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Kannauj News: डार्कजोन नहर में नौ साल बाद भी नहीं आया पानी
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कन्नौज। डार्कजोन घोषित हो चुके तालग्राम व जलालाबाद ब्लॉक के गांवों में सिंचाई के लिए खोदी गई नहर में नौ साल बाद भी पानी नहीं आया। बोरिंग पर रोक होने के कारण इस क्षेत्र में किसानों के सामने रबी की फसलों में सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया है। योगी सरकार ने नहर का काम पूरा करने के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया था। इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में इस साल भी पानी आने की उम्मीद खत्म होती जा रही है।
डार्क जोन घोषित हो चुके तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक के किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए नहर निर्माण का कार्य चल रहा है। 161 करोड़ की लागत से इस नहर परियोजना को मंजूरी वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दी थी। पहले तालग्राम इलाके में वन विभाग ने एनओसी नहीं दी तो सिलुआपुर व किशनपुर के कई ग्रामीण हाईकोर्ट चले गए जिससे काम अटका गया। वन विभाग ने तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाकर मंजूरी दे दी तो किसानों ने भी मुकदमे वापस ले लिए। इसके बाद बजट आड़े आ गया।
बजट के अभाव में कार्य कछुआ गति से रुक रुककर हो रहा था। अभी तक नहर में सात माइनर और 140 पुलिया बनी हैं जिसमें केवल 40 पुलिया ही बन पाई हैं। माइनर कुछ जगह अधूरे हैं। नहर अभी पूरी नहीं हुई है। अब यूपी सरकार ने नहर के कार्य के लिए 7.2639 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए तीन करोड़ रुपये दिए हैं। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार रबी की सीजन तक पानी आ जाएगा, लेकिन अभी तक पानी नहीं आया, जिससे इन ब्लॉकों में हजारों बीघा गेहूं व आलू की फसल में सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया है।
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सदर ब्लॉक भी हो चुका डार्कजोन घोषित
जिले में तालग्राम व जलालाबाद के बाद अब कन्नौज सदर ब्लॉक भी डार्कजोन घोषित हो चुका है। यहां भी बोरिंग पर रोक लगा दी गई है। लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि बोरिंग कराना है तो विभाग से अनुमति लेनी होगी। जिले में कई ब्लॉकों में भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसका मुख्य कारण अत्यधिक जलदोहन है। ग्रीष्मकालीन मक्का की पैदावार में हर साल अन्य फसलों से सात गुणा अधिक जलदोहन किया जा रहा है।
वर्जन
जल्द ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाएगी। नहर परियोजना में अभी दस प्रतिशत काम शेष है। जल्द ही कार्य पूरा कराकर पानी छोड़ दिया जाएगा।
-देवेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी
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डार्क जोन घोषित हो चुके तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक के किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए नहर निर्माण का कार्य चल रहा है। 161 करोड़ की लागत से इस नहर परियोजना को मंजूरी वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दी थी। पहले तालग्राम इलाके में वन विभाग ने एनओसी नहीं दी तो सिलुआपुर व किशनपुर के कई ग्रामीण हाईकोर्ट चले गए जिससे काम अटका गया। वन विभाग ने तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाकर मंजूरी दे दी तो किसानों ने भी मुकदमे वापस ले लिए। इसके बाद बजट आड़े आ गया।
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बजट के अभाव में कार्य कछुआ गति से रुक रुककर हो रहा था। अभी तक नहर में सात माइनर और 140 पुलिया बनी हैं जिसमें केवल 40 पुलिया ही बन पाई हैं। माइनर कुछ जगह अधूरे हैं। नहर अभी पूरी नहीं हुई है। अब यूपी सरकार ने नहर के कार्य के लिए 7.2639 करोड़ रुपये और भूमि अधिग्रहण के लिए तीन करोड़ रुपये दिए हैं। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार रबी की सीजन तक पानी आ जाएगा, लेकिन अभी तक पानी नहीं आया, जिससे इन ब्लॉकों में हजारों बीघा गेहूं व आलू की फसल में सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया है।
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सदर ब्लॉक भी हो चुका डार्कजोन घोषित
जिले में तालग्राम व जलालाबाद के बाद अब कन्नौज सदर ब्लॉक भी डार्कजोन घोषित हो चुका है। यहां भी बोरिंग पर रोक लगा दी गई है। लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि बोरिंग कराना है तो विभाग से अनुमति लेनी होगी। जिले में कई ब्लॉकों में भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसका मुख्य कारण अत्यधिक जलदोहन है। ग्रीष्मकालीन मक्का की पैदावार में हर साल अन्य फसलों से सात गुणा अधिक जलदोहन किया जा रहा है।
वर्जन
जल्द ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाएगी। नहर परियोजना में अभी दस प्रतिशत काम शेष है। जल्द ही कार्य पूरा कराकर पानी छोड़ दिया जाएगा।
-देवेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी