छत पर नीम का पेड़ की डंगाल गिरने से दीवार चिटक गई।
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जलालाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की करीब 200 मीटर बाउंड्री टूट गई। लिली कोल्डस्टोरेज की चहारदीवारी भी ईंटों के ढेर में तब्दील हो गई। सरस्वती शिशु मंदिर की टीन शेड उड़कर कई मीटर दूर जा गिरा। दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़ गए। रेलवे लाइन पर भी जगह-जगह पेड़ गिर गए।
खेतों में खड़ी मक्का, उर्द, मूंग, तरबूज की फसल भी खेत में गिर गई। गुगरापुर, जलालाबाद, नेकपुर, खुदलापुर, पांडेयपुरवा, हनुमंतखेड़ा समेत आसपास के दर्जनों गांवों में चक्रवाती तूफान ने करीब आधे घंटे में ही भारी संपत्ति का नुकसान हुआ। इस तूफान के दौरान बरसा पानी जगह-जगह सड़कों पर भर गया।
सालों बाद आया ऐसा तूफान
कसबे के गोविंद वर्मा, सुनील श्रीवास्तव, दिलीप सक्सेना, श्यामू सैनी, जलील अहमद आदि लोगों का कहना है कि करीब 25 सालों बाद उनके गांव में इतनी तेज आंधी व पानी आया है। इससे चारों तरफ हाहाकार मच गया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जांच कराकर नुकसान का मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है।