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गांजे का गढ़ बना कन्नौज
Updated Fri, 23 Nov 2018 12:15 AM IST
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कन्नौज। जिले में गांजा तस्करी का काला धंधा तेजी से फलफूल रहा है। रोजाना करीब तीन से चार क्विंटल गांजे की आमद जिले में हो रही है। उड़ीसा के मलखान गिरी और नेपाल से करीब दो हजार 22 सौ रुपये किलो में गांजा लाकर इसे पांच से आठ हजार रुपये में बेचा जा रहा है। मोटा मुनाफा होने से लोग गांजे की तस्करी में लगे हैं। छत्तीसगढ़ और एमपी में यहां के कई लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। पुलिस के आला अफसर जल्द इनके खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी भी कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो गांजा तस्करी से जुड़े लोग पहले चंदन तस्करी से जुड़े थे। चंदन तस्करी पर पुलिस की सख्ती और चंदन की लकड़ी मिलने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए इन लोगों ने गांजा तस्करी की ओर रुख किया। उड़ीसा का मलखान गिरी इलाका गांजे की खेती से लिए प्रसिद्ध है। यहां गांजा दो से 22 सौ रुपये किलो तक में मिल जाता है, जिसे यहां लाकर पांच से आठ हजार रुपये किलो में बेचा जाता है। जिले में रोजाना तीन से चार क्विंटल गांजे की आमद हो रही है। जिले के साथ ही आसपास के जनपदों कानपुर, कानपुर देहात, हरदोई, इटावा, औरैया तक में यहां से गांजा भेजा जा रहा है। आगरा और दिल्ली तक में गांजे की तस्करी हो रही है। शहर के बगिया फजल इमाम के अलावा कुछ और इलाकों में इनकी कुछ लोग खुलआम बिक्री कर रहे हैं। इलाकाई लोग भी इनसे तंग है। कुछ लोगों का तो कहना है कि पुलिस को जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। गांजे की फसल मार्च माह में तैयार हो जाती है। इस समय गांजे के दाम और गिर जाते हैं। मार्च से लेकर अप्रैल मई तक गांजे की तस्करी और तेज हो जाती है। तस्कर इस समय सस्ते दामों में गांजा लाकर उन्हें तीन से चार गुने दामों में बेचते हैं।
गांजा तस्करी से जुड़े जिले के कई लोग छत्तीसगढ़ और एमपी में पकड़े भी जा चुके हैं। सितंबर माह में यहां के कुछ लोगों को छत्तीसगढ़ पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें कई तस्कर तो ऐसे हैं जो इसी धंधे के दाम पर मालामाल हो गए।
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तस्करी के लिए कार और दूसरे वाहनों को इस तरह से तैयार किया जाता है कि इसमें छिपा गांजा तलाशने पर भी न मिले। तस्कर गाड़ियों में गांजा छिपाने के लिए ऐसी जगह तैयार कराते हैं, जहां गांजा रखकर आसानी से लाया जा सके। कई बार पुलिस भी चकमा खा जाती है।
जिले में नशीले पदार्थों की बिक्री किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी। कुछ गांजा तस्करों के नाम सामने आए हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जाएगा। छत्तीसगढ़ और एमपी की जेलों में जो भी बंद हो चुके हैं उनके बारे में जानकारी कर उनकी लोकेशन पता की जाएगी। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- अमरेंद्र प्रसाद सिंह, एसपी कन्नौज।
-मलखान गिरी और नेपाल से आ रहा रोजाना तीन से चार क्विंटल गांजा
-गांजा तस्करी में जिले के कई लोगों पर छत्तीसगढ़ और एमपी में दर्ज हो चुके मुकदमें
-शहर के कुछ इलाकों में खुलेआम हो रही बिक्री
अमर उजाला ब्यूरो
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सूत्रों की मानें तो गांजा तस्करी से जुड़े लोग पहले चंदन तस्करी से जुड़े थे। चंदन तस्करी पर पुलिस की सख्ती और चंदन की लकड़ी मिलने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए इन लोगों ने गांजा तस्करी की ओर रुख किया। उड़ीसा का मलखान गिरी इलाका गांजे की खेती से लिए प्रसिद्ध है। यहां गांजा दो से 22 सौ रुपये किलो तक में मिल जाता है, जिसे यहां लाकर पांच से आठ हजार रुपये किलो में बेचा जाता है। जिले में रोजाना तीन से चार क्विंटल गांजे की आमद हो रही है। जिले के साथ ही आसपास के जनपदों कानपुर, कानपुर देहात, हरदोई, इटावा, औरैया तक में यहां से गांजा भेजा जा रहा है। आगरा और दिल्ली तक में गांजे की तस्करी हो रही है। शहर के बगिया फजल इमाम के अलावा कुछ और इलाकों में इनकी कुछ लोग खुलआम बिक्री कर रहे हैं। इलाकाई लोग भी इनसे तंग है। कुछ लोगों का तो कहना है कि पुलिस को जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। गांजे की फसल मार्च माह में तैयार हो जाती है। इस समय गांजे के दाम और गिर जाते हैं। मार्च से लेकर अप्रैल मई तक गांजे की तस्करी और तेज हो जाती है। तस्कर इस समय सस्ते दामों में गांजा लाकर उन्हें तीन से चार गुने दामों में बेचते हैं।
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गांजा तस्करी से जुड़े जिले के कई लोग छत्तीसगढ़ और एमपी में पकड़े भी जा चुके हैं। सितंबर माह में यहां के कुछ लोगों को छत्तीसगढ़ पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें कई तस्कर तो ऐसे हैं जो इसी धंधे के दाम पर मालामाल हो गए।
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तस्करी के लिए कार और दूसरे वाहनों को इस तरह से तैयार किया जाता है कि इसमें छिपा गांजा तलाशने पर भी न मिले। तस्कर गाड़ियों में गांजा छिपाने के लिए ऐसी जगह तैयार कराते हैं, जहां गांजा रखकर आसानी से लाया जा सके। कई बार पुलिस भी चकमा खा जाती है।
जिले में नशीले पदार्थों की बिक्री किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी। कुछ गांजा तस्करों के नाम सामने आए हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जाएगा। छत्तीसगढ़ और एमपी की जेलों में जो भी बंद हो चुके हैं उनके बारे में जानकारी कर उनकी लोकेशन पता की जाएगी। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- अमरेंद्र प्रसाद सिंह, एसपी कन्नौज।
-मलखान गिरी और नेपाल से आ रहा रोजाना तीन से चार क्विंटल गांजा
-गांजा तस्करी में जिले के कई लोगों पर छत्तीसगढ़ और एमपी में दर्ज हो चुके मुकदमें
-शहर के कुछ इलाकों में खुलेआम हो रही बिक्री
अमर उजाला ब्यूरो