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सुविधा शुल्क पर डाक्टरों में गाली-गलौज
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:04 AM IST
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जिला अस्पताल में गाली-गलौज करते डाक्टर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आपरेशन के नाम पर 10 हजार रुपये ले लेने का आरोप लगा तीमारदार के सहयोगी डाक्टर ने जिला अस्पताल के आर्थो सर्जन से विवाद किया। इस दौरान दोनों में गाली-गलौज भी हुई। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला रफादफा कर दोनों पक्षों को शांत कराया। शहर के मोहल्ला काजीटोला निवासी रामबक्श ने पत्नी शांति को हाथ का आपरेशन कराने के लिए करीब 10 दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।
पीड़ित का आरोप है कि आर्थो सर्जन डा. दयानंद ने आपरेशन क रने से पहले मरीज को देखा। आश्वासन दिया कि प्लेट डालकर हाथ को ठीक कर दिया जाएगा। इसके बदले उन्होंने 12 हजार रुपये मांगे। 10 हजार रुपये दे दिए, बाकी के 2 हजार रुपये आपरेशन के बाद देने का वादा किया। 10 दिन बीतने के बाद भी आपरेशन नहीं किया गया। इसकी जानकारी पीड़ित ने डा. रविंद्र साहू को दी। दर्जनों तीमारदारों के साथ वे आपरेशन थियेटर पहुंचे। जहां डाक्टर दयानंद से रुपये वापस करने की बात कही।
इसी बात पर दोनों डाक्टरों में विवाद हो गया। एक दूसरे को गाली गलौज की गई। यहीं नहीं मामला मारपीट पर आ गया। तभी सूचना जिला अस्पताल चौकी पुलिस को हुई। पुलिस ने किसी तरह मामले को शांत कराया। डा. दयानंद का कहना था कि वे मरीजों के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। कुछ अराजकतत्व काम में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। उनका रिकार्ड देख लिया जाए कि महीने में क ई दर्जन आपरेशन कर मरीजों को ठीक कर चुके हैं।
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इस संबंध में जिला अस्पताल के सीएमएस डा. सीपी सिंह का कहना है कि जबसे जिला अस्पताल में डाक्टर दयानंद ने ज्वाइनिंग की तब से हड्डी से संबंधित मरीजों को रेफर नहीं किया जा रहा है। रोजाना मरीजों के आपरेशन किए जा रहे हैं। एक माह में 42 आपरेशन डा. दयानंद ने डा. यूसी चतुर्वेदी के साथ मिलकर किए हैं।
फिर भी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों से भी पूछताछ की जा रही है। जिला अस्पताल के पुलिस चौकी के एसआई सुनील कुमार सक्सेना ने बताया कि वह अस्पताल में वाद विवाद होने की सूचना पर मौके पर गए थे, लेकिन किसी पक्ष ने कोई शिकायत नहीं दी है। उनके पहुंचने से पहले मामला शांत हो गया था।
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पीड़ित का आरोप है कि आर्थो सर्जन डा. दयानंद ने आपरेशन क रने से पहले मरीज को देखा। आश्वासन दिया कि प्लेट डालकर हाथ को ठीक कर दिया जाएगा। इसके बदले उन्होंने 12 हजार रुपये मांगे। 10 हजार रुपये दे दिए, बाकी के 2 हजार रुपये आपरेशन के बाद देने का वादा किया। 10 दिन बीतने के बाद भी आपरेशन नहीं किया गया। इसकी जानकारी पीड़ित ने डा. रविंद्र साहू को दी। दर्जनों तीमारदारों के साथ वे आपरेशन थियेटर पहुंचे। जहां डाक्टर दयानंद से रुपये वापस करने की बात कही।
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इसी बात पर दोनों डाक्टरों में विवाद हो गया। एक दूसरे को गाली गलौज की गई। यहीं नहीं मामला मारपीट पर आ गया। तभी सूचना जिला अस्पताल चौकी पुलिस को हुई। पुलिस ने किसी तरह मामले को शांत कराया। डा. दयानंद का कहना था कि वे मरीजों के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। कुछ अराजकतत्व काम में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। उनका रिकार्ड देख लिया जाए कि महीने में क ई दर्जन आपरेशन कर मरीजों को ठीक कर चुके हैं।
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इस संबंध में जिला अस्पताल के सीएमएस डा. सीपी सिंह का कहना है कि जबसे जिला अस्पताल में डाक्टर दयानंद ने ज्वाइनिंग की तब से हड्डी से संबंधित मरीजों को रेफर नहीं किया जा रहा है। रोजाना मरीजों के आपरेशन किए जा रहे हैं। एक माह में 42 आपरेशन डा. दयानंद ने डा. यूसी चतुर्वेदी के साथ मिलकर किए हैं।
फिर भी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों से भी पूछताछ की जा रही है। जिला अस्पताल के पुलिस चौकी के एसआई सुनील कुमार सक्सेना ने बताया कि वह अस्पताल में वाद विवाद होने की सूचना पर मौके पर गए थे, लेकिन किसी पक्ष ने कोई शिकायत नहीं दी है। उनके पहुंचने से पहले मामला शांत हो गया था।