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Kannauj News: सिमटी मोक्षदायिनी की जलधारा, काली नदी से टूटा संगम
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महादेवी घाट पर गंगा के पानी में दिख रही रेत।
- फोटो : महादेवी घाट पर गंगा के पानी में दिख रही रेत।
कन्नौज। भीषण गर्मी का असर अब इंसान, पशु-पक्षियों के साथ ही प्रकृति पर भी दिखने लगा है। हालात ऐसे हैं कि मोक्षदायिनी मां गंगा की धारा कई जगहों पर सिमटती जा रही है। महादेवी घाट पर पानी कम होने से काली नदी से संगम भी टूट गया है।
इत्र नगरी के महादेवी घाट पर दिखने वाला गंगा और काली नदी का संगम भी टूट गया है। नहर जैसी हुई गंगा की धारा के बीच इन दिनों जगह-जगह रेत के टीले उभर आए हैं। ऐसे में पशु-पक्षियों के साथ स्नान को पहुंच रहे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और आस्था पर भी आघात पहुंच रहा है। महादेवी घाट, दुर्जनापुर, जलेसर समेत कई घाट से 200 मीटर दूर गंगा की धारा पहुंच गई हैं।
इस सिमटी हुई धारा के बीच घाटों पर जगह-जगह रेत के टीले उभरे हुए दूर से ही नजर आने लगे हैं। पानी इतना कम हो गया है कि वहां पहुंचने वाले लोगों के घुटने भर पानी नहीं बचा है। जल में रहने वाले जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट गहरा गया है। अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह का कहना है कि गर्मी के मौसम में गंगा में पानी कम हो जाता है। गंगा में बने बांधों से सिंचाई के लिए पानी नहरों में छोड़ा जा रहा है। जलीय जीवों को बचाने के लिए नरौरा बांध से पानी रिलीज किया जा रहा है।
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रेत में फंस रही नाव
गंगा में कम हुए जल की वजह से नाव भी रेत में फंस रही हैं। अधिकांश नाविकों ने अपनी-अपनी नाव को घाट के किनारे खड़ा कर दिया है। इक्का-दुक्का जो चला भी रहे हैं वह नाविक बीच नदी में उतरकर नावों को खुद खींचकर बीच जल धारा की ओर ले जाते हैं। इसके बाद गंगा की धारा को पार करते हैं।
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इत्र नगरी के महादेवी घाट पर दिखने वाला गंगा और काली नदी का संगम भी टूट गया है। नहर जैसी हुई गंगा की धारा के बीच इन दिनों जगह-जगह रेत के टीले उभर आए हैं। ऐसे में पशु-पक्षियों के साथ स्नान को पहुंच रहे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और आस्था पर भी आघात पहुंच रहा है। महादेवी घाट, दुर्जनापुर, जलेसर समेत कई घाट से 200 मीटर दूर गंगा की धारा पहुंच गई हैं।
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इस सिमटी हुई धारा के बीच घाटों पर जगह-जगह रेत के टीले उभरे हुए दूर से ही नजर आने लगे हैं। पानी इतना कम हो गया है कि वहां पहुंचने वाले लोगों के घुटने भर पानी नहीं बचा है। जल में रहने वाले जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट गहरा गया है। अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह का कहना है कि गर्मी के मौसम में गंगा में पानी कम हो जाता है। गंगा में बने बांधों से सिंचाई के लिए पानी नहरों में छोड़ा जा रहा है। जलीय जीवों को बचाने के लिए नरौरा बांध से पानी रिलीज किया जा रहा है।
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रेत में फंस रही नाव
गंगा में कम हुए जल की वजह से नाव भी रेत में फंस रही हैं। अधिकांश नाविकों ने अपनी-अपनी नाव को घाट के किनारे खड़ा कर दिया है। इक्का-दुक्का जो चला भी रहे हैं वह नाविक बीच नदी में उतरकर नावों को खुद खींचकर बीच जल धारा की ओर ले जाते हैं। इसके बाद गंगा की धारा को पार करते हैं।